कार खरीदने वालों के लिए अलर्ट, जल्द महंगी हो सकती हैं गाड़ियां! पश्चिम एशिया तनाव का दिख रहा असर

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भारत के ऑटो सेक्टर पर पड़ सकता है. कच्चे माल की कमी, बढ़ती लॉजिस्टिक्स कॉस्ट और ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी से वाहन प्रोडक्शन और कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है. हालांकि अभी प्रोडक्शन प्रभावित नहीं हुआ है, लेकिन स्थिति नाजुक बनी हुई है.

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भारत के ऑटो सेक्टर पर पड़ सकता है. Image Credit: money9live

Auto Industry India: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के ऑटो सेक्टर पर भी दिख सकता है. SIAM ने चेतावनी दी है कि इससे वाहन प्रोडक्शन और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. इंडस्ट्री ने 2025-26 को मजबूत प्रदर्शन के साथ खत्म किया, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात नई चुनौतियां पैदा कर सकते हैं. कच्चे माल की कीमतों से लेकर लॉजिस्टिक्स कॉस्ट तक कई क्षेत्रों में असर देखने को मिल सकता है. इसका सीधा असर गाड़ियों की कीमत और मांग दोनों पर पड़ सकता है.

प्रोडक्शन कॉस्ट पर बढ़ा दबाव

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑटो इंडस्ट्री के लिए जरूरी कच्चे माल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. प्रोपेन और एथिलीन जैसे जरूरी इनपुट की कमी हो रही है. इनका इस्तेमाल पेंट और हीट ट्रीटमेंट जैसे कामों में होता है. सप्लाई में दिक्कत आने से प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ रही है. इसके साथ ही पेट्रोकेमिकल्स और अन्य कमोडिटी की कीमतें भी बढ़ रही हैं.

लॉजिस्टिक्स और शिपिंग कॉस्ट में उछाल

वैश्विक स्तर पर लॉजिस्टिक्स की स्थिति भी अस्थिर हो गई है. रूट बदलने और लंबी दूरी तय करने के कारण शिपिंग कॉस्ट बढ़ रही है. कंपनियों को समय पर पार्ट्स नहीं मिल पा रहे हैं. कुछ कंपनियां सप्लाई बनाए रखने के लिए एयर फ्रेट का सहारा ले रही हैं. इससे कुल कॉस्ट और बढ़ रही है.

अभी प्रोडक्शन पर असर नहीं

फिलहाल ऑटो सेक्टर में प्रोडक्शन पूरी तरह से प्रभावित नहीं हुआ है. लेकिन इंडस्ट्री के अनुसार स्थिति नाजुक बनी हुई है. पार्ट्स की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है. कंपनियां सरकार के साथ मिलकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. आने वाले समय में हालात और स्पष्ट होंगे.

गाड़ियों की कीमत बढ़ने की आशंका

अगर कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो गाड़ियों की कीमतें बढ़ सकती हैं. कंपनियां कुछ हद तक कॉस्ट खुद झेल सकती हैं, लेकिन ज्यादा बढ़ोतरी होने पर कीमत बढ़ाना जरूरी हो जाएगा. अगले चार से पांच हफ्तों में स्थिति साफ हो सकती है कि कीमतों में कितना बदलाव होगा.

मांग पर भी पड़ सकता है असर

ईंधन की कीमतें बढ़ने से ग्राहकों के व्यवहार पर असर पड़ सकता है. अभी गाड़ियों के लिए पूछताछ तो बढ़ रही है, लेकिन खरीदारी में देरी हो रही है. खासकर एंट्री लेवल सेगमेंट में इसका असर दिख रहा है. हालांकि अभी साल दर साल ग्रोथ पर बड़ा असर नहीं पड़ा है.

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EV सेगमेंट को मिल सकता है फायदा

अगर ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ सकती है. लोग पेट्रोल और डीजल की जगह सस्ते विकल्प की ओर जा सकते हैं. कंपनियां भी गैस के बेहतर उपयोग और वैकल्पिक उपायों पर काम कर रही हैं. इससे EV सेक्टर को फायदा मिल सकता है.