ट्रंप की पावर पर सुप्रीम कोर्ट का ब्रेक! क्या SC के फैसले को दे सकते हैं चुनौती? जानिए क्या कहता है अमेरिकी संविधान

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया है. इसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस फैसले को बदल सकते हैं या उसे नजरअंदाज कर सकते हैं. यह मामला सिर्फ टैक्स या व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका के संविधान और सत्ता के संतुलन से जुड़ा है.

ट्रंप टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट Image Credit: @Money9live

US Supreme Court: अमेरिका में एक बड़ा संवैधानिक सवाल खड़ा हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया है. इसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस फैसले को बदल सकते हैं या उसे नजरअंदाज कर सकते हैं. यह मामला सिर्फ टैक्स या व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका के संविधान और सत्ता के संतुलन से जुड़ा है. अमेरिका में सरकार तीन हिस्सों में बंटी होती है, ताकि कोई भी एक संस्था ज्यादा ताकतवर न हो जाए. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बहुत अहम माना जाता है. आइए विस्तार से समझते हैं कि राष्ट्रपति की ताकत कितनी है और वह क्या कर सकते हैं और क्या नहीं.

सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला है

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रपति अकेले टैरिफ नहीं लगा सकते. कोर्ट के मुताबिक टैरिफ असल में टैक्स होता है और टैक्स लगाने का अधिकार सिर्फ संसद यानी कांग्रेस के पास होता है. कोर्ट ने साफ कहा कि इमरजेंसी का हवाला देकर भी राष्ट्रपति यह अधिकार नहीं ले सकते.

संविधान क्या कहता है

  • अमेरिका का संविधान सरकार को तीन हिस्सों में बांटता है.
  • कांग्रेस कानून बनाती है और टैक्स तय करती है.
  • राष्ट्रपति कानून लागू करते हैं.
  • कोर्ट कानून की व्याख्या करता है.
  • इसका मतलब है कि राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदल नहीं सकते. कोर्ट जो फैसला देता है, वही पूरे देश में लागू होता है.

राष्ट्रपति क्या नहीं कर सकते

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रपति के पास कुछ सीमाएं हैं. वे खुद से नया टैरिफ लागू नहीं कर सकते. पुराने कानून को अपने हिसाब से बदलकर लागू नहीं कर सकते. कोर्ट के फैसले को नजरअंदाज नहीं कर सकते. अगर ऐसा किया जाता है, तो यह संविधान का उल्लंघन माना जाएगा.

राष्ट्रपति क्या कर सकते हैं

हालांकि राष्ट्रपति के पास कुछ विकल्प अभी भी मौजूद हैं. वे कांग्रेस से नया कानून बनवाने की कोशिश कर सकते हैं. दूसरे कानूनों के तहत टैरिफ लगाने की कोशिश कर सकते हैं. भविष्य में कोर्ट में नया मामला ले जा सकते हैं. लेकिन हर स्थिति में उन्हें कानून के दायरे में रहकर ही काम करना होगा.

क्यों है यह फैसला अहम

यह फैसला सिर्फ ट्रंप तक सीमित नहीं है. यह पूरे सिस्टम के लिए अहम है. कोर्ट ने साफ किया है कि इमरजेंसी के नाम पर राष्ट्रपति को ज्यादा ताकत नहीं दी जा सकती. आसान भाषा में समझें तो अमेरिका में कोई भी व्यक्ति या पद इतना ताकतवर नहीं है कि वह कानून से ऊपर हो जाए. सुप्रीम कोर्ट का फैसला अंतिम होता है और सभी को उसका पालन करना होता है.

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