टाटा भी एयर इंडिया से परेशान! प्लाइट में कटौती… टलेगा विस्तार का प्लान, घाटे ने बिगाड़ा खेल
ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि कंपनी के मुख्य मालिक टाटा ग्रुप ने एयरलाइन को अपने भारी नुकसान को कम करने पर ध्यान देने के लिए कहा है. पिछले साल एयर इंडिया का विमान क्रैश हुआ था, और तब से लेकर अब तक एयरलाइन को लगभग 3 अरब डॉलर का सालाना नुकसान हुआ है.
टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया लिमिटेड विमानों की डिलीवरी टालने, उड़ानों में कटौती करने और विस्तार की योजनाओं को टालने पर विचार कर रही है. ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि कंपनी के मुख्य मालिक टाटा ग्रुप ने एयरलाइन को अपने भारी नुकसान को कम करने पर ध्यान देने के लिए कहा है. ईटी ने मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि रणनीति में यह बदलाव एक बड़े ग्रोथ प्लान से अचानक पीछे हटने जैसा है.
यह उस एयरलाइन पर भरोसा कम होने को दिखाता है. पिछले साल एयर इंडिया का विमान क्रैश हुआ था, और तब से लेकर अब तक एयरलाइन को लगभग 3 अरब डॉलर का सालाना नुकसान हुआ है.
कई तरह के उठाए जाएंगे कदम
साइज छोटा करने की इस प्रक्रिया में लागत कम करने के लिए कई तरह के उपाय किए जाएंगे. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि एयर इंडिया, एयरबस SE और बोइंग कंपनी के साथ बातचीत कर रही है ताकि पहले ऑर्डर किए गए 500 विमानों की डिलीवरी में देरी की जा सके. ऐसा करने से एयर इंडिया को विमान निर्माताओं को डिलीवरी के समय किए जाने वाले बड़े भुगतान को टालने में मदद मिलेगी.
कुछ रूट किए जा रहे कम
मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि एयरलाइन नई घरेलू और इंटरनेशनल जगहों के लिए उड़ान भरने की अपनी योजनाओं पर फिर से विचार कर रही है. इसके तहत कुछ रूट कम किए जा रहे हैं और कुछ एयरपोर्ट्स पर नई सर्विस शुरू करने में देरी की जा रही है, जैसे कि नई दिल्ली के पास नए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से एयरलाइन देर से प्लाइट ऑपरेट करेगी.
एयर इंडिया के सामने कई चुनौतियां
एयर इंडिया की महत्वाकांक्षाओं में कमी आने के पीछे कई चुनौतियां हैं, जिनकी वजह से कंपनी भारी घाटे में चली गई है. पिछले साल जून में हुए घातक क्रैश, पाकिस्तान द्वारा भारतीय एयरलाइंस के लिए अपना एयरस्पेस बंद करने और ईरान में युद्ध के कारण उड़ानों में रुकावट आई है, महंगे रूट बदलने पड़े हैं और ईंधन का खर्च बढ़ गया है. भारतीय रुपये की कमजोरी ने भी एयरलाइन की आर्थिक मुश्किलों को बढ़ा दिया है, क्योंकि एयरलाइन का ज्यादातर खर्च डॉलर में होता है.
ग्रोथ स्ट्रैटेजी में बदलाव की तैयारी
मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, टाटा ग्रुप – जिसने 2022 में इस नेशनल कैरियर का मालिकाना हक हासिल किया था- अब चाहता है कि एयर इंडिया अपनी ग्रोथ स्ट्रैटेजी में बदलाव करे. कंपनी चाहती है कि एयर इंडिया मौजूदा ऑपरेशन्स को स्थिर करने और लागत कम करने के उपायों को लागू करने पर ध्यान दे. एयर इंडिया ने इस साल की शुरुआत में ईरान युद्ध और एयरस्पेस बंद होने की वजह से अपनी उड़ानों में कटौती की घोषणा की थी.
एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने कहा कि ब्लूमबर्ग के सवाल बहुत ज्यादा अटकलों पर आधारित थे और एयरलाइन अपने बेड़े को आधुनिक बनाने और अपने लंबे समय के बदलाव के प्लान को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है.
एक दशक से घाटे में चल रही एयरलाइन
देश की प्रमुख एयरलाइन कंपनी, जो ‘एयर इंडिया’ (फुल-सर्विस एयरलाइन) और ‘एयर इंडिया एक्सप्रेस’ (कम लागत वाली एयरलाइन) चलाती है, एक दशक से ज्यादा समय से घाटे में चल रही है. ऐसा तब हो रहा है जब देश की मजबूत आर्थिक तरक्की और यात्रा की बढ़ती मांग के कारण कंपनी का रेवेन्यू और कामकाज बढ़ा है.
600 विमानों के दिए थे ऑर्डर
एयर इंडिया ने पहले 2023 और 2024 के दौरान एयरबस और बोइंग से कुल 600 विमानों का ऑर्डर दिया था, और फिर इस साल की शुरुआत में अपने बेड़े को तेजी से बढ़ाने के लिए और ऑर्डर दिए. जानकारों का कहना है कि ज्यादातर विमानों की डिलीवरी 2027 और 2028 में होने की उम्मीद है.
एयरलाइंस आम तौर पर विमानों के लिए पेमेंट कई साल में करती हैं, जिसमें सबसे बड़ा पेमेंट, जो खरीद कीमत का लगभग 80 फीसदी हो सकता है, तब किया जाता है जब विमान उन्हें सौंपे जाते हैं.
कितना हुआ नुकसान?
2022 से एयर इंडिया को 550 अरब रुपये ($5.8 अरब) से अधिक का नुकसान हुआ है. यह नुकसान टाटा ट्रस्ट्स के बोर्ड के लिए चिंता का एक बड़ा कारण बन गया है. टाटा ट्रस्ट्स, टाटा संस होल्डिंग कंपनी को कंट्रोल करता है, जिसके पास एयर इंडिया की ज्यादातर हिस्सेदारी है. सिंगापुर एयरलाइंस लिमिटेड ने 2024 में एयर इंडिया में 25.1 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी.
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