होर्मुज के बाद अब ये स्ट्रेट भी बंद करेगा ईरान, दे डाली धमकी; दहल जाएगी दुनिया!
पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के बाद अब बाब अल मंदेब स्ट्रेट को बंद कराने की चेतावनी दी है. इस चेतावनी के बाद वैश्विक व्यापार और एनर्जी सप्लाई पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. यह समुद्री मार्ग यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच तेल और सामान की आवाजाही के लिए बेहद अहम है. अगर यह रास्ता बंद होता है, तो शिपिंग लागत बढ़ेगी और तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है.
Iran Bab al Mandab Strait: पश्चिमी एशिया में जारी तनाव अब एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. होर्मुज स्ट्रेट को लेकर पहले से ही दुनिया में चिंता बनी हुई थी, लेकिन अब ईरान ने एक और बड़े समुद्री मार्ग बाब अल-मंदेब को बंद कराने की धमकी देकर वैश्विक व्यापार और एनर्जी सप्लाई पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और इजराइल के साथ उसका सैन्य टकराव तेज होता जा रहा है. अगर यह धमकी हकीकत में बदलती है, तो दुनिया भर में तेल सप्लाई, शिपिंग और कीमतों पर भारी असर पड़ सकता है.
बाब अल-मंदेब क्यों है इतना अहम
बाब अल-मंदेब स्ट्रेट लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है और यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है. इसी रास्ते से यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच बड़ी मात्रा में तेल और सामान का परिवहन होता है. स्वेज नहर के जरिए जाने वाले जहाज भी इसी मार्ग पर निर्भर रहते हैं. अगर यह रास्ता बंद होता है, तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे से लंबा रास्ता लेना पड़ेगा, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ जाएंगे.
ईरान की चेतावनी और हूती की भूमिका
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने साफ संकेत दिया है कि यमन का अंसारुल्लाह समूह (हूती) बाब अल-मंदेब पर नियंत्रण स्थापित कर सकता है. ईरानी मीडिया के अनुसार, यह समूह 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद से हाई अलर्ट पर है और जरूरत पड़ने पर समुद्री रास्ता बंद करने की क्षमता रखता है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी अमेरिका और इजराइल को जमीनी कार्रवाई से बचने की चेतावनी दी है.
हूती पहले भी लाल सागर में जहाजों को निशाना बना चुके हैं और इजराइल से जुड़े व्यापार को प्रभावित करने के लिए समुद्री नाकाबंदी जैसी कार्रवाई कर चुके हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि बाब अल-मंदेब को बंद करना केवल धमकी नहीं, बल्कि एक वास्तविक रणनीतिक विकल्प भी हो सकता है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
अगर बाब अल-मंदेब बंद होता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ेगा. तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है और कई देशों में महंगाई बढ़ सकती है. यूरोप और एशिया के बीच व्यापारिक गतिविधियां धीमी पड़ सकती हैं. भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर भी इसका असर देखने को मिलेगा, क्योंकि एनर्जी आयात की लागत बढ़ सकती है.
ईरान ने किया बातचीत से इंकार
अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए सैन्य कार्रवाई तेज करने के संकेत दिए हैं, जबकि ईरान ने बिना ठोस गारंटी के किसी भी युद्धविराम या बातचीत से इनकार कर दिया है. ईरान के विदेश मंत्री ने साफ कहा है कि देश “प्रतिरोध” की नीति पर कायम रहेगा.
इस बीच, युद्ध 27वें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. अगर जमीनी युद्ध शुरू होता है, तो समुद्री मार्गों को निशाना बनाया जाना लगभग तय माना जा रहा है. ऐसे में होर्मुज के बाद बाब अल-मंदेब का बंद होना वैश्विक संकट को और गहरा कर सकता है.
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