महादेव और Skyexchange सट्टेबाजी केस में ED की बड़ी कार्रवाई, 91.82 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त

महादेव और स्काईएक्सचेंज से जुड़े अवैध सट्टेबाजी मामले में ED ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 91.82 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं. जांच में ऑनलाइन बेटिंग, हवाला, क्रिप्टो एसेट्स और FPI के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत सामने आए हैं. अब तक 175 से अधिक ठिकानों पर तलाशी, 13 गिरफ्तारियां और हजारों करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं.

महादेव सट्टेबाजी मामला Image Credit: tv9 bharatvarsh

Mahadev betting case: अवैध सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है. ED ने महादेव और स्काईएक्सचेंज से जुड़े मामलों में 91.82 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं. यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत ED के रायपुर जोनल ऑफिस द्वारा की गई है. जांच एजेंसी के अनुसार, ऑनलाइन बेटिंग के जरिए अर्जित अवैध धन को जटिल तरीकों से वैध निवेश के रूप में दिखाने की कोशिश की गई.

74.28 करोड़ रुपये के बैंक बैलेंस अटैच

ED के मुताबिक, ताजा अटैचमेंट में 74.28 करोड़ रुपये के बैंक बैलेंस शामिल हैं, जो M/s परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट एलएलसी और M/s एक्सिम जनरल ट्रेडिंग–जीजेडसीओ के नाम पर दर्ज हैं. जांच में सामने आया है कि इन इकाइयों का संबंध सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपरिया से है. एजेंसी का दावा है कि इन संस्थाओं का इस्तेमाल अपराध से अर्जित धन को छिपाने और उसे वैध निवेश के रूप में पेश करने के लिए किया गया.

गगन गुप्ता की 17.5 करोड़ रुपये की संपत्ति भी अटैच

इसके अलावा, स्काईएक्सचेंज के मालिक हरि शंकर तिबरेवाल के करीबी सहयोगी गगन गुप्ता की 17.5 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी अटैच की गई हैं. इनमें महंगी रियल एस्टेट और लिक्विड एसेट्स शामिल हैं, जो गगन गुप्ता के परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज थीं. ED का कहना है कि यह संपत्तियां अवैध सट्टेबाजी से प्राप्त नकद पैसों से खरीदी गई थीं.

महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज की भूमिका

जांच में यह भी सामने आया है कि महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज डॉट कॉम जैसे प्लेटफॉर्म्स ने अवैध बेटिंग के जरिए भारी मात्रा में प्रोसीड्स ऑफ क्राइम पैदा किए. महादेव ऑनलाइन बुक कथित तौर पर एक अंब्रेला प्लेटफॉर्म की तरह काम करता था, जो कई अवैध बेटिंग वेबसाइट्स और मोबाइल ऐप्स को ग्राहक जुटाने और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन मैनेज करने में मदद करता था. ED के अनुसार, इन प्लेटफॉर्म्स को इस तरह डिजाइन किया गया था कि यूजर्स को लगातार नुकसान हो.

हवाला, क्रिप्टो और FPI के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग

ED की जांच में क्रॉस-बॉर्डर मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत मिले हैं. एजेंसी के मुताबिक, हवाला चैनल, ट्रेड-बेस्ड लॉन्ड्रिंग और क्रिप्टो एसेट्स के जरिए धन को विदेश भेजा गया और फिर FPI के माध्यम से भारत वापस लाकर स्टॉक मार्केट में निवेश किया गया. एक “कैशबैक” स्कीम भी सामने आई है, जिसके तहत कंपनी प्रमोटर्स को FPI इन्वेस्टमेंट का 30 से 40 फीसदी नकद में वापस करना होता था. आरोप है कि गगन गुप्ता को इस तरह के लेन-देन से कम से कम 98 करोड़ रुपये मिले.

2,600 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त

ED अब तक 175 से अधिक ठिकानों पर तलाशी ले चुकी है. जांच एजेंसी ने करीब 2,600 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच या जब्त की हैं, 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 5 शिकायतों में 74 संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है. ED का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में इस मामले में और बड़ी कार्रवाई की जा सकती है.

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