New SEBI rules: क्या आपके डीमैट अकाउंट में नॉमिनी है? नहीं तो 1 सितंबर से पहले जान लें ये नियम

अक्सर देखा जाता है कि निवेशक अपने डिमैट अकाउंट या म्यूचुअल फंड में नॉमिनी नहीं जोड़ते. ऐसी स्थिति में निवेशक की मृत्यु होने पर परिवार को निवेश की रकम हासिल करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसी समस्या को दूर करने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने नए नियम जारी किए हैं.

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SEBI New Rules: भारत में करोड़ों लोग शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं. लेकिन अक्सर देखा जाता है कि निवेशक अपने डिमैट अकाउंट या म्यूचुअल फंड में नॉमिनी नहीं जोड़ते. ऐसी स्थिति में निवेशक की मृत्यु होने पर परिवार को निवेश की रकम हासिल करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसी समस्या को दूर करने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने नए नियम जारी किए हैं.

SEBI का मानना है कि नॉमिनेशन प्रक्रिया को आसान बनाकर निवेशकों और उनके परिवारों को बड़ी राहत दी जा सकती है. यही वजह है कि नियामक ने डिमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड फोलियो के लिए नए नियम लागू करने का फैसला किया है. इन नियमों का मकसद निवेशकों की संपत्ति को सुरक्षित रखना और भविष्य में कानूनी दिक्कतों को कम करना है.

1 सितंबर 2026 से लागू होंगे नए नियम

SEBI के नए नियमों के मुताबिक 1 सितंबर 2026 के बाद जो भी नया सिंगल होल्डर डिमैट अकाउंट या म्यूचुअल फंड फोलियो खोला जाएगा, उसमें निवेशक को नॉमिनी जोड़ना होगा.

अगर कोई निवेशक नॉमिनी नहीं जोड़ना चाहता है, तो उसे इसके लिए लिखित रूप से “ऑप्ट-आउट” घोषणा देनी होगी. यानी अब नॉमिनी जोड़ना या औपचारिक रूप से मना करना अनिवार्य होगा.

जॉइंट अकाउंट वालों को राहत

SEBI ने संयुक्त यानी जॉइंट होल्डिंग वाले डिमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड फोलियो के लिए नॉमिनेशन को अनिवार्य नहीं किया है. ऐसे खातों में नॉमिनी जोड़ना पूरी तरह वैकल्पिक रहेगा. नए नियमों के तहत नॉमिनी जोड़ने के लिए अब बहुत ज्यादा जानकारी देने की जरूरत नहीं होगी.

निवेशक को केवल नॉमिनी का नाम और उसके साथ संबंध बताना होगा. अगर नॉमिनी नाबालिग है, तो उसकी जन्मतिथि भी देनी होगी. PAN, आधार, पासपोर्ट, ईमेल, मोबाइल नंबर और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज अब अनिवार्य नहीं होंगे.

तीन नॉमिनी तक जोड़ सकेंगे

  • निवेशक अपने डिमैट अकाउंट या म्यूचुअल फंड फोलियो में अधिकतम तीन नॉमिनी जोड़ सकते हैं.
  • अगर निवेशक कई नॉमिनी जोड़ता है लेकिन हिस्सेदारी का प्रतिशत तय नहीं करता, तो निवेश की राशि सभी नॉमिनी में बराबर-बराबर बांट दी जाएगी.
  • SEBI ने नॉमिनेशन प्रक्रिया को और आसान बनाते हुए गवाह के हस्ताक्षर की शर्त भी हटा दी है.
  • अब सामान्य हस्ताक्षर वाले फॉर्म में किसी गवाह की जरूरत नहीं होगी.
  • केवल अंगूठे के निशान से फॉर्म जमा करने की स्थिति में गवाह का हस्ताक्षर जरूरी रहेगा.

ऑनलाइन प्रक्रिया को बढ़ावा

SEBI ने डिजिटल प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई नए विकल्प दिए हैं. अब निवेशक डिजिटल सिग्नेचर, आधार आधारित ई-साइन, इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर और मोबाइल-ईमेल पर आने वाले OTP के जरिए भी नॉमिनेशन कर सकेंगे. डिपॉजिटरी, म्यूचुअल फंड कंपनियों और रजिस्ट्रार को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.

बिना नॉमिनी वालों को मिलेगा रिमाइंडर

SEBI का एक बड़ा लक्ष्य बिना दावे वाली वित्तीय संपत्तियों की संख्या कम करना है. इसीलिए जिन निवेशकों ने नॉमिनी नहीं जोड़ा है और ऑप्ट-आउट भी नहीं किया है, उन्हें साल में दो बार SMS और ईमेल के जरिए रिमाइंडर भेजा जाएगा.

इसके अलावा निवेश प्लेटफॉर्म पर लॉगिन करने पर नॉमिनेशन के फायदे बताने वाले पॉप-अप संदेश भी दिखाई देंगे. SEBI का मानना है कि इन नए नियमों से निवेशकों की संपत्ति सही समय पर उनके परिवार या कानूनी उत्तराधिकारियों तक पहुंच सकेगी और भविष्य में विवादों की संभावना भी कम होगी.

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