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E20 का कहर: 160 रुपये लीटर पेट्रोल खरीदने की मची होड़, दोगुनी हो गई बिक्री; आखिर क्यों बढ़ी डिमांड?

इथेनॉल-मिक्स पेट्रोल से गाड़ियों को नुकसान पहुंचने की बढ़ती चिंताओं के बीच यह बढ़ोतरी हुई है. 100-ऑक्टेन पेट्रोल मुख्य रूप से सुपरकार, लग्जरी सेडान और सुपरबाइक जैसी हाई-परफॉर्मेंस गाड़ियों के लिए बनाया गया है.

100-ऑक्टेन पेट्रोल की डिमांड बढ़ी. Image Credit: Money9 Live

Highlights

  • सरकारी तेल कंपनियां बेचती हैं 100-ऑक्टेन पेट्रोल.
  • 100-ऑक्टेन पेट्रोल की सीमित है डिमांड.
  • 1 फीसदी से भी कम आउटलेट्स पर उपलब्धता.

देश में इथेनॉल मिक्स पेट्रोल (E20) पर बहस जारी है. इस बीच हाल के महीनों में 100-ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल की बिक्री दोगुनी से अधिक हो गई है. यह पेट्रोल एकमात्र ऐसा ग्रेड है जिसमें इथेनॉल नहीं मिलाया जाता है. इथेनॉल-मिक्स पेट्रोल से गाड़ियों को नुकसान पहुंचने की बढ़ती चिंताओं के बीच यह बढ़ोतरी हुई है. बिजनेस स्टैंडर्ड ने इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि जुलाई में यह बढ़ोतरी खास तौर पर ज्यादा देखी गई, क्योंकि उस समय इथेनॉल मिलाने को लेकर विवाद बढ़ गया था.

सरकारी तेल कंपनियां बेचती हैं 100-ऑक्टेन पेट्रोल

सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) अलग-अलग ब्रांड नामों से 100-ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल बेचती हैं, जिनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) का XP100, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) का Speed100 और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) का poWer100 शामिल हैं.

100-ऑक्टेन पेट्रोल की डिमांड सीमित

100-ऑक्टेन पेट्रोल मुख्य रूप से सुपरकार, लग्जरी सेडान और सुपरबाइक जैसी हाई-परफॉर्मेंस गाड़ियों के लिए बनाया गया है. सूत्रों ने बताया कि देश में इस ईंधन की मांग सीमित है और यह कुल पेट्रोल बिक्री का सिर्फ 0.1 फीसदी है, जिसका मुख्य कारण सामान्य पेट्रोल की तुलना में इसकी कीमत काफी अधिक है.

रेगुलर पेट्रोल से कितना महंगा 100-ऑक्टेन

दिल्ली में इथेनॉल-फ्री 100-ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल लगभग 160 रुपये प्रति लीटर बिकता है, जो रेगुलर पेट्रोल से लगभग 57 फीसदी महंगा है. रेगुलर पेट्रोल, जिसमें 20 फीसदी इथेनॉल मिला होता है, उसकी कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर है, जबकि E20-ब्लेंडेड प्रीमियम ग्रेड (XP95, Speed97 और poWer95) की कीमत लगभग 111-112 रुपये प्रति लीटर है.

1 फीसदी से भी कम आउटलेट्स पर उपलब्धता

सूत्रों के अनुसार, इसकी सीमित मांग के कारण, देश के 1 फीसदी से भी कम रिटेल फ्यूल आउटलेट्स पर 100-ऑक्टेन पेट्रोल मिलता है और इसकी उपलब्धता मुख्य रूप से मेट्रो शहरों तक ही सीमित है. अधिकारियों को उम्मीद है कि इथेनॉल-फ्री प्रीमियम पेट्रोल की मांग में हालिया उछाल अस्थायी है और इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल को लेकर चिंताएं कम होने पर बिक्री सामान्य हो जाएगी.

इथेनॉल ब्लेंडिंग

पिछले हफ्ते सरकार ने कहा था कि सरकारी फ्यूल रिटेलर्स द्वारा बेचे जाने वाले प्रीमियम ग्रेड पेट्रोल की सप्लाई बिना इथेनॉल ब्लेंडिंग के जारी रहेगी. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग को 20 फीसदी से अधिक बढ़ाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है और E0 या E10 पेट्रोल को फिर से शुरू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है.

हाई ऑक्टेन रेटिंग का क्या है फायदा?

100-ऑक्टेन पेट्रोल एक प्रीमियम-ग्रेड फ्यूल है जिसका रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) 100 है, जो रेगुलर पेट्रोल की तुलना में इंजन नॉकिंग के खिलाफ काफी बेहतर रेजिस्टेंस देता है. इसकी हाई ऑक्टेन रेटिंग फ्यूल को जलने से पहले इंजन के अंदर हाई टेंपरेचर और कम्प्रेशन को झेलने में सक्षम बनाती है, जिससे यह हाई-परफॉर्मेंस और हाई-कम्प्रेशन इंजन के लिए उपयुक्त हो जाता है.

हाल ही में यह फ्यूल खरीदने वाले एक ग्राहक ने कहा, ‘100-ऑक्टेन फ्यूल बहुत महंगा है. E20 पेट्रोल से लगभग 45 फीसदी अधिक इसकी कीमत है. इसलिए इसके इस्तेमाल से मिलने वाले किसी भी माइलेज का फायदा आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं होता. एकमात्र फायदा यह है कि इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल के इस्तेमाल से इंजन को होने वाले किसी भी संभावित नुकसान से 100-ऑक्टेन का इस्तेमाल करके बचा जा सकता है.

इथेनॉल मिलाने को लेकर विवाद

पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने को लेकर विवाद इस चिंता पर केंद्रित है कि कुछ वाहनों, खासकर पुराने मॉडलों में, जिन्हें E20 के लिए नहीं बनाया गया था, पार्ट्स में घिसाव, कम माइलेज और मेंटेनेंस की समस्याएं हो सकती हैं.

E20 से कितना कम होता है माइलेज?

इस महीने की शुरुआत में सरकार ने माना कि पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने से सामान्य पेट्रोल की तुलना में माइलेज 3-5 फीसदी कम हो जाता है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इस मिश्रण से ऑक्टेन रेटिंग काफी बेहतर होती है, एंटी-नॉक परफॉर्मेंस बेहतर होता है. कम्बशन तेज होता है, पिकअप बेहतर होता है, गाड़ी आसानी से रफ्तार पकड़ती है और इंजन का ऑपरेशन अधिक साफ-सुथरा होता है.

1 लाख करोड़ रुपये का निवेश

सरकार ने E20 के साथ-साथ शुद्ध पेट्रोल या 10 फीसदी इथेनॉल-मिक्स पेट्रोल (E10) बेचने की संभावना को खारिज कर दिया. सरकार का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने इथेनॉल उत्पादन और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में सालाना लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है.

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