NSE IPO क्यों नहीं बन पाया देश का सबसे बड़ा पब्लिक ऑफर, क्या रहीं वजहें; MD-CEO ने किया खुलासा

NSE IPO देश का दूसरा सबसे बड़ा IPO बन गया है. शुरुआत में करीब 30,000 करोड़ रुपये के इश्यू साइज की उम्मीद थी, लेकिन अंतिम तौर पर NSE IPO का साइज 22,562 करोड़ रुपये रहा. NSE के MD और CEO Ashishkumar Chauhan ने IPO का साइज कम होने की वजह प्राइस में बदलाव को बताया है.

एनएसई आईपीओ Image Credit: Getty image

Highlights

  • NSE IPO का इश्यू साइज 30,000 करोड़ रुपये से घटकर 22,562 करोड़ रुपये रहा, जिससे यह देश का दूसरा सबसे बड़ा IPO बना.
  • प्राइस में बदलाव से ऑफर की गई हिस्सेदारी 6.2% से घटकर 5.11% हुई, MD-CEO Ashishkumar Chauhan ने बताई वजह.
  • NSE IPO को 90,200 करोड़ रुपये से ज्यादा की डिमांड मिली और इश्यू 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ है.

NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE का बहुप्रतीक्षित IPO आखिरकार भारत का सबसे बड़ा IPO बनने से चूक गया. शुरुआत में NSE IPO का इश्यू साइज करीब 30,000 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद जताई जा रही थी. अगर ऐसा होता तो यह Hyundai Motor India के 27,858.75 करोड़ रुपये और LIC के 20,557.23 करोड़ रुपये के IPO को पीछे छोड़कर देश का सबसे बड़ा IPO बन सकता था. हालांकि, अंतिम तौर पर NSE IPO का इश्यू साइज 22,562 करोड़ रुपये रहा और यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा IPO बन गया.

कीमत घटने से कम हुआ IPO का साइज

NSE के MD और CEO Ashishkumar Chauhan ने मिंट को बताया कि IPO का साइज कम होने की मुख्य वजह प्राइस में बदलाव रहा. उनके मुताबिक, मर्चेंट बैंकर्स की सलाह के आधार पर कंपनी ने IPO की कीमत कम की. इसके बाद कुछ शेयरहोल्डर्स ने भी अपनी ऑफरिंग कम कर दी.

चौहान के अनुसार, शुरुआत में IPO में 6.2% हिस्सेदारी ऑफर करने की योजना थी, लेकिन कीमत कम होने के बाद यह हिस्सेदारी घटकर 5.11% रह गई. कुछ सेलिंग शेयरहोल्डर्स कम कीमत पर शेयर बेचने के इच्छुक नहीं थे. हालांकि, IPO को आगे बढ़ाने के लिए कुछ शेयरहोल्डर्स ने कम कीमत पर अपनी हिस्सेदारी बेचने पर सहमति जताई.

NSE में हिस्सेदारी बेचने को लेकर क्या बोले चौहान?

Ashishkumar Chauhan ने बताया कि NSE को उसके शेयरहोल्डर्स एक महत्वपूर्ण संस्थान के तौर पर देखते हैं. उनके मुताबिक, यही वजह है कि कई पुराने शेयरहोल्डर्स, जिन्होंने वर्षों या दशकों से NSE में हिस्सेदारी रखी हुई है, अपने शेयर बेचने के इच्छुक नहीं थे.

उन्होंने यह भी कहा कि NSE को IPO से मिलने वाली पूंजी की जरूरत नहीं थी. इसका कारण यह है कि NSE पहले से ही एक प्रॉफिटेबल कंपनी है और बड़ी मात्रा में डिविडेंड बांटती है. चौहान के मुताबिक, NSE इस साल भी करीब 8,000 करोड़ रुपये का डिविडेंड बांट रही है, जबकि पिछले साल भी करीब 8,000 करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया गया था.

IPO को मिली 90,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की डिमांड

इश्यू साइज कम होने के बावजूद NSE IPO को निवेशकों की ओर से मजबूत डिमांड मिली. अंतिम दिन IPO कुल 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ. इश्यू को 22,562 करोड़ रुपये के मुकाबले 90,200 करोड़ रुपये से ज्यादा की डिमांड मिली. NSE IPO को करीब 38.5 लाख एप्लीकेशंस मिले.

एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, ऑफर पर मौजूद 8,86,42,911 इक्विटी शेयरों के मुकाबले 50,58,11,384 इक्विटी शेयरों के लिए बोलियां मिलीं. QIB कैटेगरी 12.68 गुना सब्सक्राइब हुई, जबकि NII कैटेगरी में 6.55 गुना सब्सक्रिप्शन मिला. रिटेल कैटेगरी 1.39 गुना और Employee कैटेगरी 2.40 गुना सब्सक्राइब हुई.

NSE शेयर की लिस्टिंग पर भी नजर

NSE के शेयरों की ट्रेडिंग गुरुवार से शुरू होने की उम्मीद है. IPO के लिए प्राइस बैंड 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था. वहीं, ग्रे मार्केट में NSE शेयरों का GMP करीब 2.41% के संभावित प्रीमियम का संकेत दे रहा है.

यह भी पढ़ें: Stock to Watch: फोकस में रहेंगे अडानी ग्रुप के स्टॉक्स, तेल से जुड़े शेयरों पर रखें नजर; दिख सकती है हलचल

डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.