इस साल चीनी के प्रोडक्शन में आएगा 13 फीसदी का उछाल, फिर भी एक्सपोर्ट पर ब्रेक; जानें क्या है वजह

2025-26 में भारत में चीनी का उत्पादन मजबूत रहने वाला है. इससे घरेलू जरूरतें आसानी से पूरी होंगी, लेकिन एक्सपोर्ट पर अब भी सतर्क रुख बना रह सकता है. AISTA की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025-26 में चीनी का एक्सपोर्ट करीब 8 लाख टन तक सीमित रह सकता है, जबकि सरकार ने 15 लाख टन एक्सपोर्ट की इजाजत दी है.

चीनी का उत्पादन. Image Credit: Canva

भारत में 2025-26 के चीनी सीजन को लेकर अच्छी खबर है. इंडस्ट्री बॉडी ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) के मुताबिक देश का चीनी प्रोडक्शन इस बार करीब 13 फीसदी बढ़ सकता है. अनुमान है कि सितंबर 2026 तक खत्म होने वाले सीजन में चीनी प्रोडक्शन 29.6 मिलियन टन रहेगा, जो पिछले सीजन के 26.2 मिलियन टन से ज्यादा है. हालांकि उत्पादन बढ़ने के बावजूद चीनी का एक्सपोर्ट सरकार की तय सीमा से कम ही रहने वाला है. AISTA की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025-26 में चीनी का एक्सपोर्ट करीब 8 लाख टन तक सीमित रह सकता है, जबकि सरकार ने 15 लाख टन एक्सपोर्ट की इजाजत दी है.

एथेनॉल के लिए कम होगी चीनी की डायवर्जन

AISTA के मुताबिक एथनॉल बनाने के लिए चीनी की डायवर्जन इस बार कम रहने की उम्मीद है. पिछले सीजन में जहां 3.4 मिलियन टन चीनी एथनॉल के लिए डायवर्ट की गई थी, वहीं इस बार लॉजिस्टिक दिक्कतों की वजह से यह आंकड़ा कम रह सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, सीजन की शुरुआत में 4.7 मिलियन टन की ओपनिंग स्टॉक होगी. इसके साथ अगर 29.6 मिलियन टन का उत्पादन जोड़ दिया जाए, तो कुल उपलब्धता 34.3 मिलियन टन हो जाएगी. वहीं देश में चीनी की अनुमानित घरेलू खपत 28.7 मिलियन टन रहने वाली है. इसके अलावा एक्सपोर्ट के बाद भी क्लोजिंग स्टॉक करीब 4.8 मिलियन टन रहने का अनुमान है.

महाराष्ट्र, यूपी और कर्नाटक में बढ़ेगा प्रोडक्शन

देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में इस बार उत्पादन 8.1 मिलियन टन से बढ़कर 10.81 मिलियन टन तक पहुंच सकता है. उत्तर प्रदेश में उत्पादन मामूली बढ़त के साथ 9.41 मिलियन टन रहने का अनुमान है. वहीं कर्नाटक में चीनी उत्पादन 4.3 मिलियन टन से बढ़कर 4.91 मिलियन टन हो सकता है. AISTA के मुताबिक महाराष्ट्र में ज्यादातर मिलों में पेराई फरवरी के आखिरी तक चलेगी, जबकि पुणे और सोलापुर की कुछ मिलों में यह और आगे बढ़ सकती है. जलना और लातूर जिलों में भी पेराई लंबी चलने के संकेत हैं.

गुड़ की मजबूत मांग का असर

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस बार गुड़ और खांडसारी की मांग ज्यादा है. बेहतर दाम मिलने की वजह से चीनी की बड़ी मात्रा गुड़ यूनिट्स की तरफ डायवर्ट हो रही है. उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और बिजनौर जिलों में भारी बारिश की वजह से रैटून फसल की पैदावार 15 से 20 फीसदी तक घटी है. हालांकि अच्छी खबर यह है कि चीनी की रिकवरी 10.65 फीसदी से बढ़कर 10.9 फीसदी तक पहुंच सकती है. AISTA ने कहा है कि वह फरवरी में 2025-26 सीजन के लिए दूसरा उत्पादन अनुमान जारी करेगा. गौरतलब है कि भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है.

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