होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉकेड से गहर रहा ईंधन संकट, भुखमरी की कगार पर 4.5 करोड़ लोग, 22500 नाविक समुद्र में फंसे
ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर देखने को मिल रहा है. दुनिया के करीब 20% तेल सप्लाई वाले इस अहम समुद्री मार्ग के बाधित होने से ईंधन कीमतों में तेज उछाल आया है, हजारों नाविक फंस गए हैं और खाद्य संकट का खतरा बढ़ गया है. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है.

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने अब वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है. सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) पर ईरान के कड़े नियंत्रण ने दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में आग लगा दी है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने इस जलमार्ग को ब्लॉक कर दिया है. इस एक कदम ने न केवल खाड़ी देशों में सैकड़ों जहाजों को फंसा दिया है, बल्कि पूरी दुनिया को एक बड़े आर्थिक और मानवीय संकट की धकेल दिया है.
ईंधन की कीमतों में हाहाकार
AP की रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने का सबसे बुरा असर आम आदमी की जेब पर पड़ा है.
- अमेरिका में पेट्रोल: जंग शुरू होने के बाद से अमेरिका में गैस (पेट्रोल) की औसत कीमतें 50% तक बढ़ गई हैं. गुरुवार को एएए (AAA) के मुताबिक, एक गैलन पेट्रोल की कीमत 4.56 डॉलर पहुंच गई.
- विमान ईंधन: हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं, जिससे एविएशन सेक्टर संकट में है.
व्यापार और शिपिंग पर गहरा असर
यह जलमार्ग दुनिया के लिए ‘लाइफलाइन’ की तरह है, लेकिन अब यहां सन्नाटा पसरा है.
- तेल की सप्लाई: दुनिया के कुल तेल व्यापार का 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. इसके अलावा प्राकृतिक गैस और फर्टिलाइजर की सप्लाई भी यहीं से होती है.
- जहाजों की आवाजाही: युद्ध से पहले यहां से रोज 100 से 130 जहाज गुजरते थे. लेकिन जंग शुरू होने से 4 मई तक यहां से सिर्फ 534 जहाज ही निकल पाए हैं (सामान्य स्थिति में यह संख्या 6,500 से ज्यादा होती).
- इंश्योरेंस का बोझ: जहाजों का बीमा प्रीमियम (Insurance rates) माल की कीमत का 1% से बढ़कर 10% तक पहुंच गया है.
फंसी हुई जिंदगियां और मानवीय संकट
सिर्फ व्यापार ही नहीं, इंसानी जिंदगियां भी इस तनाव की भेंट चढ़ रही हैं.
- फंसे हुए जहाज: फारस की खाड़ी में वर्तमान में 87 देशों के 1,550 जहाज फंसे हुए हैं.
- नाविकों का संकट: इन जहाजों पर दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के लगभग 22,500 नाविक फंसे हुए हैं. अब तक 10 नाविकों की जान जा चुकी है और 32 जहाजों पर हमले हुए हैं.
- भुखमरी का डर: संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि अगर यह रास्ता जल्द नहीं खुला, तो एशिया और अफ्रीका में 4.5 करोड़ लोग भुखमरी का शिकार हो सकते हैं.
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कूटनीतिक गतिरोध और ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’
ईरान का साफ कहना है कि जब तक युद्ध समाप्त नहीं होता और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी नहीं हटती, वह होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलेगा. दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह रोकने की शर्त पर अड़े हैं. अमेरिका ने जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ शुरू किया था, जिसमें 15,000 सैनिक और 100 विमान लगाए गए थे, लेकिन महज दो दिन बाद ही मंगलवार को इसे रोकना पड़ा. अमेरिका इस मिशन के तहत अब तक केवल 2 जहाजों को ही बाहर निकाल सका है.