होर्मुज स्ट्रेट खुलते ही ईरान के हाथ लगेगा कुबेर का खजाना ! हर साल वसूल सकता है ₹9 लाख करोड़ का टोल
अमेरिका द्वारा होर्मुज स्ट्रेट से दूरी बनाने के संकेत के बीच वैश्विक ऊर्जा राजनीति नया मोड़ ले रही है. ब्रिटेन की पहल पर कई देश एकजुट हुए हैं, जबकि रास्ता खुलने से ईरान को भारी आर्थिक लाभ होने की संभावना है. ऐसे में सवाल उठता है कि अंतरराष्ट्रीय कानून, क्षेत्रीय संतुलन और भारत जैसे देशों के हित इस पूरे घटनाक्रम में कैसे प्रभावित होंगे.
Strait of Hormuz and Iran Revenue Collection: गुरुवार को देश के नाम संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह स्पष्ट कर दिया कि होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका का कोई प्रत्यक्ष हित नहीं है. संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि इस समुद्री मार्ग से अमेरिकी तेल के जहाज नहीं गुजरते हैं, इसलिए जिन देशों के टैंकर यहां से गुजरते हैं, उन्हें ही इसे खुलवाने के प्रयास करने चाहिए. इसके बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने उन 35 देशों की बैठक बुलाई, जिनका इस स्ट्रेट से सीधा संबंध है. अब जैसे ही यह मार्ग पूरी तरह से खुल जाएगा, दुनियाभर के देशों को राहत मिलेगी, साथ ही ईरान के राजस्व के लिए भी एक नया स्रोत खुल जाएगा.
ईरान हर दिन वसूलेगा ₹2500 करोड़ टैक्स
ब्रिटेन ने कहा है कि ईरान और अमेरिका का युद्ध उनका युद्ध नहीं है. यही कारण है कि वे देश एक साथ आए हैं, जिनका इस क्षेत्र से हित जुड़ा हुआ है. फ्रांस, चीन और भारत जैसे देशों द्वारा ब्रिटेन की पहल को समर्थन मिलने पर, होर्मुज स्ट्रेट खुल सकता है. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, इससे ईरान प्रतिदिन लगभग ₹2500 करोड़ का टोल वसूलेगा. इस प्रकार ईरान को हर महीने ₹75,000 करोड़ और सालाना लगभग ₹9 लाख करोड़ का रेवेन्यू प्राप्त हो सकता है.
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क्या कहता है मैरीटाइम लॉ?
अब सवाल उठता है कि क्या ईरान के पास यह अधिकार है कि वह इस मार्ग से गुजरने वाले टैंकरों या जहाजों से टैक्स वसूले? इसका जवाब अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून में मिलता है. इसके अनुसार, किसी भी देश की संप्रभुता उसकी तटीय सीमा से 12 नॉटिकल माइल (लगभग 22 किलोमीटर) तक होती है. होर्मुज स्ट्रेट ईरानी तट से मात्र लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इस आधार पर यह समुद्री क्षेत्र ईरान के नियंत्रण में आता है और वह अपने अनुसार यहां नियम लागू कर सकता है.
भारत का क्या है रुख?
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने 35 देशों की बैठक बुलाई है, जिसमें भारत को भी आमंत्रित किया गया है. गुरुवार को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसमें शामिल हुए. भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत ईरान के साथ लगातार संपर्क में है. 28 फरवरी के बाद से होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से भारत के LPG और LNG के 6 टैंकर गुजर चुके हैं.
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