Diwali के बाद भी सस्ते नहीं होंगे Flight Tickets! हवाई किराए में राहत के लिए करना होगा इंतजार

त्योहारी सीजन खत्म होने के बाद भी हवाई टिकट सस्ते होने की उम्मीद फिलहाल कम है. महंगा ATF, रुपये की कमजोरी, West Asia में तनाव और सीमित फ्लाइट उपलब्धता के कारण एयरलाइंस की लागत बढ़ी हुई है. Fuel Surcharge भी बढ़ाया गया है. ऐसे में यात्रियों को हवाई किराए में राहत के लिए कुछ और समय इंतजार करना पड़ सकता है.

Flight Tickets

Highlights

  • महंगे ATF से एयरलाइंस की लागत लगातार बढ़ी हुई है
  • Fuel Surcharge बढ़ने से यात्रियों की जेब पर असर
  • Diwali के बाद क्या सस्ते होंगे Flight Tickets?

त्योहारी सीजन में महंगे हवाई टिकट से परेशान यात्रियों को अभी राहत मिलने की उम्मीद कम है. Diwali और फेस्टिव सीजन खत्म होने के बाद आमतौर पर एयरफेयर में कमी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार कई वजहों से टिकट के दाम लंबे समय तक ऊंचे रह सकते हैं. महंगा Aviation Turbine Fuel यानी ATF, रुपये में कमजोरी और West Asia में जारी तनाव के कारण एयरलाइंस की लागत बढ़ी हुई है.

Fuel की बढ़ी कीमत सबसे बड़ी वजह

एयरलाइंस की कुल लागत में ATF का हिस्सा काफी ज्यादा होता है. ऐसे में विमान ईंधन महंगा होने का सीधा असर टिकट की कीमतों पर पड़ता है. हाल के महीनों में ग्लोबल एनर्जी मार्केट में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के कारण ATF की कीमतों पर दबाव बना हुआ है.

इसी वजह से कई एयरलाइंस ने Fuel Surcharge बढ़ाया है. Air India और Air India Express ने घरेलू उड़ानों पर दूरी के हिसाब से ₹400 से ₹1,200 तक का Fuel Surcharge लागू किया है. अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर यह चार्ज रूट के हिसाब से 55 डॉलर से 215 डॉलर तक है.

कम Flights भी बढ़ा रही हैं टिकट की कीमत

हवाई किराए में बढ़ोतरी की एक और बड़ी वजह उपलब्ध सीटों की कमी है. जब किसी रूट पर यात्रियों की मांग ज्यादा और Flights की संख्या कम होती है, तो टिकट की कीमत तेजी से बढ़ सकती है. त्योहारी सीजन में दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, गोवा और दूसरे प्रमुख रूटों पर यात्रा की मांग बढ़ने से यह दबाव और ज्यादा दिखाई दिया. कुछ प्रमुख घरेलू रूटों पर पिछले साल की तुलना में औसत किराए में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

रुपये की कमजोरी का भी असर

भारतीय एयरलाइंस के लिए रुपये की कमजोरी भी चिंता बढ़ाती है. Aviation से जुड़े कई खर्च डॉलर में होते हैं. ऐसे में रुपये की कीमत कम होने पर एयरलाइंस को समान खर्च के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं. West Asia में तनाव के कारण कुछ फ्लाइट रूट और ऑपरेशनल लागत पर भी असर पड़ा है. लंबा रूट और अतिरिक्त परिचालन खर्च टिकट की कीमतों को ऊंचा बनाए रख सकता है.

क्या सरकार से मिल सकती है राहत?

सरकार एयरफेयर से जुड़ी नई व्यवस्था पर काम कर रही है. हालांकि सामान्य परिस्थितियों में सरकार सीधे टिकट की कीमत तय करने की योजना नहीं बना रही है. असाधारण परिस्थितियों में किराए पर सीमा लगाने जैसी व्यवस्था का प्रावधान हो सकता है. Fuel Surcharge को वापस लेने या कम करने की संभावना भी बन सकती है, लेकिन फिलहाल इसे लेकर कोई पक्की घोषणा नहीं हुई है. इसलिए यात्रियों को जल्द सस्ते टिकट मिलने की उम्मीद पर निर्भर रहने के बजाय अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाना बेहतर होगा.

यात्रियों की जेब पर कब कम होगा बोझ?

अगर ATF की कीमतों में गिरावट आती है, रुपये में स्थिरता लौटती है और Flights की उपलब्धता बढ़ती है, तभी हवाई किराए में टिकाऊ राहत मिल सकती है. सिर्फ फेस्टिव सीजन खत्म होने से टिकट के दाम तुरंत नीचे आ जाएं, इसकी गारंटी नहीं है. यानी यात्रियों के लिए फिलहाल सस्ते हवाई टिकट का इंतजार लंबा हो सकता है. आने वाले दिनों में Fuel Surcharge और Aviation Fuel की कीमतों में बदलाव पर नजर रखना जरूरी होगा.