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ईरान-इजराइल युद्ध से हल्दी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एक्सपोर्ट रुकने से गिरे दाम; किसानों को हो रहा भारी नुकसान

ईरान-इजरायल युद्ध के चलते भारत में हल्दी की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. एक्सपोर्ट रुकने के कारण घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ गई और दाम करीब 3,500 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गए हैं. पहले 16,500 रुपये पर बिकने वाली हल्दी अब करीब 13,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गई है. मराठवाड़ा जैसे प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है.

हल्दी कीमत गिरावट Image Credit: AI/canva

Turmeric Price Fall India: पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारत के कृषि बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है. खासतौर पर हल्दी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जो किसानों के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, हल्दी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है. पहले जहां हल्दी 16,500 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर बिक रही थी, वहीं अब इसकी कीमत घटकर लगभग 13,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गई है. कीमतों में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब निर्यात लगभग ठप हो गया है.

निर्यात ठप होने से बढ़ी परेशानी

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू बाजार में हल्दी के दाम करीब 3,500 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गए हैं. महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र देश के कुल हल्दी निर्यात का लगभग आधा हिस्सा देता है. यहां की हल्दी खाड़ी देशों और अफ्रीकी बाजारों में बड़े पैमाने पर भेजी जाती है. लेकिन ईरान से जुड़े युद्ध के कारण इन बाजारों में सप्लाई पूरी तरह रुक गई है. नतीजतन, तैयार माल देश के भीतर ही फंस गया है, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और कीमतों पर दबाव आ गया.

किसानों पर सीधा असर

हिंगोली, नांदेड़, परभणी, यवतमाल और वाशिम जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर हल्दी की खेती होती है. अकेले हिंगोली जिले में ही करीब 2 लाख एकड़ में हल्दी उगाई जाती है. इन इलाकों के किसान अब गिरती कीमतों से परेशान हैं, क्योंकि उनकी लागत के मुकाबले मुनाफा तेजी से घट रहा है. व्यापारियों का भी कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो कीमतों में और गिरावट आ सकती है.

सप्लाई चेन में रुकावट

हल्दी की प्रोसेसिंग के बाद इसे तमिलनाडु और केरल के बंदरगाहों से निर्यात किया जाता है. लेकिन मौजूदा युद्ध के चलते लॉजिस्टिक्स और शिपिंग प्रभावित हुई है, जिससे सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई है. इसका सीधा असर निर्यात और कीमतों दोनों पर पड़ा है.

अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में भारत का हल्दी निर्यात करीब 341.54 मिलियन डॉलर रहा, जिसमें महाराष्ट्र का योगदान 155.35 मिलियन डॉलर था. ऐसे में निर्यात रुकने से न सिर्फ किसानों बल्कि देश के एग्री-एक्सपोर्ट सेक्टर पर भी दबाव बढ़ सकता है. कुल मिलाकर, हल्दी की कीमतों में आई गिरावट भले ही उपभोक्ताओं के लिए राहत हो, लेकिन किसानों और निर्यातकों के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है. अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसका असर और गहरा हो सकता है.

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