अमेरिका- यूरोपियन यूनियन से डील के बाद अब भारत-चीन ट्रेड पर बड़ा सिग्नल, FDI नियमों पर ढील के संकेत

वैश्विक स्तर पर बदलते व्यापार समीकरणों के बीच एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से जुड़ा एक अहम बयान सामने आया है. यह संकेत केवल मौजूदा ट्रेड ट्रेंड्स तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की निवेश नीति और कारोबारी रिश्तों की दिशा भी तय कर सकता है. खास तौर पर विदेशी निवेश से जुड़े नियमों पर नई बहस तेज होती दिख रही है.

भारत-चीन रिश्ता Image Credit: Canva

India China trade: भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते कारोबारी रिश्तों और यूरोपियन यूनियन के साथ हुए समझौतों के बीच चीन के एक अधिकारी ने कहा है कि इन बाहरी फैक्टर्स का असर भारत-चीन व्यापार पर नहीं पड़ेगा. चीन का मानना है कि भारत और चीन दोनों इतनी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं कि वे अपने आप में मजबूत हैं और बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था में भरोसा रखती हैं. यही वजह है कि किसी तीसरे देश के साथ भारत के समझौते से भारत-चीन ट्रेड के भविष्य पर कोई नकारात्मक असर नहीं होगा.

भारत-अमेरिका डील के बीच चीन का भरोसा

शनिवार को नागपुर में ‘एडवांटेज विदर्भ 2026’ के तहत आयोजित इंटरनेशनल बिजनेस कॉन्क्लेव के दौरान पीटीआई से बातचीत में चीन के कौंसल जनरल किन जी ने कहा, भारत और चीन दोनों ही बड़े बाजार हैं और दोनों देश मल्टीलेटरलिज्म यानी बहुपक्षीय सहयोग और व्यापार का समर्थन करते हैं. ऐसे में भारत द्वारा अमेरिका या यूरोपीय संघ के साथ किए जा रहे समझौतों से भारत-चीन व्यापार संबंध ज्यादा प्रभावित नहीं होंगे.

जब उनसे पूछा गया कि भारत ने अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के साथ जो डील्स की है, उस पर चीन की क्या राय है, तो उन्होंने साफ कहा कि भारत अपने अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को तय करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत और चीन को आपसी सहयोग जारी रखना चाहिए, संबंधों को मजबूत करना चाहिए और अलग-अलग क्षेत्रों में संवाद बनाए रखना चाहिए.

FDI नियमों में ढील के संकेत

एफडीआई से जुड़े प्रेस नोट 3 (2020) को लेकर भी किन जी ने सकारात्मक संकेत दिए. उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स से उन्हें पता चला है कि भारत इसमें कुछ बदलावों पर विचार कर रहा है. उनके मुताबिक यह एक अच्छा और सकारात्मक कदम हो सकता है, क्योंकि दोनों देशों के निवेशकों और कारोबारी समुदायों को साथ आने की जरूरत है. उन्होंने संस्कृति, शिक्षा और कला जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया.

प्रेस नोट 3 (2020 सीरीज) भारत सरकार ने 17 अप्रैल 2020 को FDI नीति में एक अहम संशोधन के रूप में जारी किया था. इसके तहत भारत के साथ भूमि द्वारा सीमा साझा करने वाले देशों- जैसे चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान से आने वाली किसी भी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को केवल सरकार की पूर्व अनुमति के अधीन रखा गया.

इसका मतलब यह है कि इन देशों की कंपनियों या ऐसे किसी निवेश का हिस्सा जिसमें लाभप्राप्त मालिक (beneficial owner) इन देशों का नागरिक या वहां स्थित हो, वह भारत में निवेश करने के लिये सरकारी मंजूरी ले, चाहे वह कोई भी सेक्टर हो. इससे पहले कुछ क्षेत्रों में ऐसे निवेश स्वचालित रूप से (सरकार के बिना) भी हो सकता था, लेकिन प्रेस नोट 3 ने इस नियम को व्यापक रूप से लागू कर दिया.

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‘चीन प्लस वन’ पर साफ संदेश

‘चीन प्लस वन स्ट्रैटेजी’ पर बात करते हुए चीनी राजनयिक ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे की जगह लेने की सोच के बजाय साथ मिलकर काम करने पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि चीन की ताकत मैन्युफैक्चरिंग में है, जबकि भारत सॉफ्टवेयर और सर्विस सेक्टर में मजबूत है. दोनों देशों के बीच यह पूरकता आपसी फायदे का बड़ा आधार बन सकती है.

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