अब मनमाने तरीके से नहीं मिलेगी गैस, अलग-अलग सेक्टरों के लिए सरकार ने तय की सप्लाई लिमिट, देखें पूरी लिस्ट

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट से LNG सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारत में गैस संकट गहराने लगा है. सरकार ने आपात कदम उठाते हुए नेचुरल गैस की राशनिंग लागू की है. PNG, CNG और LPG को प्राथमिकता दी गई है जबकि उद्योगों की गैस सप्लाई में 20% से 35% तक कटौती की गई है.

नेचुरल गैस राशनिंग, Image Credit: ChatGPT

पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट से ऊर्जा सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारत में नेचुरल गैस की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है. इस संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने आपात कदम उठाते हुए देशभर में नेचुरल गैस की सख्त राशनिंग व्यवस्था लागू कर दी है. सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर Natural Gas (Supply Regulation) Order लागू किया है जिसके तहत विभिन्न सेक्टरों के लिए गैस सप्लाई की लिमिट तय की गई है, ताकि जरूरी सेवाओं को गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके.

LNG सप्लाई रुकने से बढ़ा संकट

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कई अंतरराष्ट्रीय सप्लायरों ने फोर्स मेज्योर क्लॉज लागू कर दिया है. इसके चलते हॉर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आने वाली LNG सप्लाई प्रभावित हुई है और भारत में गैस की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है. इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने उद्योगों और अन्य क्षेत्रों के लिए गैस वितरण को नियंत्रित करने का फैसला किया है.

GAIL संभालेगी गैस सप्लाई की जिम्मेदारी

सरकार के आदेश के मुताबिक, गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (GAIL) देश में प्राकृतिक गैस की सप्लाई को नियंत्रित करेगी और नई व्यवस्था को लागू कराएगी. वहीं गैस की पूल्ड प्राइस तय करने की जिम्मेदारी पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) को दी गई है. यह आदेश सभी मौजूदा गैस सेल एग्रीमेंट (GSA) और व्यावसायिक समझौतों पर भी लागू होगा.

घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता

सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए घरेलू गैस और शहरों की गैस वितरण व्यवस्था को प्राथमिकता दी है. इसके तहत PNG, CNG और LPG उत्पादन जैसे जरूरी सेक्टरों को पूरी सप्लाई देने का फैसला किया गया है.

सेक्टर-वाइज गैस एलोकेशन

सरकार की नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग क्षेत्रों को पिछले छह महीने की औसत खपत के आधार पर गैस दी जाएगी.

  • घरेलू PNG, CNG, LPG उत्पादन और पाइपलाइन कंप्रेसर फ्यूल: 100% सप्लाई
  • चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक उपभोक्ता: 80% सप्लाई
  • फर्टिलाइजर प्रोडक्शन: 70% सप्लाई
  • ऑयल रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल प्लांट और पावर प्लांट: 65% सप्लाई
सेक्टर / उपयोगगैस सप्लाई एलोकेशन (पिछले 6 महीने की औसत के आधार पर)
सिटी गैस, आवश्यक ईंधन उत्पादक (PNG, CNG, LPG उत्पादन, पाइपलाइन कंप्रेसर फ्यूल)100%
चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक उपभोक्ता80%
उर्वरक उत्पादन70%
ऑयल रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल प्लांट और पावर प्लांट65%

उद्योगों पर पड़ेगा बड़ा असर

गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर ऊर्जा-आधारित उद्योगों पर पड़ रहा है. कई सेक्टरों को 20% से 35% तक गैस सप्लाई में कटौती का सामना करना पड़ रहा है. गुजरात के मोरबी में स्थित देश के बड़े सिरेमिक उद्योग केंद्र में कई यूनिट्स ने उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है या वैकल्पिक ईंधन की तलाश की जा रही है.

संकट जल्द खत्म होने के आसार नहीं

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और हॉर्मुज स्ट्रेट से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक गैस सप्लाई पर दबाव बना रह सकता है. ऐसे में सरकार ने फिलहाल जरूरी क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण का नया ढांचा लागू किया है.

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