दुनिया का सबसे बड़ा गैस प्लांट फिलहाल बंद, 7-8 करोड़ LPG सिलेंडर जितनी सप्लाई पर ब्रेक; हिल सकता है ग्लोबल बाजार

ईरान के हमलों के बीच UAE का हबशान गैस कॉम्प्लेक्स अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है. 6.1 bscfd क्षमता वाला यह दुनिया के सबसे बड़े गैस प्रोसेसिंग हब्स में शामिल है, जो UAE की 60 फीसदी से ज्यादा गैस जरूरत पूरी करता है. इसके बंद होने से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई और तेल बाजार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है.

हबशान गैस कॉम्पलेक्स कितना विशाल? Image Credit: @adnocgas

Habshan Gas Complex Capacity Iran Attack: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब सीधे ग्लोबल एनर्जी ढांचे पर दिखने लगा है. ईरान के हमलों के बीच अबू धाबी की सबसे बड़ी और दुनिया की प्रमुख गैस प्रोसेसिंग यूनिट- हबशान गैस कॉम्प्लेक्स (Habshan Gas Complex) को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है. यह वही सुविधा है, जो न सिर्फ UAE बल्कि वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के लिए भी बेहद अहम मानी जाती है.

कितनी बड़ी है हबशान गैस फैसिलिटी?

हबशान गैस कॉम्प्लेक्स को दुनिया की सबसे बड़ी गैस प्रोसेसिंग सुविधाओं में गिना जाता है. इसकी कुल प्रोसेसिंग कैपेसिटी करीब 6.1 बिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक फीट प्रति दिन (bscfd) है. यह विशाल ऑनशोर कॉम्प्लेक्स पांच अलग-अलग प्लांट्स और कुल 14 प्रोसेसिंग यूनिट्स (ट्रेन्स) के जरिए काम करता है. यहां पर ऑनशोर और ऑफशोर दोनों स्रोतों से आने वाली गैस को प्रोसेस किया जाता है, जिससे सेल्स गैस, नेचुरल गैस लिक्विड्स (NGLs), कंडेन्सेट और सल्फर जैसे कई अहम उत्पाद तैयार होते हैं.

UAE की घरेलू गैस जरूरतों का 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सा यही कॉम्प्लेक्स पूरा करता है, जो इसकी रणनीतिक अहमियत को और बढ़ाता है. इस कॉम्प्लेक्स में हबशान 5 जैसे एडवांस्ड प्लांट्स के अलावा असब (Asab), बुहासा (Buhasa) और बाब (Bab) जैसे प्रमुख यूनिट्स भी शामिल हैं. आने वाले समय में ‘हबशान 7’ प्रोजेक्ट के जरिए इसकी कैपेसिटी और बढ़ाने की योजना भी है.

हमले के बाद क्यों बंद करनी पड़ी यूनिट?

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ओर से किए गए हमलों को UAE की एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया, लेकिन इसी दौरान गिरे मलबे (debris) की वजह से हबशान क्षेत्र में आग लग गई. सुरक्षा कारणों से इस पूरे गैस कॉम्प्लेक्स का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया. गौर करने वाली बात यह है कि यह दूसरी बार है जब मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद इस प्रोजेक्ट को बंद करना पड़ा है. हालांकि, अधिकारियों ने राहत की बात यह कही कि इस घटना में कोई जानहानि नहीं हुई.

क्यों है यह इतना अहम?

हबशान सिर्फ एक गैस प्लांट नहीं, बल्कि UAE के पूरे एनर्जी नेटवर्क की रीढ़ है. यही से गैस को प्रोसेस कर घरेलू उपयोग के लिए सप्लाई किया जाता है. इसके अलावा यह ADNOC की क्रूड पाइपलाइन का शुरुआती बिंदु भी है, जो फुजैरा (Fujairah) पोर्ट तक जाती है, एक ऐसा पोर्ट जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाहर स्थित है और रणनीतिक रूप से बेहद अहम है.

बढ़ते हमले और क्षेत्रीय खतरा

हबशान पर असर से कुछ घंटे पहले ही कुवैत की मीना अल-अहमदी रिफाइनरी पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे वहां भी आग लग गई. इसके अलावा एक पावर और वाटर डीसैलीनेशन प्लांट को भी निशाना बनाया गया. UAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, शुक्रवार को ईरान की ओर से दागे गए 18 बैलिस्टिक मिसाइल, 4 क्रूज मिसाइल और 47 ड्रोन को हवा में ही खत्म कर दिया गया.

युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक UAE की एयर डिफेंस 475 बैलिस्टिक मिसाइल, 23 क्रूज मिसाइल और 2,000 से ज्यादा ड्रोन को इंटरसेप्ट कर चुकी है. इन हमलों में अब तक 200 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं, जबकि कई देशों के नागरिकों की मौत भी हुई है. ताजा घटना में अज्बान इलाके में गिरे मलबे से 12 लोग घायल हुए, जिनमें भारत और नेपाल के नागरिक भी शामिल हैं.

सुरक्षा के कदम और बढ़ता असर

लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए UAE में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है. अबू धाबी और दुबई समेत कई शहरों में अलर्ट जारी किए गए हैं. दुबई में चर्च, मंदिर और गुरुद्वारे तक अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. हबशान जैसे बड़े गैस कॉम्प्लेक्स का बंद होना सिर्फ एक देश की समस्या नहीं है. इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है. खासकर तब, जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पहले से ही तनाव में हैं.

कितना बड़ा हो सकता है असर?

हबशान गैस कॉम्प्लेक्स की कैपेसिटी को अगर आम भाषा में समझें, तो इसका पैमाना बेहद विशाल है. यह प्लांट रोजाना करीब 6.1 बिलियन क्यूबिक फीट गैस प्रोसेस करता है, जो लगभग 173 मिलियन क्यूबिक मीटर गैस प्रति दिन के बराबर है. अब अगर इसे घरेलू इस्तेमाल से जोड़कर देखें, तो यह मात्रा ऊर्जा के लिहाज से लगभग 7 से 8 करोड़ LPG सिलेंडर के बराबर बैठती है. यानी, जितनी गैस यह प्लांट एक दिन में संभालता है, उससे करोड़ों घरों की कुकिंग जरूरत पूरी हो सकती है. इसी तुलना से समझ आता है कि इस तरह की फैसिलिटी का बंद होना सिर्फ एक तकनीकी रुकावट नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर ऊर्जा सप्लाई और बाजार पर असर डालने वाली घटना है. हालांकि, ये गणित एक अनुमान के रूप में केवल फैसेलिटी की कैपेसिटी को समझाने के लिए किया गया है.

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