ईरान के हिट लिस्ट में ये 8 पुल, डिसकनेक्ट हो जाएंगे खाड़ी देश! ₹3800 करोड़ के झटके का लेगा बदला
अमेरिका-इजराइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के 8 रणनीतिक पुलों को संभावित टारगेट बताते हुए बड़ा संकेत दिया है. करज के B1 ब्रिज पर हमले के बाद उठाए गए इस कदम से पूरे मिडिल ईस्ट की कनेक्टिविटी, तेल सप्लाई और व्यापारिक नेटवर्क पर खतरा गहरा सकता है.
Iran Hit List amid US-Israel War: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब और खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है. अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे संघर्ष के बीच ईरान ने एक बड़ा और सख्त संकेत दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र और जॉर्डन के 8 अहम पुलों की एक “हिट लिस्ट” जारी की है, जिन्हें संभावित जवाबी कार्रवाई में निशाना बनाया जा सकता है. ये पुल सिर्फ ढांचागत निर्माण नहीं हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी, व्यापार और सैन्य लॉजिस्टिक्स के लिहाज से बेहद अहम माने जाते हैं.
अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने उठाया कदम
यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है, जब अमेरिका ने हाल ही में ईरान के करज (Karaj) शहर में स्थित B1 ब्रिज पर हमला किया. अलबोर्ज प्रांत में स्थित इस पुल को मिडिल ईस्ट के सबसे ऊंचे पुलों में गिना जाता था और इसे इसी साल ट्रैफिक के लिए खोला जाना था. करीब 1050 मीटर लंबा और 136 मीटर ऊंचा यह पुल लगभग 400 मिलियन डॉलर (करीब 3800 करोड़ रुपये) की लागत से तैयार किया गया था. हमले में पुल को भारी नुकसान पहुंचा और तकरीबन 8 लोगों की जान भी गई.
ईरान का हिट-लिस्ट
इसी हमले के बाद ईरान ने अब अपने संभावित टारगेट्स की सूची सामने रख दी है. इस लिस्ट में कुवैत, सऊदी अरब, UAE और जॉर्डन के कई बड़े और रणनीतिक पुल शामिल हैं. इनमें कुवैत का शेख जाबेर अल-अहमद अल-सबा ब्रिज, सऊदी अरब और बहरीन को जोड़ने वाला किंग फहद कॉजवे, UAE के शेख जायद ब्रिज, अल मकता ब्रिज और शेख खलीफा ब्रिज शामिल हैं. वहीं जॉर्डन के किंग हुसैन ब्रिज, डामिया ब्रिज और अबदून ब्रिज भी इस सूची में हैं. ये सभी पुल न सिर्फ आम यातायात के लिए जरूरी हैं, बल्कि तेल सप्लाई, व्यापारिक परिवहन और सैन्य मूवमेंट के लिए भी बेहद अहम हैं. अगर इन पर कोई हमला होता है, तो पूरे खाड़ी क्षेत्र की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है और कई देशों के बीच संपर्क लगभग ठप पड़ सकता है.
ट्रंप ने भी साफ किया रुख
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने रुख को और आक्रामक बना दिया है. उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि ईरान के बचे हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जाएगा और अगला टारगेट पुलों और बिजली संयंत्रों को बनाया जा सकता है. ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की नेतृत्व को “जल्दी फैसला लेना होगा”, जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में हमले और तेज हो सकते हैं. हालांकि, ईरान ने भी झुकने के कोई संकेत नहीं दिए हैं. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि नागरिक ढांचे, खासकर अधूरे पुलों पर हमला, ईरानी जनता को झुकाने में सफल नहीं होगा. वहीं ईरानी मीडिया के मुताबिक, देश के अलग-अलग हिस्सों में भी जवाबी गतिविधियां तेज हो गई हैं.
तेज हो रहे हैं हमले
तनाव सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं है. खाड़ी क्षेत्र में ड्रोन हमलों और सैन्य गतिविधियों में भी तेजी आई है. कुवैत की एक प्रमुख रिफाइनरी पर ड्रोन हमला हुआ, जबकि सऊदी अरब ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम से कई ड्रोन मार गिराने का दावा किया है. वहीं ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसने एक अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को मार गिराया है, हालांकि इसकी पुष्टि अमेरिका की ओर से नहीं की गई है. इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक बाजारों पर भी इसका दबाव साफ दिख रहा है. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पर खतरा बढ़ने से तेल सप्लाई और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है.
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