ईरान-इजरायल संकट से भारत को हो सकता है फायदा, डेटा सेंटर सेक्टर में बढ़ी मांग; 200-500 MW कैपेसिटी शिफ्ट होने के संकेत

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बड़े हब के रूप में उभर रहा है. 200-500 MW तक की क्षमता की मांग गल्फ देशों से भारत की ओर शिफ्ट हो रही है, जिससे ग्लोबल क्लाउड कंपनियां यहां निवेश बढ़ा रही हैं. Google Cloud, Amazon Web Services और Microsoft Azure जैसी कंपनियां को-लोकेशन डील्स पर फोकस कर रही हैं. साथ ही GPU की मांग में भी तेज उछाल देखा जा रहा है.

डेटा सेंटर Image Credit: Canva/ Money9

Data Centre India: पश्चिम एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल टेंशन का असर अब टेक्नोलॉजी और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर भी साफ दिखने लगा है. इस अस्थिरता के बीच भारत एक बड़े प्लेयर के रूप में उभर रहा है, जहां डेटा सेंटर की मांग तेजी से बढ़ रही है. इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार, 200 से 500 मेगावाट तक की डेटा सेंटर डिमांड अब गल्फ देशों से भारत की ओर शिफ्ट हो रही है. इसका कारण दुबई जैसे हब से कंपनियों द्वारा अपने वर्कलोड और इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित और स्थिर लोकेशन पर स्थानांतरित करना है.

ग्लोबल क्लाउड कंपनियों का भारत पर बढ़ा फोकस

बिजनेस लाइन ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि Google Cloud, Amazon Web Services और Microsoft Azure जैसी बड़ी क्लाउड कंपनियां भारत में अपने डेटा सेंटर विस्तार को लेकर एक्टिव हो गई हैं. ये कंपनियां बड़े स्तर पर को-लोकेशन डील्स की तलाश कर रही हैं.

जानकारी के मुताबिक, Amazon Web Services देश के CtrlS, Sify, NTT, CapitaLand और Airtel की Nxtra जैसी कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है, ताकि अपने Public Cloud Region के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा सके. इससे भारत में क्लाउड इकोसिस्टम को बड़ा बूस्ट मिलने की संभावना है.

डेटा सेंटर क्षमता की मांग में तेज उछाल

Yotta Data Services के Co-Founder और CEO सुनील गुप्ता ने बिजनेस लाइन को बताया कि पिछले 3-4 हफ्तों में डेटा सेंटर क्षमता की मांग में जबरदस्त उछाल आया है. खासकर पश्चिम एशिया से बड़े ऑर्डर तेजी से क्लोज हो रहे हैं. यह डिमांड इतनी बड़ी है कि कंपनियां 60 डॉलर प्रति किलोवाट तक की कीमत पर भी डील करने को तैयार हैं. चूंकि डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर लंबी अवधि के लिए बनाया जाता है, इसलिए ये कॉन्ट्रैक्ट भारत के लिए लॉन्ग टर्म फायदे का संकेत देते हैं.

कम लागत बनी भारत की सबसे बड़ी ताकत

एक्सपर्ट का मानना है कि लागत के मामले में भारत को बड़ा फायदा मिल रहा है. RackBank के CEO के अनुसार, भारत में 100 MW AI डेटा सेंटर बनाने की लागत लगभग 5-6 मिलियन डॉलर है, जबकि सिंगापुर या अन्य APAC क्षेत्रों में यही लागत 12-14 मिलियन डॉलर तक पहुंच जाती है. यानी समान लागत में भारत दोगुनी क्षमता प्रदान करता है, जो ग्लोबल कंपनियों को आकर्षित कर रहा है.

GPU की बढ़ती मांग

डेटा सेंटर के साथ-साथ GPU की मांग भी तेजी से बढ़ी है. Yotta को अमेरिका की कंपनियों से बड़े स्तर पर GPU ऑर्डर मिले हैं, जिनकी वैल्यू 16 मिलियन डॉलर से लेकर 1.3 बिलियन डॉलर तक है. हालांकि, भारत में GPU की उपलब्धता को लेकर चिंता भी सामने आई है. इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि मौजूदा सप्लाई भारतीय जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं है, जिससे शॉर्ट टर्म में GPU की कमी देखने को मिल सकती है.

भारत बन सकता है रीजनल हब

यह ट्रेंड भारत को पश्चिम एशिया और एशिया के बीच एक प्रमुख डेटा सेंटर हब बना सकता है. भारत का Public Cloud मार्केट 2024 से 2029 के बीच करीब 22 फीसदी CAGR से बढ़ने का अनुमान है. 2025 तक यह मार्केट 14.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है और 2029 तक 32-35 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है.

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