पेट्रोकेमिकल्स का देश की प्रमुख इंडस्ट्री में कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होता है. इसमें फार्मा, पेंट, टेक्सटाइल से लेकर खिलौनों तक की इंडस्ट्री शामिल हैं. यह सभी सेक्टर न केवल बड़े पैमाने पर पेट्रोकेमिकल आयात करते हैं. बल्कि इन इंडस्ट्री में बड़ी मात्रा में लोगों को रोजगार भी मिलता है.
NASA का Artemis II मिशन पुरानी कहानी को फिर से जीवित करने की कोशिश में है. लेकिन इस बार का मकसद सिर्फ चांद पर पहुंचना नहीं, बल्कि ठहरना भी है. अगर यह मिशन सफल होता है, तो वह दिन दूर नहीं जब इंसान चांद पर रहना शुरू कर देगा और अंतरिक्ष में नई दुनिया बसाने का सपना सच हो जाएगा.
इस बार 35 साल पुराने जैसे हालात नहीं दिखते हैं. बीते 35 साल में भारत का खाड़ी देशों के साथ रिश्ता बदल चुका है. भारत बदल चुका है. खाड़ी देशों में भारतीयों की पहचान बदल चुकी है. खाड़ी देश अब केवल भारतीयों के काम करने के ठिकाने नहीं है. बल्कि वह लाखों लोगों के घर बन चुके हैं. जहां भारतीय प्रवासी, यूएई, सउदी अरब, कुवैत, कतर, बहरीन जैसे देशों की इकोनॉमी के मजबूत स्तंभ बन गए हैं.
AI अब सिर्फ तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक और आर्थिक शक्ति का नया पैमाना बन चुका है. AI सेमीकंडक्टर, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा और प्रतिभा के चार स्तंभों पर टिका है. इस इकोसिस्टम में आज तीन देश निर्णायक भूमिका में हैं. सबसे आगे अमेरिका और चीन है. जबकि भारत ने भी इस रेस में अहम पायदान पर पहुंच चुका है.
वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत के किसान पहले से ही कमजोर स्थिति में हैं. ऐसे में जब पर्दा पूरी तरह उठेगा और समझौते की बारीकियां सामने आएंगी, तब यह और साफ होगा कि यह समझौता भारत के लिए अवसर है या भारतीय कृषि के लिए एक कठिन परीक्षा.
क्षेत्रीय एयरलाइंस और छोटे शहरों को जोड़ने वाले रूट भारत में एक शानदार बाजार हो सकते हैं. सरकार की मदद एवं नई मंजूरी इस दिशा में अच्छा कदम लगता है. लेकिन सिर्फ जुगाड़ और तात्कालिक उपायों से एयरलाइंस नहीं चलतीं. वरना नई कंपनियां भी आसमान में उड़ने का सिर्फ सपना ही देखती रह जाएंगी.
2009 के आम चुनावों में यूपीए-2 की सत्ता में वापसी की सबसे बड़ी वजह नरेगा बन गया था. शुरुआत में मोदी सरकार इसे यूपीए की असफलता का स्मारक कहती थी. लेकिन करीब 20 साल अब योजना को नए कलेवर में पेश किया जा रहा है.
इंडिगो इस समय चौतरफा संकट से जूझ रही है. ऐसे में लगता है कि फाउंडर राहुल भाटिया को इस समय दोस्त राकेश गंगवाल की कमी सबसे ज्यादा महसूस हो रही होगी. गंगवाल को दुनिया के सबसे प्रभावशावी एयरलाइन मैनेजर में से एक माना जाता है. और उन्होंने कंपनी को देश की नंबर वन एयरलाइन बनाने में अपने इसी अनुभव को झोका है.
अफरातफरी का आलम ऐसा है कि जैसे कि एयरपोर्ट पर लॉकडाउन लग गया हो. जी हां ये सब देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के मिसमैनेजमेंट से हो रहा है. वो भी एक ऐसी लापरवाही के लिए जिसकी जिम्मेदार वह खुद है.साफ है कि किसी भी सेक्टर में एकाधिकार खतरनाक हो सकता है और जिस तरह इंडिगो के कस्टमर बंधक बन गए, वैसा ही हाल दूसरी सेवाओं के कस्टमर के साथ कभी भी हो सकता है.
बिहार नतीजे के बाद विपक्ष यह सोचने पर मजबूर होगा कि उसकी कांग्रेस के साथ आने वाले विधानसभा चुनावों में रणनीति क्या होनी चाहिए? इसके अलावा कांग्रेस को अंदरूनी विरोधों का भी सामना करना पड़ेगा. ऐसे में राजनीति का मिजाज बदलना तय है.