कुवैत के शुवैख पोर्ट पर ड्रोन हमला! खाड़ी में बढ़ता युद्ध, अब ऊर्जा ढांचे के बाद सप्लाई रूट पर वार

कुवैत के शुवैख पोर्ट पर ड्रोन हमला खाड़ी में बढ़ते तनाव का बड़ा संकेत है. ऊर्जा ढांचे के बाद और सप्लाई रूट अब निशाने पर हैं. यह कुवैत का सबसे बड़ा व्यापारिक गेटवे है. देश के ज्यादातर आयात-निर्यात यहीं से होते हैं. कंटेनर और जनरल कार्गो की बड़ी मात्रा यहां संभाली जाती है

प्रतिकात्मक तस्वीर Image Credit: Money9 Live

पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बीच हालात अब सीधे खाड़ी देशों के बुनियादी ढांचे तक पहुंच चुके हैं. कुवैत ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर देश के सबसे बड़े कमर्शियल पोर्ट पर ड्रोन हमले की जानकारी दी. कुवैत के शुवैख पोर्ट को शुक्रवार सुबह ड्रोन से निशाना बनाया गया. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हमले में ढांचे को नुकसान हुआ, लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई.

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में खाड़ी क्षेत्र में लगातार बमबारी कर रहा है.

कुवैत का सबसे बड़ा व्यापारिक गेटवे

कुवैत का शुवैख पोर्ट देश का सबसे बड़ा और अहम कमर्शियल पोर्ट है, जो कुवैत सिटी के पास स्थित है और ज्यादातर गैर-तेल आयात-निर्यात यहीं से होता है. करीब 4.4 मिलियन वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले इस पोर्ट में 21 बर्थ हैं और यह कंटेनर, बल्क कार्गो और जरूरी सामान की सप्लाई का मुख्य केंद्र है, जिससे पूरे देश की सप्लाई चेन जुड़ी हुई है.

खाड़ी देशों पर बढ़ते हमले

पिछले कुछ दिनों में कुवैत, सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे देशों में ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं सामने आई हैं. कई जगह अलर्ट जारी किए गए और अहम तेल ठिकानों को भी निशाना बनाया गया.

गल्फ देशों ने इन हमलों को वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है, क्योंकि ये सीधे ऊर्जा सप्लाई और व्यापारिक रास्तों को प्रभावित कर रहे हैं.

ऊर्जा ढांचे पर हमले की आशंका

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि वह खाड़ी में ऊर्जा और पानी से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले की योजना को फिलहाल 10 दिन के लिए टाल दिया है और बातचीत को मौका देने के लिए कुछ समय दिया है.

ट्रंप ने साफ किया है कि अगर बातचीत सफल नहीं होती है, तो अमेरिका कड़े कदम उठा सकता है. उन्होंने ईरान को चेतावनी भी दी है कि शांति वार्ता को गंभीरता से ले, वरना परिणाम गंभीर हो सकते हैं.

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वैश्विक असर और चिंता

इस पूरे घटनाक्रम का असर अब वैश्विक बाजारों और तेल सप्लाई पर दिखने लगा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम रास्तों पर खतरा बढ़ने से तेल की कीमतों में उछाल आया है और सप्लाई बाधित हो रही है.