IDBI Bank में हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में सरकार, OFS के जरिए बढ़ेगा पब्लिक शेयरहोल्डिंग

सरकार IDBI Bank में हिस्सेदारी बेचने के लिए OFS विकल्प पर विचार कर रही है, ताकि पब्लिक फ्लोट बढ़ाया जा सके और बेहतर प्राइस डिस्कवरी हो सके. वर्तमान में बैंक का पब्लिक फ्लोट केवल 5.29 फीसद है, जिससे वैल्यूएशन प्रभावित हो रहा है. पहले 60.72 फीसद हिस्सेदारी बेचने की योजना सफल नहीं हो पाई थी. अब OFS के जरिए चरणबद्ध तरीके से हिस्सेदारी बेचने की रणनीति बनाई जा रही है.

IDBI बैंक Image Credit: Money9 Live

IDBI Bank OFS: सरकार एक बार फिर IDBI Bank में हिस्सेदारी बेचने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है. इस बार सरकार OFS के जरिए बैंक में पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने पर विचार कर रही है. सूत्रों के अनुसार, पहले की रणनीतिक बिक्री की कोशिश सफल नहीं होने के बाद अब सरकार वैकल्पिक रास्ते तलाश रही है. इस कदम का मुख्य उद्देश्य बैंक के शेयरों में बेहतर प्राइस डिस्कवरी सुनिश्चित करना और बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना है.

पब्लिक फ्लोट बढ़ाने पर फोकस

वर्तमान में IDBI Bank में पब्लिक फ्लोट केवल 5.29 फीसद है, जो काफी कम माना जाता है. यही कारण है कि बैंक के शेयरों का सही वैल्यूएशन नहीं हो पा रहा है. PTI के अनुसार, यदि पब्लिक फ्लोट को 10 से 15 फीसद तक बढ़ाया जाता है, तो इससे शेयर की कीमत तय करने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद हो जाएगी.

LIC और सरकार के पास बड़ी हिस्सेदारी

बैंक में सबसे बड़ी हिस्सेदारी LIC के पास है, जो लगभग 49.24 फीसद है. वहीं भारत सरकार की हिस्सेदारी करीब 45.48 फीसद है. इस तरह बैंक में अधिकांश हिस्सेदारी अभी भी संस्थागत हाथों में केंद्रित है, जिससे बाजार में ट्रेडिंग लिक्विडिटी सीमित रहती है.

पहले असफल रहा था प्रयास

हाल ही में सरकार और LIC ने मिलकर कुल 60.72 फीसद हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई थी, लेकिन यह योजना सफल नहीं हो पाई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभावित खरीदारों से मिले वित्तीय प्रस्ताव सरकार की अपेक्षित रिजर्व प्राइस से कम थे, जिसके चलते यह डील रद्द कर दी गई.

OFS के जरिए नया रास्ता

अब सरकार OFS के जरिए हिस्सेदारी धीरे-धीरे बेचने की रणनीति पर काम कर रही है. इससे बाजार में शेयरों की उपलब्धता बढ़ेगी और निवेशकों को अधिक भागीदारी का मौका मिलेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि एक या दो चरणों में OFS करने के बाद सरकार भविष्य में रणनीतिक बिक्री का प्रयास दोबारा कर सकती है.

IDBI Bank के निजीकरण का लंबा इतिहास

IDBI Bank के निजीकरण की प्रक्रिया नई नहीं है. इसकी शुरुआत 2016 में हुई थी, जब तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसका प्रस्ताव रखा था. बाद में 2019 में LIC ने लगभग 21624 करोड़ रुपये में बैंक में 51 फीसद हिस्सेदारी खरीदकर इसे बचाया था, क्योंकि उस समय बैंक भारी खराब कर्ज (NPA) से जूझ रहा था.

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