धान की पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों को मिलेंगे 102 करोड़ रुपये, किसान सेवा केंद्र खोलने पर सरकार देगी बंपर सब्सिडी

तमिलनाडु सरकार ने अपने बजट में किसानों के लिए खजाना खोल दिया है. उसने 29 गैर-कावेरी डेल्टा जिलों में धान की खेती बढ़ाने के लिए 102 करोड़ रुपये और डेल्टा जिलों में 58 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. 100 प्रगतिशील किसानों को जापान, चीन और वियतनाम की यात्रा पर भेजा जाएगा.

धान की खेती करने वाले किसानों के लिए खुशखबरी. Image Credit: tv9

तमिलनाडु सरकार राज्य में धान की खेती और अनाज का उत्पादन बढ़ाने के लिए 29 गैर-कावेरी डेल्टा जिलों में एक विशेष पैकेज लागू करेगी. इस योजना के लिए 102 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है. कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम ने विधानसभा में यह जानकारी दी. इस पैकेज के तहत किसानों को मशीन से रोपाई करने के लिए सब्सिडी और उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज दिए जाएंगे. इसी तरह, डेल्टा जिलों के किसानों को भी कुरुवई सीजन के दौरान खेती का रकबा बढ़ाने और अनाज उत्पादन बढ़ाने के लिए सहायता दी जाएगी, जिसके लिए 58 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे.

तमिलनाडु में कावेरी डेल्टा जिलों में 18 लाख एकड़ और गैर-डेल्टा जिलों में 34 लाख एकड़ भूमि पर धान की खेती होती है. विधानसभा में वर्ष 2025-26 के कृषि बजट पेश करते हुए कृषि मंत्री पन्नीरसेल्वम ने कई घोषणाएं कीं. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर यात्रा की व्यवस्था करेगी, ताकि उन्हें धान की फसल में उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने में मदद मिल सके.

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100 किसानों को भेजा जाएगा विदेश

मंत्री ने कहा कि किसानों को नई तकनीकों से अवगत कराने और उन्हें अपनी खेती में अपनाने में मदद करने के लिए 100 प्रगतिशील किसानों को जापान, चीन और वियतनाम के दौरे पर भेजा जाएगा. इसके लिए सरकार 2 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित करेगी. खास बात यह है कि सरकार तमिलनाडु एग्रोफॉरेस्ट्री नीति लॉन्च करेगी, जिससे चंदन, रेड सैंडर्स, महोगनी और रोजवुड जैसे मूल्यवान पेड़ों की खेती को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही, लकड़ी के पंजीकरण, कटाई, परिवहन और विपणन से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा, जिससे तमिलनाडु को और हरा-भरा बनाया जा सके.

30 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी

इसके अलावा, 1,000 मुख्यमंत्री किसान सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिनकी लागत 10 से 20 लाख रुपये के बीच होगी. प्रत्येक केंद्र के लिए 30 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी, जो 3 से 6 लाख रुपये तक होग. इस योजना के लिए राज्य बजट से 42 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे. ये केंद्र कृषि सहायता हब के रूप में काम करेंगे, जहां किसानों को बीज, उर्वरक और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे. साथ ही, फसल उत्पादन बढ़ाने, कीट और रोग प्रबंधन, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और मूल्य संवर्धन से जुड़ी विशेषज्ञ सलाह भी दी जाएगी.

1.87 लाख एकड़ कवर किया जाएगा

वर्ष 2025-26 में ग्रीष्मकालीन जुताई को बढ़ावा देने के लिए राज्य निधि से 24 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. इस योजना के तहत तीन लाख एकड़ भूमि को कवर किया जाएगा, जिसमें प्रति हेक्टेयर 2,000 रुपये की सहायता दी जाएगी. मकई उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की निधि से 40.27 करोड़ रुपये खर्च कर 1.87 लाख एकड़ क्षेत्र को कवर किया जाएगा.

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12 करोड़ रुपये आवंटित किए गए

साथ ही, 37 जिलों में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए 12 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. मंत्री ने कहा कि किसानों को आय के नुकसान से बचाने और प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल क्षति होने पर उनकी आजीविका बनाए रखने के लिए फसल बीमा योजना लागू की जाएगी. यह योजना वर्ष 2025-26 में 841 करोड़ रुपये की लागत से शुरू की जाएगी, जिससे 35 लाख एकड़ क्षेत्र को सुरक्षा मिलेगी.

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