पश्चिम एशिया तनाव के बीच सोने-चांदी में हल्की तेजी के संकेत, RBI पॉलिसी और US डेटा तय करेंगे अगला रुख

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक संकेतकों के बीच सोना-चांदी अगले हफ्ते सीमित दायरे में रह सकते हैं, लेकिन हल्की तेजी की संभावना बनी हुई है. निवेशकों की नजर US डेटा, RBI पॉलिसी और जियोपॉलिटिकल हालात पर टिकी रहेगी.

गोल्ड-सिल्वर आउटलुक Image Credit: @AI

West Asia Tension and Gold Silver Outlook: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अहम वैश्विक आर्थिक आंकड़ों के बीच सोना और चांदी अगले सप्ताह सीमित दायरे में कारोबार करते हुए हल्की मजबूती दिखा सकते हैं. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की नजर एक तरफ जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम पर रहेगी, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले आर्थिक डेटा भी कीमतों की दिशा तय करेंगे. घरेलू स्तर पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति बैठक भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकती है.

क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

विश्लेषकों के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र यानी पश्चिम एशिया में हालात फिलहाल बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. अगर तनाव और बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने-चांदी की मांग बढ़ सकती है, जबकि हालात में नरमी आने पर कीमतों में दबाव भी दिख सकता है. ऐसे में बाजार की चाल काफी हद तक इन घटनाओं पर निर्भर रहने वाली है.

कहां रहेगी निवेशकों की नजर?

आने वाले दिनों में निवेशक कई अहम आर्थिक संकेतकों पर भी नजर रखेंगे. इनमें प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के सर्विस PMI डेटा, अमेरिका के टिकाऊ वस्तुओं के आंकड़े, GDP ग्रोथ, PCE इंडेक्स और महंगाई से जुड़े CPI डेटा शामिल हैं. ये सभी संकेतक यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है, जिसका सीधा असर बुलियन मार्केट पर पड़ता है.

क्या है मौजूदा भाव?

पिछले सप्ताह की बात करें तो छुट्टियों के कारण कारोबारी दिन कम रहे, लेकिन इसके बावजूद सोने और चांदी दोनों में अच्छी रिकवरी देखने को मिली. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर जून डिलीवरी वाला सोना करीब 1.65 फीसदी चढ़ा, जबकि मई डिलीवरी वाली चांदी में लगभग 2 फीसदी की तेजी आई. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी रुझान मजबूत रहा, जहां सोना करीब 3.4 फीसदी और चांदी 4.5 फीसदी तक उछली.

क्यों आई थी बाजार में तेजी?

बाजार में आई इस तेजी के पीछे कई कारण रहे. एक तरफ रुपये में कमजोरी ने घरेलू कीमतों को सपोर्ट दिया, वहीं दूसरी ओर क्रिप्टोकरेंसी खासतौर पर बिटकॉइन में गिरावट के चलते निवेशकों का रुझान सुरक्षित विकल्प यानी सोने-चांदी की ओर बढ़ा. इसके अलावा, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भी बुलियन की मांग को मजबूती दी. हालांकि, कुछ कारक ऐसे भी रहे जिन्होंने कीमतों को सीमित दायरे में बनाए रखा. जैसे ETF निवेश में आंशिक बिकवाली और सेंट्रल बैंकों की खरीद में कमी. इसके बावजूद, अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े मजबूत आंकड़ों के बीच भी सोने-चांदी ने अपनी बढ़त बरकरार रखी, जो इसकी मजबूती को दर्शाता है.

चांदी को कैसे मिली सपोर्ट?

चांदी के मामले में सप्लाई से जुड़ी खबरें भी अहम रही हैं. चीन में 2026 के शुरुआती महीनों में चांदी का आयात आठ साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जिससे वैश्विक सप्लाई टाइट होने की आशंका बढ़ी है. इससे चांदी की कीमतों को अतिरिक्त सपोर्ट मिल सकता है.

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