E20 से क्या 30 करोड़ गाड़ियां नहीं रहेंगी इस्तेमाल लायक? सरकार का आया बयान; 2.84 करोड़ वाहनों की हुई सर्विसिंग
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि हाल ही में मीडिया और सोशल मीडिया पर इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम के बारे में कुछ भ्रामक दावे किए गए हैं. सरकार ने जोर देकर कहा कि इस पहल से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है.
Highlights
- 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की गई.
- पुराने वाहनों के परफॉर्मेंस में कोई खास बदलाव नहीं.
- गाड़ी के खराब होने का कोई भी पक्का सबूत नहीं मिला है.
सरकार ने एक बार फिर अपने इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम का बचाव किया है. उसने कहा कि बड़े पैमाने पर टेस्टिंग और फील्ड में मिले अनुभव से ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि E20 पेट्रोल से इंजन में असामान्य टूट-फूट, जंग या गाड़ी की उम्र कम होने जैसी समस्याएं होती हैं. सरकार ने जोर देकर कहा कि इस पहल से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है और ग्लोबल स्तर पर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कम हुआ है.
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि हाल ही में मीडिया और सोशल मीडिया पर इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम के बारे में कुछ भ्रामक दावे किए गए हैं.
पहला दावा
2023 से पहले बनी गाड़ियां E20 पेट्रोल पर नहीं चल सकतीं.
इस पर सरकार ने कहा कि E15-प्लस फ्यूल का इस्तेमाल साढ़े तीन साल से अधिक समय से बड़े पैमाने पर हो रहा है, जबकि E19-E20 फ्यूल का इस्तेमाल ढाई साल से ज्यादा समय से हो रहा है. इस दौरान, इथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से इंजन खराब होने या गाड़ी बंद पड़ने की कोई ऐसी खबर सामने नहीं आई है जिसकी पुष्टि हुई हो.
अगर इथेनॉल ब्लेंडिंग से इंजन या फ्यूल सिस्टम को कोई बड़ा नुकसान होता, तो ऐसे मामलों में बड़े पैमाने पर वारंटी क्लेम, सर्विस कैंपेन और ग्राहकों की शिकायतें देखने को मिलतीं, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है.
2001 में हुई प्रोग्राम की शुरुआत
इथेनॉल कोई नया फ्यूल नहीं है. इसका इस्तेमाल दुनिया भर में एक सदी से भी ज्यादा समय से हो रहा है, और ब्राजील जैसे देश दशकों से अधिक इथेनॉल ब्लेंड वाले फ्यूल का इस्तेमाल कर रहे हैं.
भारत में, इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम की शुरुआत 2001 में एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हुई थी, 2006 में E5 पेश किया गया था, और हालांकि 2013-14 में ब्लेंडिंग लगभग 1.53% थी, लेकिन उसके बाद जरूरी प्रोडक्शन क्षमता, इंफ्रास्ट्रक्चर और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करके इसे धीरे-धीरे बढ़ाया गया है.
दूसरा दावा
लगभग 30 करोड़ गाड़ियां इस्तेमाल के लायक नहीं रहेंगी.
इस दावे को भी खारिज करते हुए सरकार ने कहा कि E15+ ब्लेंडेड पेट्रोल का इस्तेमाल पहले से ही साढ़े तीन साल से ज्यादा समय से बड़े पैमाने पर हो रहा है, जबकि E19-E20 फ्यूल का इस्तेमाल ढाई साल से अधिक समय से हो रहा है.
इस दौरान:
- 20 करोड़ से ज्यादा दो-पहिया वाहन.
- 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इन फ्यूल पर चली हैं और इथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से इंजन खराब होने या गाड़ी के खराब होने का कोई भी पक्का सबूत नहीं मिला है.
- अगर E20 सच में गाड़ियों को इस्तेमाल के लायक नहीं बनाता, तो भारत में लाखों गाड़ियां खराब होतीं, वारंटी क्लेम आते और सर्विस कैंपेन चलाने पड़ते. ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है.
E20 ईंधन सुरक्षित
लोकसभा में एक लिखित जवाब में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम को नीति आयोग, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), तेल मार्केटिंग कंपनियों और अन्य तकनीकी संस्थानों के साथ सलाह-मशविरे के बाद एक चरणबद्ध और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित प्रक्रिया के जरिए लागू किया गया था.
गोपी ने कहा कि ARAI, SIAM, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और ऑटोमोबाइल निर्माताओं द्वारा की गई प्रयोगशाला स्टडीज और फील्ड ट्रायल्स से यह पुष्टि हुई है कि E20 ईंधन तय मानकों के तहत इस्तेमाल के लिए सुरक्षित है.
फरफॉर्मेंस में कोई खास बदलाव नहीं
उन्होंने कहा, ‘इन स्टडीज से यह भी पता चला है कि पुराने वाहनों के परफॉर्मेंस में कोई खास बदलाव नहीं आया और न ही E20 के कारण उनमें कोई असामान्य टूट-फूट देखी गई.’ उन्होंने आगे कहा कि प्रयोगशाला स्टडीज, फ़ील्ड वैलिडेशन और असल दुनिया में इस्तेमाल के अनुभव से वाहनों के परफॉर्मेंस पर कोई व्यापक बुरा असर नहीं देखा गया.
मंत्री ने कहा कि निर्माताओं के सर्विस डेटा से भी पता चला है कि E20 ईंधन के कारण वाहनों में कोई असामान्य जंग, टूट-फूट या उनकी उम्र कम होने जैसी समस्या नहीं आई, जबकि कंपनियां वारंटी की शर्तों को पूरा करती रहीं. गोपी ने बताया कि 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की गई.
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