गेहूं एक्सपोर्ट पर सरकार का बड़ा फैसला! 25 लाख टन अतिरिक्त निर्यात को मिली मंजूरी
केंद्र सरकार ने गेहूं निर्यात पर बड़ा फैसला लेते हुए 25 लाख टन अतिरिक्त गेहूं एक्सपोर्ट की मंजूरी दे दी है. DGFT की अधिसूचना के बाद अब कुल 50 लाख टन गेहूं और 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को अनुमति मिल चुकी है. रिकॉर्ड उत्पादन और मजबूत स्टॉक के बीच यह फैसला किसानों, व्यापारियों और निर्यातकों के लिए राहत भरा माना जा रहा है.
Wheat Export India: देश के कृषि और कमोडिटी सेक्टर से बड़ी खबर सामने आई है. केंद्र सरकार ने गेहूं निर्यात को लेकर अहम फैसला लेते हुए 25 लाख टन अतिरिक्त गेहूं एक्सपोर्ट की अनुमति दे दी है. वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाले DGFT ने इस फैसले की अधिसूचना जारी कर दी है. सरकार के इस नए फैसले के बाद अब कुल 50 लाख टन गेहूं और 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को मंजूरी मिल चुकी है. माना जा रहा है कि इससे किसानों, व्यापारियों और निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी, साथ ही वैश्विक बाजार में भारत की सप्लाई क्षमता भी मजबूत होगी.
पहले भी मिली थी मंजूरी
सरकार ने 20 अप्रैल को भी 25 लाख टन अतिरिक्त गेहूं निर्यात को हरी झंडी दी थी. अब नई अधिसूचना के बाद यह फैसला औपचारिक रूप से लागू हो गया है. हालांकि सरकार ने साफ किया है कि गेहूं की एक्सपोर्ट पॉलिसी अभी भी प्रतिबंधित कैटेगरी में बनी रहेगी. यानी सामान्य तौर पर गेहूं निर्यात पर रोक जारी है, लेकिन तय सीमा तक अतिरिक्त मात्रा के निर्यात की विशेष अनुमति दी गई है.
खाद्य सुरक्षा जरूरतों के लिए भी रास्ता खुला
DGFT ने यह भी कहा है कि 13 मई 2022 की पुरानी शर्तें जारी रहेंगी. इसके तहत अगर किसी देश की सरकार भारत से खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए अनुरोध करती है, तो केंद्र सरकार विशेष अनुमति देकर अतिरिक्त गेहूं निर्यात की मंजूरी दे सकती है. यानी तय 25 लाख टन अतिरिक्त कोटा के अलावा भी जरूरत पड़ने पर भारत दूसरे देशों को गेहूं भेज सकता है.
रिकॉर्ड उत्पादन से मजबूत हुआ स्टॉक
सरकार का यह फैसला देश में मजबूत गेहूं उत्पादन और आरामदायक स्टॉक स्थिति को देखते हुए लिया गया है. कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक, 2025-26 फसल वर्ष (जुलाई-जून) में देश का गेहूं उत्पादन 120.2 मिलियन टन रहने का अनुमान है. यह पिछले साल की तुलना में बेहतर है. इसके पीछे प्रमुख वजह गेहूं की बुवाई क्षेत्र में बढ़ोतरी रही है.
- 2026 रबी सीजन में गेहूं रकबा: 33.41 मिलियन हेक्टेयर
- पिछले साल गेहूं रकबा: 32.80 मिलियन हेक्टेयर
अधिक उत्पादन से घरेलू जरूरतों को पूरा करने के बाद निर्यात की गुंजाइश बढ़ी है.
जनवरी और फरवरी में भी राहत
सरकार ने जनवरी में 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी. इसके बाद फरवरी में अतिरिक्त 5 लाख टन गेहूं उत्पादों और 25 लाख टन गेहूं के निर्यात को मंजूरी दी गई थी. अब नए फैसले के साथ कुल स्वीकृत निर्यात मात्रा और बढ़ गई है.
किसानों और बाजार पर क्या असर
विशेषज्ञों का मानना है कि गेहूं निर्यात बढ़ने से किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना है. मंडियों में मांग मजबूत हो सकती है और व्यापारिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं. साथ ही भारत वैश्विक गेहूं बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत कर सकता है, खासकर ऐसे समय में जब कई देशों में खाद्यान्न आपूर्ति चिंता का विषय बनी हुई है.
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