डीजल को पीछे छोड़ CNG कारों का बढ़ा दबदबा, FY26 में हिस्सेदारी 22 फीसदी तक पहुंची; जानें वजह
वित्त वर्ष 2026 में भारत के ऑटो बाजार में CNG गाड़ियों की मांग तेजी से बढ़ी है और यह लगातार दूसरे साल डीजल से आगे निकल गई है. कुल पैसेंजर व्हीकल बिक्री में CNG की हिस्सेदारी करीब 22 फीसदी तक पहुंच गई है जबकि डीजल घटकर करीब 18 फीसदी रह गया है. कम रनिंग कॉस्ट और बढ़ते फ्यूल दाम इसके पीछे मुख्य कारण हैं.
CNG Cars India: ऑटो सेक्टर में फ्यूल चॉइस को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. वित्त वर्ष 2026 में CNG गाड़ियां तेजी से लोकप्रिय हुई हैं और इसने डीजल को पीछे छोड़ते हुए अपनी पकड़ मजबूत कर ली है. कम रनिंग कॉस्ट और बढ़ती फ्यूल कीमतों ने ग्राहकों का रुझान CNG की ओर बढ़ाया है. लगातार दूसरे साल CNG देश में दूसरा सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला फ्यूल बन गया है. वहीं डीजल गाड़ियों की हिस्सेदारी में धीरे-धीरे गिरावट देखने को मिल रही है. यह ट्रेंड आने वाले समय में ऑटो मार्केट की दिशा तय कर सकता है.
CNG ने डीजल से बनाई बड़ी बढ़त
ऑटो कार की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में CNG गाड़ियों की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 22 फीसदी तक पहुंच गई है. पिछले साल यह करीब 19 फीसदी थी. यानी एक साल में इसमें साफ बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसके मुकाबले डीजल गाड़ियों की हिस्सेदारी थोड़ी घटकर करीब 18 फीसदी रह गई है. इससे साफ है कि CNG अब डीजल से आगे निकल चुका है और अपनी पकड़ लगातार मजबूत कर रहा है.
बिक्री के आंकड़ों में दिखी तेजी
वित्त वर्ष 2026 में कुल लगभग 47 लाख से ज्यादा पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री हुई. इसमें से करीब 10 लाख से ज्यादा CNG गाड़ियां थीं. पिछले तीन साल में CNG गाड़ियों की बिक्री लगभग दोगुनी हो गई है. यह आंकड़े दिखाते हैं कि ग्राहक तेजी से इस फ्यूल ऑप्शन को अपना रहे हैं. बाजार में CNG की मांग लगातार बढ़ रही है.
कम खर्च बना सबसे बड़ा कारण
CNG गाड़ियों की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण कम खर्च है. पेट्रोल और डीजल के मुकाबले CNG पर चलने की लागत काफी कम आती है. हालांकि CNG गाड़ी खरीदते समय शुरुआती कीमत थोड़ी ज्यादा होती है. लेकिन यह अतिरिक्त खर्च एक या दो साल में पूरा हो जाता है. यही वजह है कि लोग इसे एक बेहतर और किफायती विकल्प मान रहे हैं.
बढ़ता नेटवर्क भी बना ताकत
CNG स्टेशनों का नेटवर्क भी तेजी से बढ़ा है. अब देश के 600 से ज्यादा शहरों में CNG की सुविधा उपलब्ध है. पहले जहां यह सुविधा सीमित थी अब यह आसानी से मिल रही है. इससे लोगों के लिए CNG गाड़ी चलाना आसान हो गया है. बेहतर उपलब्धता ने भी इसकी मांग को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है.
पेट्रोल अब भी सबसे आगे
हालांकि CNG तेजी से बढ़ रहा है लेकिन पेट्रोल गाड़ियां अभी भी सबसे ज्यादा बिक रही हैं. वित्त वर्ष 2026 में पेट्रोल की हिस्सेदारी करीब 47 फीसदी रही है. इसके अलावा हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हिस्सेदारी भी धीरे- धीरे बढ़ रही है. यह दिखाता है कि बाजार में कई तरह के विकल्प मौजूद हैं और ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से चुनाव कर रहे हैं.
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बदलती पसंद से बदलेगा बाजार
डीलर्स के अनुसार ज्यादातर ग्राहक अब सस्ती रनिंग कॉस्ट वाली गाड़ियों की तरफ बढ़ रहे हैं. बढ़ती फ्यूल कीमतें इस बदलाव को और तेज कर रही हैं. आने वाले समय में CNG और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग और बढ़ सकती है. इससे ऑटो कंपनियों की रणनीति में भी बदलाव देखने को मिलेगा. यह ट्रेंड भविष्य के ऑटो बाजार की नई दिशा तय कर सकता है.
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