ईरान पर जमीनी हमले की तैयारी में अमेरिका, खार्ग आइलैंड और होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जा है लक्ष्य, जानें पूरा प्लान

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पेंटागन ईरान के खिलाफ सीमित जमीनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है. The Washington Post की रिपोर्ट के अनुसार हजारों अमेरिकी सैनिक क्षेत्र में पहुंच रहे हैं. यह ऑपरेशन बड़े युद्ध के बजाय छापेमारी पर आधारित होगा. Iran के ड्रोन और मिसाइल खतरा बने हुए हैं.

पेंटागन ईरान के खिलाफ सीमित जमीनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है. Image Credit: money9live

US Iran War: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच अमेरिका अब जमीनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है. पेंटागन ने ऐसी योजना बनाई है जो आने वाले हफ्तों में लागू हो सकती है. वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, हजारों अमेरिकी सैनिक और मरीन इस क्षेत्र में पहुंच रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप इस योजना को मंजूरी देते हैं तो स्थिति और गंभीर हो सकती है. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि सभी योजनाओं को लागू किया जाएगा या नहीं.

सीमित ऑफरेशन होगा

रिपोर्ट के मुताबिक यह कोई बड़ा हमला नहीं होगा बल्कि सीमित ऑपरेशन होंगे. इसमें स्पेशल ऑपरेशन फोर्स और सामान्य सेना दोनों शामिल हो सकती हैं. इनका मकसद खास ठिकानों पर हमला करना होगा. यह अभियान छापेमारी और टारगेटेड मिशन पर आधारित होगा. यानी सीधे कब्जा करने के बजाय खास रणनीतिक लक्ष्यों को नष्ट किया जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि इस योजना पर कई हफ्तों से काम चल रहा है.

खतरनाक होगा मिशन

इस तरह के ऑपरेशन में अमेरिकी सैनिकों को कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ सकता है. ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमले सबसे बड़ा खतरा माने जा रहे हैं. इसके अलावा जमीन से गोलीबारी और IEED जैसे विस्फोटक भी जोखिम बढ़ा सकते हैं. ऐसे हालात में मिशन काफी खतरनाक हो सकता है. इसलिए हर कदम बहुत सावधानी से उठाया जा रहा है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर फोकस

रिपोर्ट में बताया गया है कि खार्ग आईलैंड पर कब्जा करने की योजना पर भी चर्चा हुई है. यह ईरान का अहम तेल निर्यात केंद्र है. इसके साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास तटीय इलाकों में छापेमारी की बात भी सामने आई है. यहां ऐसे हथियारों को नष्ट करने की कोशिश हो सकती है जो जहाजों को निशाना बना सकते हैं.

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लिमिटेड समय के लिए होगा ऑपरेशन

अधिकारियों के अनुसार यह मिशन कुछ हफ्तों से लेकर दो महीने तक चल सकता है. यानी यह छोटा लेकिन महत्वपूर्ण ऑपरेशन होगा. लेकिन फिलहाल सबसे बड़ी बात यह है कि अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है. यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी नेतृत्व आगे क्या रणनीति अपनाता है.

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