अमेरिका और ईरान के बीच UN में हुई 3 घंटे की बैठक होर्मुज खोलने लिए तेहरान ने फिर बताई अपनी मांग
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के बगल में बैठे ट्रंप ने ईरान के साथ हुई बैठक को सकारात्मक बताया और कहा कि समझौता करना ईरान के हित में होगा. ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, बैठक में ईरान ने रणनीतिक होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए अपनी शर्तें भी बताईं.
Highlights
- ईरान के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के साथ तीन घंटे की बैठक.
- ईरान की परमाणु क्षमता का मुद्दा ट्रंप के रुख के केंद्र में है.
- जनरल असेंबली ने ऐसे समय में कूटनीति का एक संभावित मौका दिया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अमेरिकी अधिकारियों ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के साथ तीन घंटे की बैठक की. इससे लगभग सात महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने की रुकी हुई कोशिशों में एक नई उम्मीद जगी है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के बगल में बैठे ट्रंप ने ईरान के साथ हुई बैठक को सकारात्मक बताया और कहा कि समझौता करना ईरान के हित में होगा.
महान देश बन सकता है ईरान
ट्रंप ने कहा, ‘यह एक अच्छी बैठक थी, समझौता करना उनके फायदे में है.’ फरवरी के आखिर में शुरू हुई लड़ाई को खत्म करने वाले संभावित समझौते के बारे में उन्होंने कहा, ‘मैं सोच भी नहीं सकता कि वे ऐसा क्यों नहीं करना चाहेंगे. एक तरफ पूरी तरह बर्बादी है और दूसरी तरफ महान बनने का मौका. यह एक महान देश बन सकता है.’ ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए शर्तें रखीं.
ईरानी ने सामने रखीं अपनी शर्तें
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, बैठक में ईरान ने रणनीतिक होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए अपनी शर्तें भी बताईं.
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकोफ से मुलाकात की. तेहरान ने नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाने, ईरान की फ्रीज की गई संपत्ति को जारी करने और सभी ‘प्रतिरोध’ मोर्चों पर युद्ध खत्म करने की मांग की.
अच्छी रही है मीटिंग
ट्रंप ने जेरेड कुशनर और विटकोफ से बैठक पर टिप्पणी करने को कहा था, लेकिन यह पुष्टि नहीं की कि बैठक में कौन-कौन शामिल हुआ. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अरागची संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के लिए ईरान के मुख्य प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के तौर पर न्यूयॉर्क में हैं. बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए विटकोफ ने कहा, ‘मुझे अभी बहुत अच्छा लग रहा है.’
बाद में ट्रंप ने भी इसी बात को दोहराते हुए कहा, ‘उनकी बैठक बहुत अच्छी रही, और देखते हैं कि इसका क्या नतीजा निकलता है. लेकिन निश्चित रूप से, समझौता करना उनके फायदे में है.
ईरान समझौते के लिए ट्रंप की ‘रेड लाइन’
ये टिप्पणियां तब आईं जब ट्रंप ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम से मुलाकात की. उस बैठक के बाद ट्रंप ने कहा कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत करता रहा है. ट्रंप ने कहा वे हमसे बात करना चाहते हैं. वे हमसे बात कर रहे हैं, आज भी उन्होंने हमसे बात की है और रिश्ते बेहतर हो रहे हैं.
उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन हम उन्हें परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दे सकते और वे यह बात समझते भी हैं.’
कूटनीति का एक दुर्लभ मौका
ईरान की परमाणु क्षमता का मुद्दा ट्रंप के रुख के केंद्र में है. अपनी बातों में अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि किसी भी संभावित समझौते में ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी होगा. इसलिए यह बैठक एक अहम मोड़ पर हो रही है. UN जनरल असेंबली ने दोनों देशों के नेताओं को एक ही शहर में इकट्ठा किया है, जिससे सीधी या परोक्ष कूटनीति का एक दुर्लभ मौका बना है, भले ही कोई औपचारिक बड़ी सफलता अभी नहीं मिली है.
एनर्जी मार्केट प्रभावित
जनरल असेंबली ने ऐसे समय में कूटनीति का एक संभावित मौका दिया है, जब यह टकराव सात महीने का होने वाला है. महीनों से वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत रुकी हुई है, जबकि युद्ध ने एनर्जी मार्केट को बुरी तरह से प्रभावित किया है, क्योंकि होर्मुज से होकर गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही ठप हो गई है.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को पहले कहा था कि ट्रंप न्यूयॉर्क में ईरानी प्रतिनिधियों से मिलने के लिए तैयार हैं, क्योंकि उनका मानना है कि सीधी बातचीत से मुश्किल विवादों को सुलझाने में मदद मिल सकती है. रुबियो ने NBC को बताया कि ट्रंप ऐसी बैठक के लिए तैयार हैं, क्योंकि उनका मानना है कि अगर आप समस्याओं को हल करना चाहते हैं तो लोगों से बातचीत करना जरूरी है.’
