मुनाफा 31% गिरा, फिर भी DII ने बढ़ाई हिस्सेदारी, क्या ये डिफेंस स्टॉक बन सकता है अगला मल्टीबैगर?
Zen Technologies देश की सबसे बड़ी एंटी-ड्रोन सिस्टम सप्लायर कंपनियों में से एक मानी जाती है. कंपनी अब तक दुनिया भर में 1,000 से ज्यादा एंटी-ड्रोन सिस्टम की आपूर्ति कर चुकी है. इसके अलावा कंपनी सेना, नौसेना और अन्य रक्षा बलों के लिए सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण सिस्टम भी तैयार करती है.
Defence stocks: भारत में रक्षा क्षेत्र तेजी से आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रहा है. अब जंग सिर्फ सैनिकों और हथियारों से नहीं, बल्कि ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्ट सुरक्षा प्रणालियों की मदद से भी लड़े जा रहे हैं. ऐसे माहौल में रक्षा तकनीक से जुड़ी कंपनियां निवेशकों का ध्यान खींच रही हैं. खास बात यह है कि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) भी ऐसी कंपनियों में लगातार निवेश बढ़ा रहे हैं.
इसी कड़ी में एक नाम तेजी से चर्चा में है. यह कंपनी है Zen Technologies Limited. हाल ही में कंपनी को हथियार निर्माण का लाइसेंस मिला है. इसके साथ ही कंपनी ने भारत का पहला AI आधारित काउंटर-ड्रोन सिस्टम और स्मार्ट बॉर्डर सुरक्षा समाधान भी पेश किया है. यही वजह है कि म्यूचुअल फंड और अन्य घरेलू संस्थागत निवेशक कंपनी के शेयरों में लगातार हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं.
DII ने बढ़ाई हिस्सेदारी
- जनवरी से मार्च 2026 तिमाही के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों ने Zen Technologies में अपनी हिस्सेदारी 2.2 प्रतिशत बढ़ाई.
- तिमाही के अंत तक DII की कुल हिस्सेदारी 10.06 प्रतिशत पहुंच गई.
- खासतौर पर Motilal Oswal Long Term Equity Fund ने अपनी हिस्सेदारी 4.36 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.96 प्रतिशत कर ली.
एंटी-ड्रोन सिस्टम में बड़ी पहचान
Zen Technologies देश की सबसे बड़ी एंटी-ड्रोन सिस्टम सप्लायर कंपनियों में से एक मानी जाती है. कंपनी अब तक दुनिया भर में 1,000 से ज्यादा एंटी-ड्रोन सिस्टम की आपूर्ति कर चुकी है. इसके अलावा कंपनी सेना, नौसेना और अन्य रक्षा बलों के लिए सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण सिस्टम भी तैयार करती है.
भारत का पहला AI आधारित काउंटर-ड्रोन सिस्टम
मई 2026 में कंपनी ने भारत का पहला मॉड्यूलर AI-पावर्ड काउंटर-ड्रोन सिस्टम लॉन्च किया. यह सिस्टम 70 MHz से 12 GHz तक की फ्रीक्वेंसी पहचान सकता है और 15 किलोमीटर से अधिक दूरी तक ड्रोन का पता लगाने में सक्षम है. इसे देश की रक्षा तकनीक में बड़ा कदम माना जा रहा है.
हथियार निर्माण लाइसेंस मिला
- अप्रैल 2026 में कंपनी को भारत सरकार से Arms Manufacturing Licence मिला.
- इसके तहत कंपनी 12.7 मिमी से 40 मिमी तक की तोपों और हथियार प्रणालियों का निर्माण कर सकेगी.
- ये हथियार हवाई सुरक्षा और नौसैनिक अभियानों में उपयोग किए जाते हैं.
- यह लाइसेंस कंपनी के लिए रक्षा तकनीक से आगे बढ़कर पूर्ण रक्षा उपकरण निर्माता बनने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
मजबूत ऑर्डर बुक
- 31 मार्च 2026 तक कंपनी के पास 1,336 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक था.
- जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में कंपनी को 431.36 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले.
- प्रबंधन का कहना है कि FY27 के अंत तक करीब 1,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर पूरे कर लिए जाएंगे.
- इसके अलावा कंपनी ने 1,500 करोड़ रुपये से ज्यादा के टेंडर के लिए भी बोली लगा रखी है.
मुनाफा घटा, लेकिन भरोसा बरकरार
FY26 में कंपनी की बिक्री 29.4 प्रतिशत घटकर 687.7 करोड़ रुपये रह गई. वहीं शुद्ध मुनाफा 31 प्रतिशत घटकर 193.5 करोड़ रुपये पर आ गया. इसके बावजूद कंपनी का मानना है कि आने वाले FY27 और FY28 में कुल मिलाकर 4,000 करोड़ रुपये तक का राजस्व हासिल किया जा सकता है. शायद यही वजह है कि DII निकट अवधि की कमजोरी को नजरअंदाज कर भविष्य की संभावनाओं पर दांव लगा रहे हैं.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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