ट्रंप का अल्टीमेटम, ईरान को 48 घंटे की चेतावनी; अगर बातचीत से न बनी सहमति तो होगी सैन्य कार्रवाई

अमेरिका ने ईरान को परमाणु समझौते पर डिटेल लिखित प्रस्ताव देने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है. वाशिंगटन ने साफ किया है कि समय पर ड्राफ्ट मिलने पर जिनेवा में नई बातचीत होगी. अगर प्रस्ताव उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सैन्य विकल्प पर विचार कर सकते हैं.

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ा. Image Credit: Tv9 Bharatvarsh

US Iran Nuclear Talks: अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर डील को लेकर तनाव फिर बढ़ गया है. अमेरिका ने ईरान को 48 घंटे का समय दिया है ताकि वह परमाणु कार्यक्रम पर एक डिटेल लिखित प्रस्ताव पेश करे. वाशिंगटन ने साफ कहा है कि अगर तय समय में ड्राफ्ट नहीं मिला तो सैन्य विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है. बताया जा रहा है कि यह कूटनीतिक कोशिश आखिरी मौका हो सकती है. अब सबकी नजर ईरान के जवाब पर टिकी है. आने वाले दो दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं.

48 घंटे की डेडलाइन क्यों अहम

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका जिनेवा में एक और दौर की बातचीत के लिए तैयार है. लेकिन शर्त यह है कि ईरान 48 घंटे के भीतर डिटेल प्रस्ताव सौंपे. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि बिना लिखित ड्राफ्ट के आगे बढ़ना संभव नहीं होगा. अगर प्रस्ताव समय पर पहुंचता है तो शुक्रवार को बातचीत शुरू हो सकती है. यही फैसला तय करेगा कि कूटनीति आगे बढ़ेगी या टकराव बढ़ेगा.

जिनेवा में प्रस्तावित बातचीत

रिपोर्ट के मुताबिक अगर ईरान ड्राफ्ट दे देता है तो अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुश्नर 27 फरवरी को जिनेवा जा सकते हैं. पिछले दौर की बातचीत में भी ईरानी विदेश मंत्री से डिटेल प्रस्ताव देने को कहा गया था. अमेरिका का कहना है कि वह गंभीर और ठोस बातचीत चाहता है. जिनेवा बैठक को निर्णायक माना जा रहा है. यह बैठक न्यूक्लियर डील की दिशा तय कर सकती है.

अमेरिका की सख्त शर्तें

व्हाइट हाउस की स्थिति अभी भी सख्त है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी जमीन पर यूरेनियम का जीरो इनरिचमेंट करे. हालांकि कुछ अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर परमाणु हथियार की सभी संभावनाएं बंद हो जाएं तो सीमित स्तर पर सिम्बोलिक इनरिचमेंट पर विचार हो सकता है. साथ ही अंतरिम समझौते की संभावना भी खुली रखी गई है. अंतिम समझौते से पहले अस्थायी डील पर चर्चा हो सकती है.

सैन्य विकल्प की चर्चा तेज

अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यह कूटनीतिक प्रयास आखिरी मौका हो सकता है. अगर बातचीत विफल रहती है तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बड़े सैन्य अभियान को मंजूरी दे सकते हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संभावित कार्रवाई में अमेरिका और इजराइल की संयुक्त भूमिका हो सकती है. इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है. इसी वजह से मौजूदा 48 घंटे को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है.

रिपब्लिकन पार्टी में मतभेद

अमेरिका के अंदर भी इस मुद्दे पर मतभेद दिख रहे हैं. कुछ सलाहकार चाहते हैं कि पहले कूटनीति के सभी रास्ते आजमाए जाएं. वहीं कुछ नेता सख्त रुख के पक्ष में हैं. सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि ईरान पर सख्त कार्रवाई से पीछे नहीं हटना चाहिए. उनका मानना है कि ढील देने से खतरा बढ़ सकता है. इन मतभेदों के बीच अंतिम फैसला राष्ट्रपति के हाथ में है.

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अगले 48 घंटे क्यों निर्णायक

ईरान के प्रस्ताव पर ही जिनेवा बैठक और आगे की रणनीति निर्भर करेगी. अगर ड्राफ्ट अमेरिकी उम्मीदों पर खरा उतरता है तो बातचीत आगे बढ़ सकती है. लेकिन अगर प्रस्ताव कमजोर माना गया तो हालात तेजी से बदल सकते हैं. ऐसे में कूटनीति और सैन्य विकल्प के बीच फैसला होना है. दुनिया की नजर अब इन 48 घंटों पर टिकी है.

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