अनिल अंबानी फिर जांच के घेरे में! 1085 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामले में CBI की FIR, बैंकों को गुमराह करने का आरोप
केंद्रीय जांच ब्यूरो ने उद्योगपति अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज की है. यह मामला 1,085 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज से जुड़ा बताया जा रहा है. शिकायत पंजाब नेशनल बैंक की ओर से की गई है, जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हो गई है.
Anil Ambani bank fraud case: देश के बड़े उद्योगपतियों में शामिल अनिल अंबानी जांच एजेंसियों की रडार में लगातार बने हुए हैं. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कथित बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. मामला 1,085 करोड़ रुपये से अधिक के कथित लोन घोटाले से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि बैंकों से लिया गया कर्ज तय शर्तों के मुताबिक इस्तेमाल नहीं किया गया और इससे बैंकों को भारी नुकसान हुआ. यह कार्रवाई पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शिकायत के आधार पर की गई है.
PNB की शिकायत पर CBI ने दर्ज की एफआईआर
CBI ने उद्योगपति अनिल अंबानी, उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और कंपनी की पूर्व निदेशक मंजरी अशोक काकर के खिलाफ मामला दर्ज किया है. एजेंसी ने 5 मार्च को एफआईआर दर्ज की. यह कार्रवाई पंजाब नेशनल बैंक की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर हुई, जिसमें आरोप लगाया गया कि कंपनी ने बैंकों को धोखा देकर भारी कर्ज लिया और बाद में उसे चुकाने में विफल रही.
शिकायत के अनुसार, यह मामला 2013 से 2017 के बीच का है. आरोप है कि इस अवधि में बैंकों को गुमराह कर रिलायंस कम्युनिकेशंस के लिए क्रेडिट सुविधाएं मंजूर कराई गईं. इस पूरे मामले में बैंकों को करीब 1,085.19 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात कही गई है. इसमें 621.39 करोड़ रुपये का नुकसान पंजाब नेशनल बैंक को और 463.80 करोड़ रुपये का नुकसान यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (जो अब PNB में विलय हो चुका है) को हुआ.
फॉरेंसिक ऑडिट में फंड डायवर्जन के संकेत
शिकायत में बताया गया है कि कंपनी ने कर्ज की शर्तों का पालन नहीं किया और वित्तीय अनुशासन भी बनाए नहीं रखा. इसके बाद 2017 में इन लोन खातों को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित कर दिया गया. बैंक की ओर से यह भी बताया गया कि बाद में मामले की फॉरेंसिक ऑडिट कराई गई.
BDO इंडिया एलएलपी द्वारा किए गए फॉरेंसिक ऑडिट में कथित तौर पर यह सामने आया कि बैंक से मिले फंड का कुछ हिस्सा अन्य जगहों पर ट्रांसफर किया गया और संबंधित पक्षों के साथ लेनदेन भी हुआ. इन निष्कर्षों के बाद फरवरी 2021 में खाते को फ्रॉड घोषित कर दिया गया.
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CBI ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 120B (आपराधिक साजिश) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत केस दर्ज किया है. इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधान भी लगाए गए हैं. एफआईआर में कुछ अज्ञात लोगों और अज्ञात सरकारी अधिकारियों को भी आरोपी के रूप में शामिल किया गया है.
