होर्मुज में फिर भड़की जंग की चिंगारी, USA ने ईरान पर किया हमला, कार्गो शिप पर अटैक का लिया बदला

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक कार्गो शिप पर हुए ड्रोन हमले के बाद अमेरिका ने ईरान पर जवाबी हवाई हमला किया है. अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि ईरान ने भी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई का दावा किया. इस घटनाक्रम के बाद पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है.

अमेरिका का ईरान पर हमला Image Credit: @AI

पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए हैं. अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक मालवाहक जहाज पर हुए ड्रोन हमले के जवाब में की गई. वहीं, ईरान ने दावा किया है कि उसने भी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है. दोनों देश एक-दूसरे पर हाल ही में हुए युद्धविराम (सीजफायर) का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहे हैं.

अमेरिका ने क्यों किया हमला?

अमेरिकी सेना के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे सिंगापुर के फ्लैग वाले एक मालवाहक जहाज पर ईरान की ओर से ड्रोन हमला किया गया था. इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों के साथ-साथ तटीय रडार ठिकानों पर हवाई हमले किए. अमेरिका ने कहा कि उसका मकसद समुद्री रास्ते की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

ईरान का पलटवार और कड़ा बयान

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि दक्षिणी शहर सीरिक के पास एक बंदरगाह को निशाना बनाया गया. इसके बाद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उन्होंने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है. ईरान ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने दोबारा हमला किया तो उसका जवाब और भी बड़ा होगा.

इजरायल-लेबनान समझौते से मिली राहत

तनाव के बीच एक सकारात्मक खबर भी सामने आई. इजरायल और लेबनान ने सीमा पर संघर्ष रोकने के लिए एक शुरुआती समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इस समझौते में हिजबुल्लाह के हथियार छोड़ने और इजरायली सेना के लेबनान से पीछे हटने की बात कही गई है. हालांकि, हिजबुल्लाह ने इस समझौते में सहयोग करने से इनकार कर दिया है.

तेल बाजार और दुनिया पर असर

तनाव के बावजूद शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर शुरू होने से बाजार को राहत मिली. ब्रेंट में 4 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है. 27 जून की सुबह यह 72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है. वहीं WTI 69.2 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है.