ट्रंप बोले- अगले 2-3 हफ्तों में ईरान पर करेंगे जोरदार प्रहार, अमेरिका को होर्मुज स्ट्रेट की जरूरत नहीं

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव तेज हो गया है. Donald Trump ने कड़े शब्दों में ईरान को चेतावनी देते हुए जल्द बड़ी सैन्य कार्रवाई का संकेत दिया है. इस घटनाक्रम ने वैश्विक सुरक्षा, तेल बाजार और भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप Image Credit: @Money9live

Trump addresses the nation on the Iran war: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने देश के नाम संबोधन में ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने अगले 2–3 हफ्तों में बहुत सख्त और निर्णायक कार्रवाई का संकेत दिया है. इसके साथ ही ट्रंप ने अपने संबोधन में दावा किया कि अमेरिका द्वारा शुरू किए गए “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के चार हफ्तों के भीतर अमेरिकी सेना ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है.

‘ईरान की ताकत लगभग खत्म’ – ट्रंप

ट्रंप ने अपने संबोधन में दावा किया कि अमेरिका द्वारा शुरू किए गए “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के चार हफ्तों के भीतर अमेरिकी सेना ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है.

उन्होंने कहा कि:

  • ईरान की नौसेना लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुकी है.
  • वायुसेना भी गंभीर रूप से तबाह हो गई है.
  • कई शीर्ष नेता मारे जा चुके हैं.
  • Islamic Revolutionary Guard Corps की कमान कमजोर पड़ रही है.
  • मिसाइल और ड्रोन क्षमता में भारी गिरावट आई है.
  • हथियार फैक्ट्रियां और लॉन्चर नष्ट किए जा रहे हैं.

ट्रंप ने इसे तेज, निर्णायक और जबरदस्त जीत बताया, जैसा पहले शायद ही देखने को मिला हो.

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होर्मुज जलडमरूमध्य पर बयान

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका को Strait of Hormuz पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. उन्होंने उन देशों को विश्वासघाती बताया है, जिन्होंने युद्ध के दौरान उनका साथ नहीं दिया. साथ ही सुझाव दिया कि वे अमेरिका से तेल खरीदें. ट्रंप के अनुसार, जब यह संघर्ष खत्म होगा, तो होर्मुज जलडमरूमध्य जलमार्ग अपने आप खुल जाएगा.

भारत पर क्या होगा असर?

अमेरिका–ईरान युद्ध का असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत जैसे देशों पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है.

  1. तेल की कीमतों में उछाल

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, खासकर खाड़ी क्षेत्र से. अगर Strait of Hormuz में तनाव जारी रहता है, तो कच्चे तेल की सप्लाई बाधित रह सकती है. इससे पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं और महंगाई बढ़ सकती है.

  1. व्यापार और सप्लाई चेन पर असर

पश्चिम एशिया भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है. युद्ध की स्थिति में शिपिंग रूट प्रभावित हो सकते हैं, जिससे आयात-निर्यात महंगा होगा और सप्लाई में देरी हो सकती है.

  1. रुपया और शेयर बाजार

वैश्विक अनिश्चितता के कारण:

  • रुपये पर दबाव बढ़ सकता है.
  • शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिल सकती है.