डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में बड़ी बढ़ोतरी, ATF भी महंगा; जानें क्या होगा असर
केंद्र सरकार ने डीजल और ATF पर टैक्स बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने डीजल का निर्यात शुल्क 21.5 से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. हाई स्पीड डीजल पर भी एक्साइज ड्यूटी और सेस बढ़ाया गया है. ATF पर ड्यूटी 42 रुपये प्रति लीटर हो गई है.

Diesel Export Duty: केंद्र सरकार ने ईंधन पर टैक्स को लेकर बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने डीजल के निर्यात शुल्क में भारी बढ़ोतरी कर दी है. इससे पहले जहां यह 21.5 रुपये प्रति लीटर था अब इसे बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. इसके साथ ही हाई स्पीड डीजल और ATF पर भी टैक्स बढ़ाया गया है. यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है. माना जा रहा है कि सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए यह कदम उठा रही है.
डीजल निर्यात शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी
सरकार ने डीजल के निर्यात शुल्क में एक साथ बड़ा इजाफा किया है. अब यह 55.5 रुपये प्रति लीटर हो गया है. पहले यह काफी कम था जिससे निर्यात सस्ता पड़ता था. इस बढ़ोतरी से निर्यात पर असर पड़ सकता है. कंपनियों के लिए लागत बढ़ने की संभावना है. इससे घरेलू बाजार में भी कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
हाई स्पीड डीजल पर बढ़ा टैक्स बोझ
हाई स्पीड डीजल पर भी टैक्स बढ़ा दिया गया है. स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी को 24 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. इसके अलावा रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को 36 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. इससे कुल टैक्स बोझ बढ़ गया है. इसका असर ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर पड़ सकता है. आने वाले समय में लागत बढ़ने की आशंका है.
ATF पर भी बढ़ी ड्यूटी
एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर भी सरकार ने टैक्स बढ़ाया है. पहले यह 29.5 रुपये प्रति लीटर था जिसे अब 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. इससे एयरलाइंस कंपनियों की लागत बढ़ सकती है. हवाई यात्रा महंगी होने की संभावना भी जताई जा रही है. हालांकि इसका पूरा असर आगे चलकर साफ होगा.
पेट्रोल पर नहीं हुआ कोई बदलाव
सरकार ने पेट्रोल पर किसी तरह का बदलाव नहीं किया है. पेट्रोल पर निर्यात शुल्क अभी भी शून्य रखा गया है. इसका मतलब है कि पेट्रोल की कीमतों पर फिलहाल कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा. यह फैसला कंज्यूमर के लिए राहत की बात हो सकती है. सरकार ने अलग- अलग ईंधनों के लिए अलग नीति अपनाई है.
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राजस्व बढ़ाने की कोशिश
यह फैसला वित्त मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन के जरिए लागू किया गया है. सरकार पर बढ़ते वित्तीय दबाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. इससे सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि इसका असर उद्योग और आम लोगों पर भी पड़ सकता है. आने वाले समय में सरकार इस पर विस्तृत जानकारी दे सकती है.