15वें वित्त आयोग की आखिरी किस्त जारी, 6 राज्यों को ₹1500 करोड़ से ज्यादा फंड, गांव विकास को मिलेगा बूस्ट

केंद्र सरकार ने FY26 के तहत 15वें वित्त आयोग की फाइनल किस्त जारी करते हुए 6 राज्यों को 1,500 करोड़ रुपये से अधिक का फंड दिया है, जिससे ग्रामीण विकास और पंचायतों की क्षमता को मजबूत किया जाएगा. जानें किसे-कितना मिलेगा.

15वें वित्त आयोग का किस्त Image Credit: @Money9live

15th Finance Commission Fund: केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास और स्थानीय प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के तहत 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की है. यह फंड छह राज्यों- तेलंगाना, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, मिजोरम और मेघालय को दिया गया है, जिसका उद्देश्य गांवों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना और स्थानीय निकायों को अधिक सक्षम बनाना है.

आखिरी किस्त

पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, यह राशि 15वें वित्त आयोग की पांच साल की अवधि (FY22 से FY26) के अंतिम चरण का हिस्सा है, जो 31 मार्च 2026 को समाप्त हो रही है. इस पूरी अवधि में ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए कुल 4.36 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. मौजूदा फंड उसी के तहत अंतिम किस्तों में से एक है, जिसे तय शर्तों के आधार पर जारी किया गया है.

दो तरह के फंड होते हैं जारी

सरकार द्वारा जारी यह फंड ‘टाइड’ (बंधित) और ‘अनटाइड’ (अबंधित) ग्रांट्स के रूप में दिया जाता है. टाइड ग्रांट्स का इस्तेमाल विशेष सेवाओं के लिए ही किया जा सकता है, जैसे स्वच्छता, ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) स्थिति को बनाए रखना, कचरा प्रबंधन, पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और पानी का पुनर्चक्रण. वहीं, अनटाइड ग्रांट्स स्थानीय निकायों को उनकी जरूरतों के अनुसार खर्च करने की आजादी देते हैं, हालांकि इसका इस्तेमाल वेतन या प्रशासनिक खर्चों के लिए नहीं किया जा सकता.

इन फंड्स को जारी करने की प्रक्रिया भी चरणबद्ध और प्रदर्शन आधारित होती है. राज्यों को यह राशि तभी मिलती है जब वे इस्तेमाल प्रमाण पत्र (Utilization Certificates), ऑडिट रिपोर्ट और दूसरे निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं. कई बार देरी या नियमों के पालन में कमी के कारण कुछ फंड रोक लिए जाते हैं, जिन्हें बाद में शर्तें पूरी होने पर जारी किया जाता है.

अलग है फंड डिस्ट्रीब्यूशन का ग्रांट

राज्यों के बीच फंड का वितरण भी अलग-अलग रहा है. राजस्थान को FY26 के लिए अनटाइड ग्रांट की दूसरी किस्त के रूप में 315.61 करोड़ रुपये मिले हैं, जिससे राज्य के जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायतों को लाभ मिलेगा. तेलंगाना को 12,600 से अधिक ग्राम पंचायतों के लिए 247.94 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की गई है.

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र के मामले में फंड वितरण थोड़ा जटिल रहा. राज्य को FY26 के लिए टाइड ग्रांट की पहली और दूसरी किस्त से जुड़े रोके गए 109.06 करोड़ रुपये से 109.06 करोड़ रुपये जारी किए गए. इसके अलावा FY25 के लंबित टाइड ग्रांट्स के रूप में 116.97 करोड़ रुपये और 329.21 करोड़ रुपये भी दिए गए, साथ ही 2025-26 के लिए रोकी गई अनटाइड ग्रांट की 72.70 करोड़ रुपये से 72.70 करोड़ रुपये की राशि भी जारी की गई.

उत्तराखंड

पहाड़ी राज्य उत्तराखंड को FY26 के लिए 91.31 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त दी गई है, जिससे राज्य के 13 जिला पंचायत, 95 ब्लॉक पंचायत और 7,784 ग्राम पंचायतों को फायदा मिलेगा. इसके अलावा पहले रोकी गई 1.84 करोड़ रुपये की राशि भी जारी की गई, जिससे 216 अतिरिक्त ग्राम पंचायतों को लाभ मिला है.

मेघालय

पूर्वोत्तर राज्यों में मेघालय को 27 करोड़ रुपये अनटाइड और 22.20 करोड़ रुपये टाइड ग्रांट के रूप में मिले हैं, जिससे वहां के स्वायत्त जिला परिषदों और ग्राम परिषदों को समर्थन मिलेगा. इस तरह के फंड वितरण से देशभर की हजारों ग्राम पंचायतों और स्थानीय निकायों को सीधा फायदा मिलेगा. यह कदम विकेंद्रीकृत शासन को मजबूत करने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सेवाओं की क्वालिटी सुधारने में अहम भूमिका निभाएगा.

भारत में 2.5 लाख से अधिक ग्रामीण स्थानीय निकाय हैं, जिनमें करीब 2.6 लाख ग्राम पंचायतें शामिल हैं. ऐसे में समय पर और प्रदर्शन आधारित फंडिंग से न केवल विकास कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता भी बढ़ेगी.

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