चीन ने बढ़ाया रूसी तेल का आयात, भारतीय रिफाइनरों की बढ़ी मुश्किल

चीन ने रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है, जिससे भारत के लिए सस्ते रूसी क्रूड की उपलब्धता घट रही है. अगस्त में भारत का रूसी तेल आयात 18.7 लाख बैरल प्रतिदिन तक गिर गया. इससे भारतीय रिफाइनरों पर दबाव बढ़ सकता है.

रूसी क्रूड

Highlights

  • चीन ने रूसी तेल खरीद बढ़ाई, भारत की मुश्किलें बढ़ीं
  • अगस्त में भारत का रूसी तेल आयात घटकर 18.7 लाख बैरल
  • सस्ते रूसी क्रूड की उपलब्धता घटने से रिफाइनरों पर दबाव

रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने के मामले में चीन एक बार फिर तेजी दिखा रहा है. चीन के रिफाइनरों ने रूसी क्रूड की खरीद बढ़ा दी है. इससे भारत के रिफाइनरों के लिए सस्ता रूसी तेल हासिल करना मुश्किल हो सकता है. खासकर ऐसे समय में जब ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पहले ही दबाव में है.

चीन खरीद रहा है ज्यादा रूसी कच्चा तेल

अगस्त 2026 में चीन का समुद्र के रास्ते रूसी कच्चे तेल का आयात करीब 12.5 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है. यह जुलाई के मुकाबले थोड़ा कम है, लेकिन फिर भी अप्रैल के बाद के सबसे ऊंचे स्तरों में शामिल है.

चीन की बढ़ती खरीद का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है. दोनों देश रूस के प्रमुख तेल खरीदार हैं और रूसी बंदरगाहों से निकलने वाले सस्ते तेल के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं.

भारत का रूसी तेल आयात घटा

रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात अगस्त में घटकर करीब 18.7 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है. जून और जुलाई में यह आंकड़ा 27 लाख बैरल प्रतिदिन से ज्यादा था. यानी कुछ ही समय में भारत की रूसी तेल खरीद में काफी कमी आई है.

भारत के लिए रूसी तेल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आम तौर पर अन्य स्रोतों के मुकाबले छूट पर मिलता है. सस्ता क्रूड मिलने से भारतीय रिफाइनरियों को ईंधन बनाने की लागत कम रखने और निर्यात से बेहतर मार्जिन कमाने में मदद मिलती है.

ईरान युद्ध ने बढ़ाई परेशानी

मौजूदा स्थिति की एक बड़ी वजह मध्य-पूर्व में चल रहा ईरान युद्ध है. इस संघर्ष ने तेल की वैश्विक आपूर्ति और समुद्री रास्तों पर दबाव बढ़ाया है. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास की स्थिति ने एशियाई देशों के लिए कच्चे तेल की सप्लाई को चुनौतीपूर्ण बनाया है.

भारत ने इस दौरान रूसी तेल पर अपनी निर्भरता बढ़ाई थी. जुलाई में रूस भारत के कुल क्रूड आयात का रिकॉर्ड 50.83% हिस्सा दे रहा था और आयात करीब 24.7 लाख बैरल प्रतिदिन रहा.

चीन की बढ़ती मांग से क्या होगा?

चीन अगर रूसी तेल की खरीद लगातार बढ़ाता है तो भारत के लिए एशियाई बंदरगाहों से आने वाले सस्ते रूसी क्रूड की उपलब्धता घट सकती है. इससे भारतीय रिफाइनरों को दूसरे देशों से महंगा तेल खरीदना पड़ सकता है.

हालांकि, भारत ने तेल की सप्लाई बनाए रखने के लिए दूसरे विकल्प भी तलाशने शुरू कर दिए हैं. देश ने वेनेजुएला, ब्राजील और अफ्रीकी देशों से खरीद बढ़ाई है. अप्रैल से जुलाई के बीच लैटिन अमेरिकी देशों की भारत के क्रूड आयात में हिस्सेदारी बढ़कर 12.7% हो गई, जबकि मध्य-पूर्व की हिस्सेदारी घटकर करीब 30% रह गई.

भारतीय रिफाइनरों पर पड़ेगा दबाव

रूसी क्रूड की उपलब्धता कम होने और उसकी छूट घटने से भारतीय रिफाइनरों की लागत बढ़ सकती है. हालांकि, दूसरी तरफ एशिया में ईंधन की कमी और मजबूत मांग के कारण रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के मार्जिन ऊंचे बने हुए हैं. भारतीय रिफाइनर इस स्थिति का फायदा उठाकर पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात बढ़ा रहे हैं.

कुल मिलाकर, चीन की बढ़ती रूसी तेल खरीद भारत के लिए एक नई चुनौती है. आने वाले समय में भारतीय रिफाइनरों को सस्ते रूसी क्रूड और दूसरे स्रोतों के बीच संतुलन बनाना होगा. साथ ही, वैश्विक तेल कीमतों और युद्ध की स्थिति पर भी उनकी लागत और मुनाफा काफी हद तक निर्भर करेगा.

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