हालांकि, उस समय रुबियो ने कहा था कि कोई बैठक तय नहीं हुई है.
ईरान के साथ समझौता या उसे खत्म करना
ट्रंप की ये बातें UN जनरल असेंबली में उनके आक्रामक भाषण के बाद आईं, जिसमें उन्होंने ईरान के मुद्दे को एक कड़े विकल्प के तौर पर पेश किया. अपने भाषण में इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि उन्हें ‘एक बड़ा फैसला लेना है.’
उन्होंने कहा, ‘क्या ईरान के साथ कोई ऐसा समझौता होगा, जिससे वे फिर से खड़े हो सकें और पहले से कहीं ज्यादा बेहतर देश बन सकें, शायद पश्चिम एशिया या दुनिया के सबसे महान देशों में से एक? या फिर मैं इस्लामिक रिपब्लिक को खत्म कर दूं और वह भी जल्दी, ताकि उन्हें लोगों और देशों को फिर से मारने और बर्बाद करने का मौका ही न मिले.’
मध्यावधि चुनावों के नतीजों का इंतजार
ट्रंप ने कहा कि उन्हें यकीन है कि आखिरकार तेहरान के साथ कोई समझौता हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान शायद आगे क्या करना है, यह तय करने से पहले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजों का इंतजार कर रहा है.
उन्होंने कहा, ‘वे यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि मध्यावधि चुनाव में मेरा प्रदर्शन कैसा रहता है. उन्हें यह एहसास नहीं है कि मैं चुनाव नहीं लड़ रहा हूं. मैं वह पहले ही कर चुका हूं और भारी जीत हासिल की थी.’ उन्होंने यह भी बताया कि उनके कार्यकाल में अभी भी ढाई साल बाकी हैं.
उन्होंने कहा कि मध्यावधि चुनाव उनके दिमाग में भी नहीं आते. राष्ट्रपति ने कहा, ‘मेरे दिमाग में बस एक ही बात है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होंगे. ईरान के साथ डील के बारे में बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आखिरकार तेहरान के साथ किसी समझौते पर पहुंच ही जाएगा.
ईरान ने कूटनीति की राह पर लौटने का संकेत दिया
इससे पहले दिन में ईरान ने बातचीत फिर से शुरू करने की इच्छा जताई. हालांकि, तेहरान की मांगें वॉशिंगटन के रुख से काफी अलग हैं. ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि तेहरान ने पिछले हफ्ते मध्यस्थों के जरिए वॉशिंगटन को अपना नया प्रस्ताव भेजा था.
अधिकारी के अनुसार, अगर ईरान की मांगें मान ली जाती हैं, तो वह सात दिनों के भीतर खाड़ी में जहाजों की आवाजाही के लिए होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल सकता है. ईरानी अधिकारी ने यह भी कहा कि बातचीत फिर से शुरू होने से पहले वॉशिंगटन को अपने कूटनीतिक इरादे साफ करने होंगे.
ईरान की मांग
अधिकारी ने पहले रॉयटर्स को बताया था कि अमेरिका को यह घोषणा करनी चाहिए कि वह इस मुद्दे को कूटनीतिक तरीके से सुलझाना चाहता है. इसे आधिकारिक बनाना चाहिए और फिर एक समय-सीमा पर सहमत होना चाहिए. अधिकारी ने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा अमेरिका के लिए कूटनीति की राह पर लौटने का एक सुनहरा मौका है.’
इस रुख से पता चलता है कि तेहरान संयुक्त राष्ट्र की बैठक को दोनों देशों के बीच सार्वजनिक टकराव के एक और मंच के बजाय कूटनीति को फिर से शुरू करने के मौके के तौर पर देखता है. लेकिन ईरान के नेतृत्व ने यह भी कहा है कि वह वॉशिंगटन के दबाव या जबरदस्ती को स्वीकार नहीं करेगा.
समझौते पर पहुंचने के संकेत नहीं मिले
संभावित बैठक के बारे में ट्रंप की हालिया टिप्पणियों के बावजूद, इस बात का कोई तुरंत संकेत नहीं मिला कि वॉशिंगटन और तेहरान किसी समझौते पर पहुंच गए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते रहे हैं, साथ ही बातचीत के दरवाजे भी खुले रखे हैं.
उनके प्रशासन ने मांग की है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की किसी भी कोशिश को छोड़ दे, जबकि तेहरान ने इस बात की गारंटी मांगी है कि वॉशिंगटन सचमुच कूटनीतिक समाधान चाहता है. इसलिए, न्यूयॉर्क में हुई तीन घंटे की संभावित बैठक उस अंतर को कम करने की कोशिश हो सकती है.
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