सोने की चमक और पड़ेगी फीकी, 1983 के बाद सबसे खराब हफ्ता; जियो पॉलिटिकल टेंशन के बीच लगातार गिरावट
पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव और एनर्जी कीमतों में उछाल के बीच सोने की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है. सोना 1983 के बाद अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है. मजबूत डॉलर, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम होने से बाजार पर दबाव बना हुआ है. गोल्ड ETF से लगातार निकासी और निवेशकों की बिकवाली ने गिरावट को और तेज कर दिया है.
Gold Price Fall: पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक बाजारों पर साफ दिखने लगा है. सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और यह 1983 के बाद अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है. निवेशकों के लिए यह स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ने के बावजूद सोना कमजोर पड़ रहा है, जो बाजार के बदलते ट्रेंड की ओर इशारा करता है. एनर्जी कीमतों में उछाल और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने सोने पर दबाव बना दिया है.
युद्ध और महंगाई की आशंका ने बढ़ाया दबाव
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है, जिससे वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका और मजबूत हुई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका संभावित रूप से ईरान में जमीनी सैनिक भेजने की तैयारी कर रहा है. इसके साथ ही पेंटागन द्वारा युद्धपोत और अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की खबरों ने बाजार में डर को और बढ़ा दिया है.
इस स्थिति में निवेशकों को लग रहा है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें ऊंचा बनाए रख सकते हैं या बढ़ा भी सकते हैं. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर तक ब्याज दर बढ़ने की संभावना लगभग 50 फीसद तक पहुंच गई है.
मजबूत डॉलर और बॉन्ड यील्ड से सोना कमजोर
सोने की कीमतों में गिरावट का एक बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड का मजबूत होना है. जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने की आकर्षण क्षमता घट जाती है क्योंकि यह कोई ब्याज नहीं देता. यही वजह है कि निवेशक अब सोने से पैसा निकालकर अन्य विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं. पिछले महीने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद से सोना लगातार हर सप्ताह गिरावट में बना हुआ है.
निवेशकों की बिकवाली और टेक्निकल संकेत
विश्लेषकों के अनुसार, सोने की कीमतें 5200 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंचने के बाद पहले से ही ओवरबॉट स्थिति में थीं. जैसे ही कीमतें गिरनी शुरू हुईं, निवेशकों ने स्टॉप-लॉस ट्रिगर कर दिए, जिससे बिकवाली तेजी से बढ़ी. टेक्निकल इंडिकेटर्स जैसे मूविंग एवरेज ने भी गिरावट को और तेज कर दिया. साथ ही, शेयर बाजार में गिरावट के चलते जबरन बिकवाली (फोर्स्ड सेलिंग) ने भी सोने पर दबाव बढ़ाया.
ईटीएफ आउटफ्लो और केंद्रीय बैंकों की धीमी खरीद
गोल्ड आधारित ईटीएफ में लगातार तीसरे सप्ताह निकासी देखी गई है, जिसमें कुल होल्डिंग्स 60 टन से ज्यादा घट गई हैं. इसके अलावा केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी धीमी पड़ गई है, जिससे बाजार का सेंटीमेंट कमजोर हुआ है.
फिर भी सालभर में बढ़त बरकरार
हालांकि हालिया गिरावट के बावजूद इस साल अब तक सोना करीब 4 फीसद ऊपर बना हुआ है. जनवरी के अंत में इसकी कीमत लगभग 5600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी. फिलहाल न्यूयॉर्क में सोना करीब 4508.96 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा है और यह लगातार 8 दिनों की गिरावट की ओर बढ़ रहा है, जो अक्टूबर 2023 के बाद सबसे लंबी गिरावट है.
चांदी का भी बुरा हाल
सोने के साथ-साथ चांदी में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है. चांदी इस सप्ताह 15 फीसद से ज्यादा टूट चुकी है, जबकि पैलेडियम और प्लेटिनम भी नुकसान में हैं.
यह भी पढ़ें: चॉइस ब्रोकरेज का बड़ा दांव! दिया 3 स्टॉक्स पर BUY कॉल, अगले हफ्ते मिल सकता है तगड़ा रिटर्न
Latest Stories
तेल संकट के बीच विकल्प! 20% से ज्यादा एथेनॉल ब्लेंडिंग से घटेगा कच्चे तेल का आयात, AIDA ने दिया प्रस्ताव
तेल गैस संकट के बीच भारत को बड़ी राहत, मंगलुरु पोर्ट पर पहुंचे LPG और कच्चे तेल के जहाज
वैश्विक संकट के बीच अलर्ट मोड में सरकार! PM मोदी ने बुलाई बैठक, ऊर्जा, बिजली और उर्वरक सेक्टर की करेंगे समीक्षा
