Debt Trap: कर्ज के जाल में फंसे भारतीय, क्या है वजह? RBI के पास क्या हैं ऑप्शन?
यह बात अब साफ दिख रही है कि भारत में कर्ज लेने का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है और कई लोग Debt Trap यानी कर्ज के जाल में फंस रहे हैं. इसकी बड़ी वजह बढ़ता कंज्यूमर क्रेडिट, आसान लोन उपलब्धता, Buy Now Pay Later मॉडल, क्रेडिट कार्ड खर्च और EMI-आधारित लाइफस्टाइल मानी जा रही है. कई मामलों में लोगों की आय से ज्यादा कर्ज का बोझ बढ़ जाता है जिससे समय पर भुगतान मुश्किल हो जाता है और ब्याज का बोझ बढ़ते-बढ़ते Debt Trap में बदल जाता है. यह स्थिति सिर्फ व्यक्तिगत स्तर पर नहीं बल्कि बैंकिंग सिस्टम और अर्थव्यवस्था के लिए भी जोखिम पैदा करती है. ऐसे में सवाल उठता है कि RBI के पास क्या ऑप्शन हैं. इसके तहत RBI क्रेडिट ग्रोथ को मॉनिटर करता है, NBFC पर सख्ती बढ़ा सकता है, BNPL मॉडल पर रेग्युलेशन टाइट कर सकता है और बैंकों को रिस्क-आधारित लेंडिंग के लिए निर्देश दे सकता है. साथ ही Debt Counselling और फाइनेंशियल लिट्रेसी को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा सकता है.
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