2000 रुपये तक के ही UPI ट्रांजैक्शन रहेंगे फ्री, अधिक रकम वाले पेमेंट पर चार्ज लगाने की तैयारी! समझें पूरा मामला
हालांकि, इस रकम से अधिक के ट्रांजैक्शन पर लगने वाले चार्ज के बारे में नोटिफिकेशन में कुछ नहीं कहा गया. इससे अप्रत्यक्ष रूप से अधिक रकम वाले UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का रास्ता खुल गया है.
Highlights
- UPI प्लेटफॉर्म ने FY26 में 314.2 लाख करोड़ रुपये के 241.6 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए.
- प्लेटफॉर्म ने अगस्त 2026 में 29.8 लाख करोड़ रुपये के 24.5 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए.
- बिल के जरिए 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' में बदलाव किया गया.
केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि वह ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स’ की धारा 10A के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर रही है. सरकार ने साफ किया कि बैंक 2,000 रुपये तक के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांजैक्शन या RuPay डेबिट कार्ड पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगा सकते. वित्त मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन में कहा कि कोई भी बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर, बताए गए इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों का इस्तेमाल करके पेमेंट करने या लेने वाले व्यक्ति पर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कोई चार्ज नहीं लगाएगा.
MDR लागू करने का रास्ता खुला
हालांकि, इस रकम से अधिक के ट्रांजैक्शन पर लगने वाले चार्ज के बारे में नोटिफिकेशन में कुछ नहीं कहा गया. इससे अप्रत्यक्ष रूप से अधिक रकम वाले UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का रास्ता खुल गया है. बताए गए इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों में RuPay वाले डेबिट कार्ड और 2,000 रुपये तक के UPI ट्रांजैक्शन शामिल थे. RuPay और UPI, दोनों को नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) मैनेज करता है.
MDR चार्ज
खास बात यह है कि यह कदम लोकसभा द्वारा 6 अगस्त को ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ पास करने के बाद उठाया गया है. इस बिल के जरिए ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007’ में बदलाव किया गया. इस बिल से सरकार को यह तय करने की इजाजत मिल गई कि किन डिजिटल पेमेंट तरीकों पर फीस लगाई जा सकती है.
सरकार प्लेटफॉर्म के अगले चरण के विकास के लिए एक टिकाऊ फंडिंग मॉडल सुनिश्चित करने के मकसद से मर्चेंट चार्ज लगाने में लचीलापन चाहती है और डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री की लंबे समय से चली आ रही मांग को भी पूरा करना चाहती है.
किस पर लागू होगा MDR?
अगस्त में सोशल मीडिया पर जारी स्पष्टीकरण में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने कहा कि डिजिटल ट्रांजैक्शन पर MDR मर्चेंट्स पर लागू होता है, ग्राहकों पर नहीं. उन्होंने आगे कहा कि इस चार्ज से बैंकों और फिनटेक कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर और सिक्योरिटी में ज्यादा निवेश करने में मदद मिलेगी.
UPI ट्रांजैक्शन पर लगने वाले चार्ज से MDR का क्या संबंध है?
इस कानून ने सेक्शन 10A के तहत जीरो MDR वाले नियम को खत्म करने का रास्ता साफ कर दिया और बैंकों व पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स (PSPs) को ज्यादा वैल्यू वाले UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने की इजाजत दे दी.
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा रेगुलेट किया जाने वाला MDR वह फीस है जो बिजनेस, ग्राहकों द्वारा किए गए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने के लिए बैंकों और PSPs को देते हैं. 2020 से, UPI और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन के लिए यह 0% रहा है, क्योंकि सरकार डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना चाहती थी और उसने ग्राहकों व मर्चेंट के लिए कोई MDR न रखने का नियम बनाया था.
किस तरह यह काम करता है?
असल में, यह इस तरह काम करता है. कोई ग्राहक क्रेडिट या डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करके किसी चीज के लिए 1,000 रुपये का पेमेंट करता है. इसमें से एक छोटा हिस्सा काटकर दोनों तरफ के बैंकों में बांट दिया जाता है, जबकि मर्चेंट को नेट रकम मिलती है. अभी, UPI ट्रांजैक्शन के लिए मर्चेंट को ट्रांजैक्शन की पूरी रकम मिलती है.
