क्या खत्म हो गया एडवांस बुकिंग पर सस्ती फ्लाइट टिकट का दौर? यात्रियों को लग सकता है झटका
भारत में एयरलाइंस अपनी प्राइसिंग स्ट्रेटेजी बदल रही हैं, एडवांस बुकिंग और लास्ट मिनट की बुकिंग, दोनों के लिए ज्यादा किराया बनाए हुए हैं. कम कैपेसिटी और फ्यूल की कीमतों में अनिश्चितता, इन प्राइसिंग बदलावों पर असर डालने वाले मुख्य कारण हैं.
Highlights
- एडवांस एयर टिकट बुकिंग का फायदा खत्म.
- जेट फ्यूल महंगा होने से बढ़ी परेशानी.
- कम फ्लाइट्स से बढ़े हवाई टिकट के दाम.
वो भी एक दौर था जब ट्रेवल डेट से कुछ महीने पहले बुकिंग पर एयरलाइंस सस्ती Flight Tickets दिया करती थी और लास्ट मिनट पर बुकिंग करने वालों से ज्यादा चार्ज लिया जाता है. लेकिन अब लगता है कि ट्रेवल डेट से पहले बुकिंग वाला फायदा खत्म हो जा रहा है क्योंकि एयरलाइंस डोमेस्टिक रूट पर पहले भी किराया ज्यादा ही रख रही हैं.
उदाहरण के लिए, दिल्ली-मुंबई रूट को ही ले लीजिए. अगले दिन के लिए फ्लाइट बुक करने की कोशिश कर रहे पैसेंजर को अकासा एयर में लगभग 6200 रुपए, इंडिगो से बुकिंग पर 6500 रुपए और एयर इंडिया से बुकिंग पर 6900 रुपए की इकॉनमी वन-वे टिकट मिल रही है. फरवरी 2027 की बुकिंग पर भी यही किराया लागू होगा, ये फ्लाइट कुछ महीने पहले लगभग 3800 रुपए में आसानी से मिल जाती थी.
एडवांस बुकिंग का फायदा हो रहा गायब
इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, सीधे शब्दों में कहें तो, एयरलाइंस इंडिगो और एयर इंडिया ग्रुप के दबदबे वाले मार्केट में प्राइसिंग के नियम बदल रही हैं जिनकी हिस्सेदारी क्रमशः 70 फीसदी और 25 फीसदी है जिससे अकासा और स्पाइसजेट के पास बहुत कम शेयर बचे हैं. कम फ्लाइट और कम कॉम्पिटिशन के साथ, भारत में डोमेस्टि रूट से पहले बुकिंग पर सस्ती टिकट वाला फायदा गायब हो सकता है.
कम हो गई कैपेसिटी
मुंबई की रिया ट्रैवल एंड टूर्स इंडिया के CEO मनोज सैमुअल ने कहा, यह सिर्फ डोमेस्टिक मार्केट का ट्रेंड है. यह कंपनी बड़ी मात्रा में कॉर्पोरेट ट्रैवल संभालती है, जिसमें ब्लू-चिप टेक्नोलॉजी फर्म भी शामिल है, उन्होंने बदले हुए रेवेन्यू मैनेजमेंट के तरीके का जिक्र किया. आप अभी भी बैंकॉक के लिए रिटर्न टिकट 26,000 रुपए में ले सकते हैं.
तो यह नई प्राइसिंग स्ट्रैटेजी क्यों? सैमुअल के मुताबिक, एडवांस बुकिंग का फायदा कुछ हद तक इसलिए खत्म हो गया है क्योंकि कैपेसिटी कम हो गई है. उन्होंने कहा, इंडिगो ने कैपेसिटी (फ़्लाइट्स की संख्या) कम कर दी है और एयर इंडिया इसे बढ़ा नहीं रही है. नई प्राइसिंग स्ट्रैटेजी से यह भी पता चलता है कि एयरलाइंस को पक्का नहीं है कि मौजूदा यूएस-ईरान युद्ध जिसने जेट फ्यूल की कीमतों को हर साल 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ा दिया है, कब तक चलेगा?
इसलिए, एयरलाइंस अब कम कीमत में एडवांस टिकट बेचने को तैयार नहीं हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडियन मार्केट में कॉम्पिटिशन कम होने की वजह से उन पर ऐसा करने का कोई प्रेशर नहीं है. पिछले सात सालों में जेट एयरवेज और गो फर्स्ट के बंद होने, साथ ही विस्तारा और एयरएशिया इंडिया के एयर इंडिया ग्रुप में मर्जर होने से पैसेंजर्स के पास और भी कम ऑप्शन बचे हैं.
जल्द कोई बदलाव नहीं
डेटा से पता चलता है कि डोमेस्टिक रूट्स पर उतनी ही सीट कैपेसिटी वाली फ्लाइट्स से एयरलाइंस को बहुत ज़्यादा रेवेन्यू मिला है, जो ज़्यादा हवाई किराए को दिखाता है. इंडिगो के रिपोर्ट किए गए डेटा से पता चलता है कि जेट एयरवेज के बंद होने के बाद से उसका रेवेन्यू प्रति अवेलेबल सीट किलोमीटर (RASK) 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ गया है. जबकि 2018 की गर्मियों में एयरलाइन का RASK 3.7 था, वही मेट्रिक अब 5.66 है. RASK यह मापता है कि एक एयरलाइन हर अवेलेबल सीट किलोमीटर उड़ान के लिए कितना रेवेन्यू कमाती है.
फ्यूल की चिंता
इस बात के बहुत कम संकेत हैं कि यह प्राइसिंग पावर जल्द ही कम होगी. एक एयरलाइन के पूर्व लीडरशिप एग्जीक्यूटिव, जो अपना नाम नहीं बताना चाहते थे को डर है कि 2027 में ट्रैवल करने वाले लोगों के लिए किराया ज़्यादा हो सकता है, क्योंकि काफी कैपेसिटी नहीं आ रही है. उन्होंने बताया कि फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी और एयरस्पेस पर पाबंदियों के बाद, रोजाना की डोमेस्टिक फ़्लाइट कैपेसिटी लगभग 3200 फ्लाइट से घटकर अब लगभग 2800-3000 रह गया है. अगर कोई युद्ध नहीं होता, तो आने वाले विंटर शेड्यूल में यह संख्या हर दिन 3400 फ्लाइट से ज्यादा हो सकती थी, जिससे एयरलाइनों को काफी सस्ते किराए देने पड़ते. लेकिन फ्यूल की कीमतें उस कैपेसिटी को वापस आने से रोक सकती हैं.
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