PNB में 1100 से ज्यादा अफसरों के ताबड़तोड़ ट्रांसफर, यूनियन ने उठाए सवाल, कहा- बैंक को होगा भारी नुकसान
पंजाब नेशनल बैंक में 1100 से ज्यादा अधिकारियों के ट्रांसफर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. ऑफिसर्स यूनियन ने इसे मनमाना और असंवेदनशील कदम बताते हुए कहा है कि इससे कर्मचारियों का मनोबल गिरेगा और बैंक के प्रदर्शन पर भी असर पड़ सकता है.
PNB Transfer Controversy: देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में बड़े स्तर पर किए गए तबादलों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. बैंक के अधिकारियों के संगठन ने मैनेजमेंट के फैसले पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे जल्दबाजी और असंतुलित कदम बताया है, जो न सिर्फ कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित करेगा, बल्कि बैंक के प्रदर्शन पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है.
यूनियन ने बैंक एमडी-सीईओ को लिखा पत्र
ऑल इंडिया पंजाब नेशनल बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन ने बैंक के एमडी और सीईओ अशोक चंद्रा को लिखे पत्र में कहा है कि हाल ही में स्केल-IV और उससे ऊपर के 1100 से ज्यादा अधिकारियों के ट्रांसफर ऑर्डर जारी किए गए हैं. यह संख्या कुल अधिकारियों का करीब एक-चौथाई हिस्सा है, जिससे बैंक के कामकाज में बड़े स्तर पर व्यवधान पैदा होने की आशंका है.
क्या है आरोप?
यूनियन का आरोप है कि यह ट्रांसफर प्रक्रिया स्थापित नीतियों को नजरअंदाज करते हुए मनमाने तरीके से लागू की गई है. संगठन ने इसे “विकास की रणनीति” के बजाय “प्रतिशोधात्मक कार्रवाई” करार दिया है. उनका कहना है कि कई ऐसे अधिकारी हैं, जो पिछले 2 से 5 साल से अपने मनपसंद स्थान पर ट्रांसफर की मांग कर रहे थे, लेकिन तब उनकी अर्जी ठुकरा दी गई. अब उन्हीं अधिकारियों को अचानक दूसरे दूरस्थ जोनों में भेजा जा रहा है.
महिला अधिकारियों को लेकर भी चिंता
महिला अधिकारियों को लेकर भी यूनियन ने चिंता जताई है. उनका कहना है कि कई महिला कर्मचारी पहले से ही अपने होम सर्कल से बाहर कार्यरत थीं, इसके बावजूद उन्हें और दूर स्थानों पर भेज दिया गया. यूनियन का मानना है कि अगर स्थानांतरण की जरूरत थी, तो उन्हें उनके परिवार या जीवनसाथी के करीब भी पोस्टिंग दी जा सकती थी, जिससे मानवीय संतुलन बना रहता. स्थिति और गंभीर तब नजर आती है, जब ऐसे मामलों की बात सामने आती है, जहां रिटायरमेंट के करीब पहुंचे अधिकारियों जिनके पास महज 3 महीने से लेकर 1 साल तक का कार्यकाल बचा है उन्हें भी दूर-दराज के क्षेत्रों में ट्रांसफर कर दिया गया है. इतना ही नहीं, इस साल किए गए ट्रांसफर अनुरोधों को भी नजरअंदाज किया गया है.
कठोर है मौजूदा ट्रांसफर नीति
यूनियन ने अपने पत्र में यह भी कहा कि मौजूदा ट्रांसफर नीति न सिर्फ कठोर है, बल्कि कर्मचारियों के प्रति संवेदनहीन भी दिखती है. उन्होंने सुझाव दिया कि किसी भी अधिकारी का एक सर्कल या जोन में कार्यकाल कम से कम 6 साल तक रखा जाना चाहिए, ताकि स्थिरता और बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके. इसके अलावा, अधिकारियों ने बैंक के परफॉर्मेंस इवैल्यूएशन सिस्टम पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है.
मैनेजमेंट से यूनियन की अपील
यूनियन ने मैनेजमेंट से अपील की है कि वह इस मुद्दे को सिर्फ ट्रांसफर तक सीमित न रखे, बल्कि इसे कर्मचारियों के मनोबल, पारदर्शिता और संगठन के दीर्घकालिक हितों से जोड़कर देखे. उन्होंने उम्मीद जताई है कि बैंक नेतृत्व इस पर पुनर्विचार करेगा और संतुलित व मानवीय दृष्टिकोण अपनाएगा, भले ही इसमें थोड़ा समय क्यों न लगे. मालूम हो कि PNB में करीब 1 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें लगभग 4000 अधिकारी स्केल-IV कैटेगरी के हैं. ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में एक साथ ट्रांसफर का फैसला बैंक के ऑपरेशंस और आंतरिक संतुलन पर कितना असर डालेगा, यह आने वाले समय में साफ होगा.
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