क्रूड ऑयल संकट के बीच महंगा हुआ रूसी तेल, 425% बढ़ा प्रीमियम; फिर भी भारत ने बढ़ाई हिस्सेदारी
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की रूस पर तेल निर्भरता और बढ़ गई है. अप्रैल 2026 में भारत के तेल आयात बिल में रूस की हिस्सेदारी 37.7 फीसदी पहुंच गई, जो 11 महीने का उच्च स्तर है. वहीं रूसी तेल पर चुकाया जाने वाला प्रीमियम 425 फीसदी बढ़कर 77.8 डॉलर प्रति टन हो गया, जिससे भारत का कुल आयात बिल भी तेजी से बढ़ा.
Russian Oil Imports: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के तेल आयात पर भी साफ दिखाई देने लगा है. एक तरफ भारत रूस से ज्यादा तेल खरीद रहा है, तो दूसरी तरफ इसके लिए पहले से कहीं ज्यादा कीमत भी चुकानी पड़ रही है. अप्रैल 2026 के आंकड़े बताते हैं कि रूस पर भारत की निर्भरता और बढ़ी है, जबकि अमेरिकी तेल की हिस्सेदारी घटती जा रही है.
रूस की हिस्सेदारी 11 महीने के उच्च स्तर पर
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2026 में भारत ने रूस से करीब 67 लाख टन कच्चा तेल खरीदा, जो मार्च के मुकाबले 27 फीसदी ज्यादा है. मात्रा के हिसाब से कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 34.3 फीसदी रही.
वहीं कीमत के आधार पर देखें तो भारत के कुल तेल आयात बिल में रूस की हिस्सेदारी बढ़कर 37.7% पर पहुंच गई. यह पिछले 11 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचने के साथ भारत की रूस पर निर्भरता लगातार बढ़ती दिख रही है.
डिस्काउंट खत्म, अब प्रीमियम पर मिल रहा रूसी तेल
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुछ समय पहले तक रूस भारत को रियायती दरों पर तेल बेच रहा था. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. अप्रैल 2026 में भारत ने रूस से खरीदे गए तेल के लिए औसतन 864.9 डॉलर प्रति टन का भुगतान किया, जबकि सभी देशों से आयातित तेल की औसत कीमत 787.1 डॉलर प्रति टन रही.
इसका मतलब है कि भारत ने रूसी तेल के लिए 77.8 डॉलर प्रति टन का एक्स्ट्रा प्रीमियम चुकाया. मार्च 2026 में यह प्रीमियम केवल 14.8 डॉलर प्रति टन था यानी सिर्फ एक महीने में प्रीमियम में 425% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
अप्रैल में बढ़ा तेल आयात, बिल में भी आया बड़ा उछाल
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 में भारत ने कुल 195.3 लाख टन कच्चे तेल का आयात किया. मार्च 2026 में यह आंकड़ा 158.5 लाख टन था. यानी एक महीने में तेल आयात की मात्रा में 23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
हालांकि तेल की कीमतों में तेजी का असर आयात बिल पर ज्यादा दिखा। अप्रैल में भारत का कुल तेल आयात बिल 61.3% बढ़कर 15.4 अरब डॉलर पहुंच गया। यानी भारत ने ज्यादा तेल तो खरीदा ही, साथ ही उसके लिए ज्यादा रकम भी चुकाई।
अमेरिका से तेल खरीद में आई कमी
जहां रूस की हिस्सेदारी बढ़ी है, वहीं अमेरिका से तेल आयात में गिरावट देखने को मिली है. अप्रैल 2026 में भारत के कुल तेल आयात बिल में अमेरिका की हिस्सेदारी सिर्फ 2.9 फीसदी रही, जो आठ महीने का सबसे निचला स्तर है.
मात्रा के हिसाब से भी अमेरिकी तेल की हिस्सेदारी 3.8 फीसदी रही, जो पिछले आठ महीनों का सबसे कम स्तर है. इससे साफ है कि भारत की ऊर्जा जरूरतों में रूस की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है.
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