अभी कौन उठाता है खर्च?
अभी, ऐसे ट्रांजैक्शन और UPI प्लेटफॉर्म को बनाए रखने का खर्च बैंक, NPCI और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर उठाते हैं. सरकार अभी 2,000 रुपये तक के पेमेंट पर इन कंपनियों के खर्च का कुछ हिस्सा सब्सिडी के तौर पर देती है. 2026-27 के बजट में सब्सिडी के तौर पर 2,000 करोड़ रुपये देने का अनुमान लगाया गया था, जबकि 2025-2026 में 2,196.21 करोड़ रुपये और 2024-25 में 1,922.77 करोड़ रुपये दिए गए थे.
अभी UPI चार्ज को लेकर चर्चा क्यों हो रही है?
PCI ने अपने FAQs में कहा है कि UPI एक नए पेमेंट प्लेटफॉर्म से दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम के तौर पर विकसित हुआ है. इसमें कहा गया है, ‘जैसे-जैसे इकोसिस्टम बढ़ रहा है, इस बात पर चर्चा हो रही है कि उस इंफ्रास्ट्रक्चर को लंबे समय तक कैसे सपोर्ट किया जाए जो हर महीने अरबों सुरक्षित ट्रांजैक्शन को मुमकिन बनाता है, और साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कंज्यूमर और छोटे व्यापारी सुरक्षित रहें.’
इसमें आगे कहा गया, ‘जैसे-जैसे ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़ रही है, सुरक्षा, मजबूती, इनोवेशन, धोखाधड़ी से बचाव और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश जरूरी रहेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि UPI आने वाले साल में भी कंज्यूमर और बिजनेस को भरोसेमंद सेवा देता रहे.’
कितना चार्ज लागू किया जा सकता है?
इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, अब सरकार और NPCI से UPI ट्रांजैक्शन पर लगने वाली खास दर या फीस के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है. कई जानकारों को उम्मीद है कि अलग-अलग रकम वाले ट्रांजैक्शन के लिए 0.3-0.5% का टियर्ड चार्ज (अलग-अलग स्तरों पर चार्ज) लागू किया जा सकता है.
UPI प्लेटफॉर्म ने FY26 में 314.2 लाख करोड़ रुपये के 241.6 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए, जो पिछले साल के मुकाबले संख्या के हिसाब से 30% और ट्रांजैक्शन की वैल्यू के हिसाब से 21% अधिक थे. NPCI के डेटा के मुताबिक, अगस्त 2026 तक UPI के 55 करोड़ से ज्यादा यूजर थे. प्लेटफॉर्म ने अगस्त 2026 में 29.8 लाख करोड़ रुपये के 24.5 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए, जो पिछले साल के मुकाबले संख्या में 22% और वैल्यू में 20% की बढ़ोतरी थी.
सस्टेनेबल फंडिंग मैकेनिज्म की थी मांग
मार्च 2026 में, वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने UPI के लिए एक सस्टेनेबल फंडिंग मैकेनिज्म (लंबे समय तक चलने वाला फंडिंग सिस्टम) की मांग की थी, क्योंकि जीरो-MDR फ्रेमवर्क लंबे समय में आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं है. पैनल ने कहा कि आने वाले साल में UPI के 10 गुना बढ़ने, 60 करोड़ नए यूजर जुड़ने और हर महीने 100-150 अरब ट्रांजैक्शन होने की क्षमता है.
इसके लिए टेक्नोलॉजी, मजबूती और मर्चेंट एक्सेप्टेंस इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की जरूरत होगी, जिसे सिर्फ सरकारी इंसेंटिव से पूरा नहीं किया जा सकता. साथ ही, कमाई का कोई ठोस जरिया न होने की वजह से बैंक और PSPs इनोवेशन, साइबर सिक्योरिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश नहीं कर पा रहे थे, जो UPI के अगले चरण के विकास के लिए जरूरी है.
समिति ने गौर किया कि सरकारी योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि, इंडस्ट्री की लागत का सिर्फ 11% और इंडस्ट्री द्वारा इकट्ठा किए गए संभावित MDR का 14% है.
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