भारत-EU FTA से बदलेगी तस्वीर, टेक्सटाइल एक्सपोर्ट को मिल सकता है 18000 करोड़ रुपये का बूस्ट

भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारतीय टेक्सटाइल निर्यातकों को बड़ी राहत मिल सकती है. टैरिफ हटने से यूरोपीय बाजार में कीमतें घटेंगी और निर्यात में सालाना 1.5–2 अरब डॉलर तक की बढ़ोतरी संभव है. इस समझौते पर 27 जनवरी को साइन होने की उम्मीद है.

भारतीय टेक्सटाइल निर्यात Image Credit: canva

यूरोप के बाजारों में भारतीय कपड़ों की चमक अब और तेज हो सकती है. सालों से ऊंचे टैरिफ की मार झेल रहे भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स के लिए राहत की खबर है. भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने जा रहा Free Trade Agreement (FTA) न सिर्फ ड्यूटी की दीवार गिरा सकता है बल्कि भारतीय निर्यातकों के लिए हर साल 2 अरब डॉलर (18000 करोड़ रुपये) तक का नया कारोबार खोल सकता है. अगर इस समझौते पर तय समय पर साइन हो जाता है, तो यह भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर के लिए बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है.

कब प्रस्तावित है मीटिंग

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर 27 जनवरी को साइन होने की उम्मीद है. गणतंत्र दिवस पर EU आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा दिल्ली में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे.

क्या होगा फायदा

वित्त वर्ष 2025 में भारत ने EU को करीब 7.6 अरब डॉलर के टेक्सटाइल और अपैरल उत्पाद एक्सपोर्ट किए लेकिन 6 से 20 फीसदी तक के आयात शुल्क के कारण भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती रही है. इस वजह से भारत को बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से कड़ी चुनौती मिलती है जिन्हें EU बाजार में या तो शून्य शुल्क या FTA के तहत रियायती पहुंच हासिल है.

India-EU FTA के तहत इन टैरिफ्स के हटने से यूरोपीय खरीदारों के लिए कीमतें कम होंगी, जिससे मांग बढ़ने की संभावना है. ट्रेड एनालिसिस के अनुसार, कीमतों में मामूली गिरावट से भी भारतीय टेक्सटाइल निर्यात में सालाना 1.5 से 2 अरब डॉलर तक की बढ़ोतरी हो सकती है. यह अनुमान FY25 के निर्यात आंकड़ों पर संभावित EU टैरिफ कटौती लागू करने और कीमतों में कमी से 15–25 फीसदी मांग बढ़ने के मानक आकलन पर आधारित है. हालांकि, ये लाभ FTA के लागू होने के बाद ही दिखेंगे. EU की रैटिफिकेशन प्रक्रिया लंबी होती है, इसलिए साइन होने के बाद भी इसे लागू होने में कम से कम एक साल लग सकता है.

भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बना EU

फरवरी 2025 में भारत और EU ने इस FTA पर बातचीत तेज करने का फैसला किया था ताकि व्यापारिक बाधाओं से निपटा जा सके. FY25 में भारत का EU को कुल निर्यात 75.85 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 60.68 अरब डॉलर का था जिससे EU भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बन गया. करीब एक दशक से बातचीत में रहे इस समझौते में वस्तुओं और सेवाओं से जुड़े 24 चैप्टर शामिल हैं. अगर यह FTA सफलतापूर्वक लागू होता है, तो भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई रफ्तार मिल सकती है.

EU बाजार तक बेहतर पहुंच भारत के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि अमेरिका में भारतीय टेक्सटाइल पर करीब 50 फीसदी तक ऊंचे टैरिफ हैं, जबकि बांग्लादेश और वियतनाम पर यह करीब 20 फीसदी है. अमेरिका फिलहाल भारत का सबसे बड़ा टेक्सटाइल बाजार है- FY25 में वहां करीब 11 अरब डॉलर का निर्यात हुआ. कुल मिलाकर, FY25 में भारत का टेक्सटाइल-अपैरल निर्यात 37.7 अरब डॉलर रहा, जो देश के कुल निर्यात का 8.6 फीसदी है.

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