पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से किसे कितना फायदा? केंद्र और राज्यों के राजस्व का ये है पूरा हिसाब; जानें टॉप पर कौन शामिल

पेट्रोल और डीजल पर लगने वाला टैक्स भारत में सरकारों के लिए आय का बड़ा स्रोत है. हर लीटर पर केंद्र एक्साइज ड्यूटी और राज्य VAT के जरिए राजस्व जुटाते हैं, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होती है. हालिया आंकड़ों के अनुसार, केंद्र और राज्यों दोनों की आय में फ्यूल टैक्स की अहम भूमिका बनी हुई है. महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्य इस मामले में आगे हैं.

पेट्रोल-डीजल Image Credit: @AI

Fuel tax revenue India: पेट्रोलऔर डीजल की कीमत में शामिल टैक्स सरकारों के लिए आय का बड़ा जरिया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इससे केंद्र और राज्य सरकारें आखिर कितना राजस्व जुटाती हैं? हर लीटर पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी के जरिए कमाई करती है, जबकि राज्य सरकारें VAT लगाकर अपनी हिस्सेदारी लेती हैं. यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमत भी अलग होती है. कुछ राज्य इस टैक्स से सबसे ज्यादा राजस्व जुटाते हैं और टॉप पर बने हुए हैं. आइए समझते हैं कि पेट्रोल और डीजल से किसे कितना फायदा होता है और कौन सा राज्य सबसे आगे है.

हाल ही में घटी थी एक्साइज ड्यूटी

हाल ही में केंद्र सरकार ने तेल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती की थी. ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जिसका असर भारत पर भी पड़ा. ऐसे में सरकार ने राहत देने के लिए पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये कर दिया, जबकि डीजल पर 10 रुपये की ड्यूटी को घटाकर शून्य कर दिया. इस फैसले का उद्देश्य आम लोगों पर बढ़ते ईंधन खर्च का बोझ कम करना और बाजार को स्थिर बनाए रखना था.

केंद्र सरकार की कितनी होती है आय

अब उस अहम सवाल पर नजर डालते हैं कि पेट्रोल और डीजल से केंद्र सरकार को आखिर कितनी आय होती है. साल 2023 में संसद में इस विषय पर प्रश्न उठाया गया था, जिसके जवाब में सरकार ने विस्तृत जानकारी दी थी. सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2022 के शुरुआती 9 महीनों के दौरान पेट्रोलियम सेक्टर से कुल लगभग 5.45 लाख करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था. इस कुल राजस्व में से करीब 3.08 लाख करोड़ रुपये केंद्र सरकार के हिस्से में आए थे, जबकि बाकी राशि राज्य सरकारों को मिली थी. इससे साफ होता है कि पेट्रोल और डीजल सरकार के लिए राजस्व का एक बेहद महत्वपूर्ण स्रोत हैं, जो बजट को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं.

राज्यों की कितनी होती है आय

पेट्रोल और डीजल पर VAT के जरिए राज्यों की आय 2024-25 और 2025-26 के पहले छह महीनों में भी मजबूत बनी हुई है. आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में सभी राज्यों की कुल आय लगभग 3,02,058 करोड़ रुपये रही है. वहीं 2025-26 के पहले आधे साल (H1) में ही राज्यों ने करीब 1,46,892 करोड़ रुपये का राजस्व जुटा लिया है.

राज्यों में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और गुजरात जैसे बड़े राज्य सबसे ज्यादा राजस्व जुटाने वालों में शामिल हैं. 2024-25 में महाराष्ट्र ने करीब 36,992 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश ने 31,214 करोड़ रुपये और तमिलनाडु ने 24,861 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया. वहीं 2025-26 के पहले छह महीनों में भी यही राज्य टॉप पर बने हुए हैं.

राज्य2024-25 (P)H1 2025-26 (P)
महाराष्ट्र36,992.218,106.0
उत्तर प्रदेश31,214.114,482.5
तमिलनाडु24,861.312,665.1
गुजरात24,586.212,156.8
कर्नाटक23,427.612,875.6
राजस्थान18,873.89,457.9
आंध्र प्रदेश15,970.48,132.4
तेलंगाना15,515.88,140.8
मध्य प्रदेश15,329.47,285.8
पश्चिम बंगाल12,979.05,863.5
केरल12,281.25,432.5
बिहार10,275.43,273.3
हरियाणा10,087.45,233.1
ओडिशा9,759.34,138.0
पंजाब8,178.94,258.9
छत्तीसगढ़6,810.62,941.2
असम6,057.73,086.1
झारखंड5,726.02,756.4
दिल्ली4,619.32,082.2
उत्तराखंड2,159.51,105.4
जम्मू और कश्मीर1,675.1838.3
हिमाचल प्रदेश1,615.9824.5
गोवा1,274.1626.9
(राशि: करोड़ रुपये में)

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