ईरान में अशांति से भारतीय बासमती चावल के एक्सपोर्ट पर असर, घरेलू बाजार में गिरा भाव; जानें- क्या आ रही समस्या
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने एक्सपोर्टर्स से ईरानी कॉन्ट्रैक्ट्स पर जोखिमों का फिर से आकलन करने और सुरक्षित पेमेंट सिस्टम अपनाने का आग्रह किया. साथ ही ईरानी बाजार के लिए रखे गए स्टॉक का ज्यादा इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी.
ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के चलते भारत के चावल एक्सपोर्ट पर असर पड़ना शुरू हो गया है. एक इंडस्ट्री बॉडी ने मंगलवार को कहा कि ईरान में नागरिक अशांति का असर भारत से उस देश में होने वाले बासमती चावल के एक्सपोर्ट पर पड़ने लगा है, जिससे घरेलू कीमतों में तेजी से गिरावट आई है. क्योंकि एक्सपोर्टर्स को पेमेंट में देरी और बढ़ती अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ रहा है. इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने एक्सपोर्टर्स से ईरानी कॉन्ट्रैक्ट्स पर जोखिमों का फिर से आकलन करने और सुरक्षित पेमेंट सिस्टम अपनाने का आग्रह किया. साथ ही ईरानी बाजार के लिए रखे गए स्टॉक का ज्यादा इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी.
कितना चावल निर्यात करता है भारत?
ट्रेड डेटा के अनुसार, भारत ने 2025-26 वित्तीय वर्ष के अप्रैल-नवंबर के दौरान ईरान को 468.10 मिलियन अमेरिकी डॉलर का बासमती चावल एक्सपोर्ट किया, जो कुल 5.99 लाख टन था. ईरान भारत के लिए बासमती चावल एक्सपोर्ट का सबसे बड़ा डेस्टिनेशन है, लेकिन मौजूदा अस्थिरता के कारण इस वित्तीय वर्ष में ऑर्डर फ्लो, पेमेंट साइकिल और शिपमेंट शेड्यूल पर दबाव बढ़ा है.
घरेलू मंडियों में दिख रहा असर
इसका असर अब घरेलू मंडियों में साफ दिख रहा है. पिछले एक हफ्ते में ही, प्रमुख बासमती किस्मों की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो खरीदारों की हिचकिचाहट, देरी से होने वाले कॉन्ट्रैक्ट्स और एक्सपोर्टर्स के बीच बढ़े हुए जोखिम की भावना को दर्शाता है. बासमती चावल की किस्म 1121 की घरेलू कीमत पिछले हफ्ते के 85 रुपये प्रति किलो से घटकर 80 रुपये प्रति किलो हो गई है, जबकि 1509 और 1718 किस्मों की कीमतें 70 रुपये प्रति किलो से घटकर 65 रुपये प्रति किलो हो गई हैं.
ईरान भारतीय बासमती के लिए बड़ा बाजार
IREF के नेशनल प्रेसिडेंट प्रेम गर्ग ने एक बयान में कहा, ‘ईरान ऐतिहासिक रूप से भारतीय बासमती के लिए एक मुख्य बाजार रहा है. हालांकि, मौजूदा आंतरिक उथल-पुथल ने व्यापार चैनलों को बाधित किया है. पेमेंट धीमे कर दिए हैं और खरीदारों के भरोसे को कम किया है. उन्होंने कहा कि एक्सपोर्टर्स को, खासकर क्रेडिट एक्सपोजर और शिपमेंट टाइमलाइन के संबंध में, बहुत ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए.
वैकल्पिक बाजारों की तलाश
फेडरेशन ने कहा कि इंपोर्टर्स ने मौजूदा प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और भारत को पेमेंट भेजने में अपनी असमर्थता जताई है, जिससे एक्सपोर्टर्स के लिए अनिश्चितता पैदा हो गई है. IREF ने एक एडवाइजरी जारी की है और स्टेकहोल्डर्स से पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप के वैकल्पिक बाजारों में विविधता लाने की अपील की है ताकि ईरान जाने वाले शिपमेंट में किसी भी लंबे समय तक मंदी से बचा जा सके.
गर्ग ने कहा, ‘हम कोई अलार्म नहीं बजा रहे हैं, बल्कि समझदारी बरतने का आग्रह कर रहे हैं. भू-राजनीतिक और आंतरिक अस्थिरता के समय, व्यापार अक्सर सबसे पहले प्रभावित होता है. एक्सपोर्टर्स और किसानों दोनों की सुरक्षा के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है. अमेरिकी टैरिफ की चिंताएं फेडरेशन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों पर भी चिंता जताई, जिसमें कहा गया था कि जो देश ईरान के साथ व्यापार जारी रखेंगे. उन्हें 25 फीसदी टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है.
भारतीय चावल के निर्यात पर टैरिफ
IREF ने साफ किया कि अमेरिका को भारतीय चावल के निर्यात पर पहले से ही 50 फीसदी टैरिफ लगता है, जो पहले 10 फीसदी था. इसके बावजूद, अमेरिका को भारतीय चावल का निर्यात मजबूत बना हुआ है. भारत ने अप्रैल-नवंबर 2025-26 के दौरान अमेरिका को 2,40,518 टन बासमती और गैर-बासमती चावल निर्यात किया, जबकि पूरे 2024-25 वित्तीय वर्ष में यह 2,35,554 टन था. अमेरिका दुनिया भर में भारतीय चावल के लिए 10वां सबसे बड़ा बाजार है और बासमती चावल के लिए चौथा सबसे बड़ा बाजार है.
फेडरेशन ने कहा, ‘इस बारे में ज्यादा स्पष्टता नहीं है कि प्रस्तावित 25 फीसदी टैरिफ मौजूदा 50 फीसदी ड्यूटी के ऊपर लगाया जाएगा या नहीं.’ आगे कहा कि वैश्विक बाजारों में भारतीय बासमती की खास स्थिति को देखते हुए, अगर टैरिफ और भी बढ़ते हैं तो भी निर्यात में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है.
भारत को पेमेंट भेजने में असमर्थता
हालांकि, IREF ने ईरान में हो रहे घटनाक्रमों पर ज्यादा चिंता जताई, जहां स्थानीय बाजारों में रुकावटों से व्यापार निपटान प्रभावित हुआ है. आयातकों ने अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और भारत को भुगतान भेजने में असमर्थता जताई है, जिससे अनिश्चितता बढ़ गई है. फेडरेशन ने आगे कहा कि हालांकि अतीत में भी ऐसे संकट आए हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति का भविष्य अभी साफ नहीं है और आने वाले हफ्तों में कीमतों, लिक्विडिटी और व्यापार भावना में और गड़बड़ी होने की उम्मीद है.