मारुति की बढ़ेगी मुश्किल, PMO के पास पहुंच गई शिकायत!
भारत में कारों के लिए प्रस्तावित Corporate Average Fuel Efficiency यानी CAFE Norms को लेकर ऑटो इंडस्ट्री में हलचल तेज हो गई है. ये नियम सरकार द्वारा बनाए जा रहे ऐसे मानक हैं, जिनका मकसद ईंधन खपत और CO₂ उत्सर्जन को कम करना है. नए और सख्त CAFE लक्ष्य 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले FY27 से शुरू होंगे और 2031-32 तक और कड़े होते जाएंगे.
इसी बीच कई बड़ी कार कंपनियों ने इस ड्राफ्ट पॉलिसी को लेकर अपनी आपत्तियां सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई हैं. शिकायत का मुख्य कारण ड्राफ्ट में शामिल एक प्रस्ताव है, जिसमें छोटी और हल्की कारों के लिए वजन-आधारित सब-कैटेगरी बनाने की बात कही गई है. इस कैटेगरी में करीब 909 किलोग्राम तक की अनलेडन कारें आएंगी, जिनके लिए इंजन साइज और लंबाई की सीमा तय होगी और उन्हें अपेक्षाकृत ढीले एमिशन नियमों का फायदा मिल सकता है. ऑटो इंडस्ट्री का मानना है कि इससे मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जिनका फोकस छोटे और किफायती वाहनों पर है. कंपनियों को डर है कि इस तरह का वर्गीकरण बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा पैदा कर सकता है.
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