भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार खरीदार, चीन-पाक टेंशन के बीच बढ़ा रक्षा खर्च: SIPRI रिपोर्ट
SIPRI की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2021-2025 के दौरान भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक रहा, जिसकी वैश्विक आयात में हिस्सेदारी 8.2 फीसदी रही. रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन और पाकिस्तान के साथ सुरक्षा चुनौतियों के कारण भारत अपनी सैन्य क्षमता मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर हथियार खरीद रहा है, हालांकि घरेलू रक्षा उत्पादन बढ़ने से आयात में हल्की कमी भी आई है.
Second Largest Arms Import India: वैश्विक सुरक्षा माहौल में बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय संघर्षों के बीच दुनिया में हथियारों की मांग लगातार बनी हुई है. इसी संदर्भ में स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि 2021 से 2025 के बीच भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक देश बना रहा. रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में वैश्विक हथियार आयात में भारत की हिस्सेदारी करीब 8.2 फीसदी रही. भारत की रक्षा खरीद का बड़ा कारण चीन और पाकिस्तान के साथ जारी सुरक्षा चुनौतियां हैं, जिनके चलते देश अपनी सैन्य क्षमता को लगातार मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहा है.
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक रहा भारत
SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक 2021–25 की अवधि में भारत वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा आयातक रहा. भारत की रक्षा जरूरतों पर सबसे ज्यादा प्रभाव चीन के साथ सीमा विवाद और पाकिस्तान के साथ लंबे समय से चले आ रहे तनाव का है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन तनावों के कारण कई बार सैन्य टकराव की स्थिति पैदा हुई है. उदाहरण के तौर पर मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सीमित सैन्य झड़प में दोनों देशों ने उन हथियारों का इस्तेमाल किया था जिन्हें विदेशों से आयात किया गया था.
पिछले दशक में आयात में थोड़ी कमी
हालांकि रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत के हथियार आयात में हल्की कमी आई है. 2016–20 की अवधि की तुलना में 2021–25 के दौरान भारत के हथियार आयात में लगभग 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. इसका एक बड़ा कारण भारत की बढ़ती घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता है. भारत अब कई आधुनिक रक्षा प्रणालियों को खुद डिजाइन और विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है. हालांकि रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि घरेलू रक्षा उत्पादन में अक्सर तकनीकी चुनौतियों और देरी की समस्या सामने आती है, जिसके कारण कई अहम हथियार प्रणालियों के लिए भारत को अभी भी विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहना पड़ता है.
विदेशी हथियारों पर अब भी निर्भरता
भारत के हालिया रक्षा सौदों से यह साफ है कि कई एडवांस सैन्य प्रणालियों के लिए विदेशों से खरीद अभी भी जरूरी बनी हुई है. रिपोर्ट के अनुसार भारत ने फ्रांस से लगभग 140 लड़ाकू विमान खरीदने की योजना बनाई है, जबकि जर्मनी से छह आधुनिक पनडुब्बियों की खरीद की भी योजना है. इन सौदों से संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में भी भारत का रक्षा आयात पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है और कई अहम तकनीकों के लिए विदेशों के साथ सहयोग जारी रहेगा.
रूस से घटा, पश्चिमी देशों से बढ़ा सहयोग
पिछले दशक में भारत की रक्षा खरीद में एक अहम बदलाव भी देखने को मिला है. परंपरागत रूप से भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता रूस रहा है, लेकिन अब यह निर्भरता धीरे-धीरे कम हो रही है. रिपोर्ट के अनुसार 2011–15 के दौरान भारत के कुल हथियार आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग 70 फीसदी थी, जो 2016–20 में घटकर 51 फीसदी और 2021–25 में लगभग 40 फीसदी रह गई. इसके साथ ही भारत ने फ्रांस, इजराइल और अमेरिका जैसे देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाया है और कई आधुनिक सैन्य प्रणालियों की खरीद इन देशों से की है.
पाकिस्तान की हथियार खरीद में चीन का दबदबा
दूसरी ओर, पाकिस्तान की रक्षा खरीद लगभग पूरी तरह चीन पर निर्भर होती जा रही है. SIPRI रिपोर्ट के मुताबिक 2021–25 के दौरान पाकिस्तान के करीब 80 फीसदी हथियार आयात चीन से आए. यह आंकड़ा पहले की तुलना में और बढ़ा है. 2016–20 के दौरान चीन की हिस्सेदारी लगभग 73 फीसदी थी. रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान इस अवधि में दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा हथियार आयातक बन गया है. 2016–20 की तुलना में उसके हथियार आयात में करीब 66 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और वैश्विक आयात में उसकी हिस्सेदारी 4.2 फीसदी तक पहुंच गई. SIPRI ने यह भी बताया कि चीन ने 2021–25 के दौरान कुल 47 देशों को हथियार निर्यात किए, लेकिन उसके कुल निर्यात का 61 फीसदी हिस्सा सिर्फ पाकिस्तान को गया.
कौन से देश सबसे बड़े आयातक?
रिपोर्ट के अनुसार 2021–25 के दौरान दुनिया के पांच सबसे बड़े हथियार आयातक देश थे-
- यूक्रेन
- भारत
- सऊदी अरब
- कतर
- पाकिस्तान
इन पांच देशों ने मिलकर वैश्विक हथियार आयात का करीब 35 फीसदी हिस्सा अपने नाम किया.
सबसे बड़ा निर्यातक कौन?
वहीं, दूसरी ओर वैश्विक हथियार निर्यात की बात करें तो अमेरिका अब भी दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक बना हुआ है. 2021–25 के दौरान वैश्विक हथियार निर्यात में उसकी हिस्सेदारी लगभग 42 फीसदी रही. इसके बाद फ्रांस 9.8 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि रूस 6.8 फीसदी हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर रहा. हालांकि रूस की वैश्विक हिस्सेदारी में तेज गिरावट देखने को मिली है. 2016–20 के दौरान रूस का वैश्विक हथियार निर्यात में 21 फीसदी हिस्सा था, जो अब घटकर 6.8 फीसदी रह गया है. इसकी एक वजह रूस के पारंपरिक ग्राहकों जैसे अल्जीरिया, चीन और मिस्र को होने वाले निर्यात में कमी बताई गई है.
यूरोप बना सबसे बड़ा हथियार आयात क्षेत्र
SIPRI रिपोर्ट का एक और अहम निष्कर्ष यह है कि 1960 के दशक के बाद पहली बार यूरोप वैश्विक हथियार आयात का सबसे बड़ा क्षेत्र बन गया है. यूक्रेन युद्ध और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं के कारण यूरोप की रक्षा खरीद में तेजी आई है. रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक हथियार आयात में यूरोप की हिस्सेदारी 33 फीसदी, एशिया और ओशिनिया की 31 फीसदी और पश्चिम एशिया की 26 फीसदी रही.
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