शेयर बाजार के साथ सोना-चांदी भी धड़ाम, एक दिन में ₹17800 टूटी चांदी, ₹7000 फिसला गोल्ड; जानें ताजा रेट

ग्लोबल मार्केट में भारी बिकवाली के चलते सोना और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट आई है. चांदी 17,800 रुपये और सोना 7,000 रुपये तक टूट गया, जबकि ऑल-टाइम हाई से दोनों धातुएं बड़ी गिरावट झेल चुकी हैं. जानें एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस गिरावट के क्या है बड़े कारण.

सोने-चांदी के भाव में बड़ी गिरावट Image Credit: @Money9live

Gold Silver Rate on 19 March 2026: ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में तेज बिकवाली के बीच सोना और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है, जिसने निवेशकों को चौंका दिया है. गुरुवार, 19 मार्च को दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जहां यह एक ही दिन में करीब 17,800 रुपये टूटकर 2.38 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई. वहीं, सोने की कीमत भी पीछे नहीं रही और इसमें 7,000 रुपये की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया.

ऑल-टाइम हाई से कितनी टूटी कीमतें?

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, चांदी में लगभग 7 फीसदी की गिरावट आई है. यह गिरावट और भी अहम हो जाती है जब इसे इसके ऑल-टाइम हाई से तुलना की जाए. 29 जनवरी को चांदी 4.04 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी, जिसके बाद अब तक इसमें करीब 41 फीसदी यानी 1.65 लाख रुपये से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है. इसी तरह सोना भी अपने उच्चतम स्तर 1.83 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से करीब 29,700 रुपये यानी 16 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है.

क्या है विशेषज्ञों की राय?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण एक साथ काम कर रहे हैं. बढ़ती महंगाई की चिंता, प्रमुख केंद्रीय बैंकों का सख्त रुख और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने बाजार का मूड बदल दिया है. खास तौर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान की नीतियों को लेकर सख्ती के संकेतों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है.

ईटीएफ से हो रही निकासी!

कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं पर दबाव इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि निवेशक अब ज्यादा रिटर्न देने वाले विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और गोल्ड ETF से लगातार निकासी ने भी कीमतों को नीचे धकेलने में बड़ी भूमिका निभाई है. पिछले कुछ दिनों में गोल्ड ETF से लगातार पांच दिन तक पैसा निकाला गया, जिससे सोने की कीमतें फरवरी के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं.

पश्चिम एशिया टेंशन भी बड़ी वजह

इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है. इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ रहा है, और यही वजह है कि केंद्रीय बैंक अब सख्त रुख अपनाने को मजबूर हैं. ऐसे माहौल में सोना, जो आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है, भी दबाव में आ गया है.

क्या है इंटरनेशनल मार्केट का हाल?

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं का यही हाल रहा. स्पॉट सिल्वर में करीब 6.5 फीसदी की गिरावट आई और यह 70 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया, जबकि सोना भी करीब 3 फीसदी गिरकर 4,700 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसल गया. महज दो दिनों में सोने की कीमतों में लगभग 300 डॉलर की गिरावट दर्ज की गई है, जो बाजार की अस्थिरता को दर्शाती है.

सोने-चांदी में बना रहेगा ये सिलसिला?

आगे की बात करें तो विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोना और चांदी का रुख कमजोर और उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है. निवेशकों की नजर अब वैश्विक ब्याज दरों, केंद्रीय बैंकों के फैसलों और जियो पॉलिटिकल घटनाक्रमों पर टिकी रहेगी. इन सभी फैक्टर्स के आधार पर ही आने वाले समय में कीमतों की दिशा तय होगी.

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