मोदी सरकार देगी ₹2.5 लाख करोड़ का पैकेज! ईरान संकट के बीच राहत योजना पर काम, कोविड जैसी मिलेगी मदद

वैश्विक तनाव के बीच मोदी सरकार उद्योगों को संभावित आर्थिक दबाव से बचाने के लिए बड़े कदम की तैयारी में है. कंपनियों से रियल टाइम फीडबैक लिया जा रहा है और एक नई वित्तीय राहत योजना पर काम चल रहा है, जो आने वाले समय में अहम भूमिका निभा सकती है.

क्रेडिट गारंटी स्कीम भारत Image Credit: AI Generated

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर धीरे-धीरे भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है. सरकार फिलहाल हालात को लेकर बहुत गंभीर फैसले नहीं कर रही है, लेकिन संभावित जोखिमों को देखते हुए आने वाले किसी संकट से निपटने के लिए तैयार हो रही है. इसी दिशा में उद्योगों को राहत देने के लिए एक नई क्रेडिट गारंटी स्कीम लाई जा सकती है, जिससे कंपनियों को बढ़ती लागत और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद मिले.

नई क्रेडिट गारंटी स्कीम की तैयारी

इकोनॉमिक टाइम्स (ET) की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार एक नई योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत ₹2 से ₹2.5 लाख करोड़ तक की गारंटी दी जा सकती है. इस स्कीम का मकसद उन कंपनियों को आसान फंडिंग उपलब्ध कराना है, जिन पर इनपुट कॉस्ट और लॉजिस्टिक्स खर्च का दबाव बढ़ रहा है.

सरकार इसे अगले दो हफ्तों में लॉन्च कर सकती है. ET ने सरकारी अधिकारी के हवाले से बताया कि यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया जा रहा है, ताकि उद्योग जगत को भरोसा दिया जा सके.

सरकार ने कंपनियों से सीधे संपर्क करना शुरू कर दिया है और उनसे उत्पादन पर असर, लागत बढ़ने और सप्लाई से जुड़ी समस्याओं की जानकारी मांगी जा रही है. उद्योगों से कहा गया है कि वे ऐसी दिक्कतों को तुरंत सरकार के सामने रखें, ताकि समय पर समाधान निकाला जा सके.

ECLGS जैसा होगा मॉडल

यह नई स्कीम कोविड-19 के दौरान लाई गई Emergency Credit Line Guarantee Scheme (ECLGS) की तर्ज पर हो सकती है. इस योजना के तहत कंपनियों, खासकर MSMEs को 100% गारंटी के साथ बिना कोलैटरल के लोन मिल सकता है.

ECLGS के तहत अब तक ₹3.62 लाख करोड़ का क्रेडिट सपोर्ट दिया जा चुका है. इसमें 11.9 मिलियन (करीब 1.19 करोड़) लाभार्थी शामिल रहे हैं. इसके अलावा:

  • 80% से ज्यादा लोन 8% या उससे कम ब्याज दर पर दिए गए
  • 92% गारंटी MSME सेक्टर को मिली

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यह दिखाता है कि ऐसी स्कीम संकट के समय उद्योगों के लिए कितनी अहम साबित हो सकती है. रिपोर्ट में एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि अभी डिफॉल्ट के मामले नहीं बढ़े हैं, लेकिन एक्सपोर्ट से जुड़े सेक्टर्स में दबाव के संकेत मिलने लगे हैं. उनका कहना है कि यह स्कीम सही समय पर लाई जा रही है, क्योंकि हालात सामान्य होने में समय लग सकता है.

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