होर्मुज नाकेबंदी के बीच ट्रंप ने अन्य देशों को दी सलाह, कहा- तेल हमसे खरीदें या फिर खुद जाकर ले आएं

ट्रंप ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण जिन देशों को ईंधन की कमी का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें या तो अमेरिका से ईंधन खरीदना होगा या फिर होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते खुद ही इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी.

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप. Image Credit: money9live

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम-एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच फ्यूल की कमी से जूझ रहे देशों के पास अब सिर्फ दो ही विकल्प हैं, या तो वे अमेरिका से ईंधन खरीदें, या फिर ईरान द्वारा ब्लॉक किए गए ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज’ के रास्ते खुद ही अपनी आपूर्ति सुनिश्चित करें.

ब्रिटेन पर कसा तंज

इस दौरान उन्होंने उन सहयोगी देशों पर भी तंज कसा, जिन्होंने युद्ध में शामिल होने की उनकी अपील को ठुकरा दिया था. सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट में, ट्रंप ने इस व्यवधान से प्रभावित देशों, जिनमें यूनाइटेड किंगडम भी शामिल है – का विशेष रूप से जिक्र किया और इस संघर्ष में शामिल होने के उसके फैसले की आलोचना की.

‘खुद से हासिल करें अपना तेल’

ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, ‘ वे सभी देश जिन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य की वजह से जेट फ्यूल नहीं मिल पा रहा है, जैसे कि यूनाइटेड किंगडम, जिसने ईरान को कमजोर करने की मुहिम में शामिल होने से इनकार कर दिया था, उनके लिए मेरे पास एक सुझाव है. नंबर 1, अमेरिका से खरीदें. हमारे पास इसकी कोई कमी नहीं है. नंबर 2, थोड़ी हिम्मत जुटाएं और उस जलडमरूमध्य तक जाएं और बस उसे (तेल) ‘ले लें’. अब आपको अपने लिए खुद लड़ना सीखना होगा. U.S.A. अब आपकी मदद के लिए वहां मौजूद नहीं रहेगा. ठीक वैसे ही, जैसे आप हमारे लिए मौजूद नहीं थे. असल में, ईरान पूरी तरह से तबाह हो चुका है. अब जाएं और अपना तेल खुद हासिल करें.’

होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान ने किया है बंद

28 फरवरी को अमेरिका द्वारा एक सीमित सैन्य अभियान शुरू करने के तुरंत बाद, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया. यह एक महत्वपूर्ण रूच है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है. इस कदम से ईंधन का गंभीर संकट पैदा हो गया और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं, जबकि पहले ये लगभग 75 डॉलर थीं.

ईरान को गंभीर परिणामों की कड़ी चेतावनी देने के बावजूद, ट्रंप अब तक इस जलडमरूमध्य को फिर से खुलवाने में असमर्थ रहे हैं. साथ ही, उन्होंने अपने सहयोगी देशों से भी इस मार्ग की सुरक्षा के लिए युद्धपोत तैनात करने का आग्रह किया है. हालांकि, किसी भी प्रमुख सहयोगी देश ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है.

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